Wednesday, October 14

नई दिल्ली। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराया। करीब अपने संबोधन में उन्होंने अर्थव्यवस्था, रोजगार, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा, कृषि, महिला सशक्तिकरण और युवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार की प्राथमिकताएं सामने रखीं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाला समय भारत के लिए निर्णायक है। देश को विकास की रफ्तार बढ़ाने के साथ पुरानी कार्यशैली और धीमी निर्णय प्रक्रिया से बाहर निकलना होगा। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करने और वैश्विक स्तर पर भारत की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया।

विकास के लिए सात प्रमुख क्षेत्रों को बनाया आधार

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ‘शक्ति की सप्तधारा’ का उल्लेख किया। इसके तहत मैन्युफैक्चरिंग, कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग, तकनीक व इनोवेशन, गति शक्ति, रक्षा, ग्रीन एवं ब्लू इकोनॉमी और भारत की सॉफ्ट पावर को प्रमुख आधार बताया गया।

उन्होंने भारतीय उद्योगों से वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की अपील की। इसके लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ उत्पादों की गुणवत्ता और लागत को प्रतिस्पर्धी बनाने की जरूरत पर बल दिया। कृषि उपज और फूड प्रोसेसिंग के जरिए भारतीय उत्पादों को दुनिया के बाजारों तक पहुंचाने की बात भी कही।

सेमीकंडक्टर से रक्षा उत्पादन तक आत्मनिर्भरता पर जोर

प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि देश में तीन सेमीकंडक्टर संयंत्रों पर काम शुरू हो चुका है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, रक्षा उत्पादन और खादी-ग्रामोद्योग में हुई प्रगति को भी उन्होंने आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

रक्षा क्षेत्र में आधुनिक तकनीक विकसित करने और आयात पर निर्भरता घटाने की आवश्यकता पर भी प्रधानमंत्री ने जोर दिया। ड्रोन और सुपरसोनिक तकनीक जैसी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही।

परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य

ऊर्जा सुरक्षा को विकसित भारत की बुनियादी जरूरत बताते हुए प्रधानमंत्री ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा। उन्होंने इस दशक में पांच नए परमाणु रिएक्टर शुरू करने की योजना का भी उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री ने पाइप्ड गैस के विस्तार, सौर ऊर्जा और घरेलू तेल-गैस संसाधनों के दोहन पर भी बात की। उन्होंने बताया कि पाइप्ड गैस की पहुंच को 70 शहरों से बढ़ाकर 700 शहरों तक ले जाने और करीब 1.75 करोड़ घरों को इससे जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। वहीं 50 लाख से अधिक घरों में सौर ऊर्जा पहुंचने का भी जिक्र किया।

एक साल में एक करोड़ युवाओं को AI ट्रेनिंग

युवाओं को भविष्य की तकनीक से जोड़ने पर प्रधानमंत्री ने खास जोर दिया। उन्होंने एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की ट्रेनिंग देने की घोषणा की। इसके साथ ही मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग और युवाओं के कौशल विकास को बढ़ावा देने की बात कही।

खेलों में प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए देशव्यापी टैलेंट हंट शुरू करने का भी उल्लेख किया गया। इसे 2036 ओलंपिक की तैयारियों से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री ने खेल प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर पर पहचानने और उन्हें बेहतर अवसर देने की आवश्यकता बताई।

किसानों के लिए खाद की कीमतों का उदाहरण

कृषि क्षेत्र की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने किसानों को उपलब्ध कराई जा रही खाद की कीमतों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमत लगभग 3,000 रुपये प्रति बोरी तक है, जबकि भारतीय किसानों को यह करीब 300 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है।

इसी तरह उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 5,000 रुपये की कीमत वाले DAP को किसानों तक करीब 1,350 रुपये में पहुंचाने का उल्लेख किया।

भारतीय कंपनियों को वैश्विक पहचान दिलाने का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने भारतीय कंपनियों को देश से बाहर अपने कारोबार का विस्तार करने और वैश्विक बाजार में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने अगले दशक में भारत की 50 कंपनियों को Fortune 500 में शामिल कराने की महत्वाकांक्षा जताई।

इसके साथ ही एक भारतीय बैंक को दुनिया के शीर्ष पांच बैंकों में और एक भारतीय फार्मा कंपनी को विश्व की शीर्ष पांच कंपनियों में पहुंचाने का लक्ष्य भी सामने रखा।

राजनीति में महिलाओं की भागीदारी पर जोर

महिला प्रतिनिधित्व को लेकर प्रधानमंत्री ने संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस विषय पर मिलकर आगे बढ़ने की अपील की।

गरीबी उन्मूलन को लेकर प्रधानमंत्री ने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं।

‘होता है’ वाली कार्यशैली से बाहर निकलने की अपील

प्रधानमंत्री ने प्रशासन और देश की कार्य संस्कृति में बदलाव की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने ‘होता है’, ‘चलता है’, ‘हो जाएगा’ और ‘देखा जाएगा’ जैसी मानसिकता से बाहर निकलकर तेजी से निर्णय लेने और उन्हें समयबद्ध तरीके से लागू करने की जरूरत बताई।

उन्होंने कहा कि आने वाले पांच से सात वर्षों में उन कई कार्यों को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा, जिनके लिए देश लंबे समय से इंतजार करता रहा है।

नक्सलवाद के बाद ‘दिमागी नक्सल’ की चुनौती का जिक्र

आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का उल्लेख किया। उन्होंने हथियार उठाने वाले नक्सलवाद के साथ-साथ ‘दिमागी नक्सल’ की चुनौती का भी जिक्र किया और देश को ऐसी मानसिकता से सावधान रहने की बात कही।

प्राकृतिक आपदाओं का भी प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में उल्लेख किया। देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ और अन्य आपदाओं से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि मुश्किल की इस घड़ी में पूरा देश उनके साथ खड़ा है।

2047 के भारत की तस्वीर पर फोकस

प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में विकसित भारत 2047 की व्यापक तस्वीर दिखाई दी। आत्मनिर्भर उत्पादन, आधुनिक तकनीक, AI, ऊर्जा सुरक्षा, मजबूत रक्षा क्षमता, कृषि, रोजगार, महिला भागीदारी और युवा शक्ति को आने वाले वर्षों की विकास यात्रा के प्रमुख आधार के रूप में सामने रखा गया। प्रधानमंत्री का संदेश रहा कि भारत को लक्ष्य बड़ा रखना होगा और उसे हासिल करने के लिए निर्णय, मेहनत और क्रियान्वयन-तीनों की गति बढ़ानी होगी।

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