रांची: मगध-आम्रपाली कोल परियोजना से कथित टेरर फंडिंग और टीपीसी के लिए लेवी वसूली से जुड़े बहुचर्चित NIA मामले में बुधवार को बड़ा फैसला सामने आया है। स्पेशल NIA कोर्ट, रांची ने CCL के तत्कालीन जनरल मैनेजर अजीत कुमार ठाकुर को बरी कर दिया है, जबकि भिखन गंझू समेत अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया गया है।
कोर्ट के इस फैसले से लंबे समय से चल रहे मामले में एक अहम मोड़ आया है। अजीत कुमार ठाकुर पर मगध-आम्रपाली कोल परियोजना में टीपीसी से जुड़े लोगों के साथ कथित सांठगांठ कर लेवी वसूली और उससे जुड़े टेरर फंडिंग नेटवर्क में भूमिका के आरोप लगे थे। हालांकि, सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें इन आरोपों से बरी कर दिया।
भिखन गंझू समेत कई आरोपी दोषी
मामले में NIA की ओर से आरोपी बनाए गए लोगों में विनोद कुमार गंझू, प्रदीप राम, मुनेश गंझू, बीरबल गंझू, गोपाल सिंह भोक्ता उर्फ ब्रजेश गंझू, मुकेश गंझू उर्फ मुनेश्वर गंझू, कोहराम जी, आक्रमण जी उर्फ रविंदर गंझू, अनिश्चय गंझू, दीपु सिंह उर्फ भिखन, बिंदु गंझू उर्फ बिंदेश्वर गंझू, भिखन गंझू और संजय जैन समेत अन्य नाम शामिल रहे हैं।
12 अगस्त के कोर्ट अपडेट के मुताबिक, अजीत कुमार ठाकुर को छोड़कर मामले के अन्य आरोपियों के खिलाफ दोषसिद्धि हुई है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला झारखंड के चतरा जिले के टंडवा क्षेत्र स्थित मगध और आम्रपाली कोल परियोजनाओं में कथित लेवी वसूली और प्रतिबंधित संगठन टीपीसी से जुड़े नेटवर्क की जांच से सामने आया था।
मामले की शुरुआत टंडवा थाना कांड संख्या 2/2016 से हुई थी। बाद में केंद्र सरकार के निर्देश पर NIA ने जांच अपने हाथ में ली और मामला दर्ज किया गया। इसके बाद मामला स्पेशल NIA केस के रूप में चला।
जांच एजेंसी का आरोप था कि कोयला परियोजनाओं में काम शुरू कराने और परिवहन से जुड़े मामलों में टीपीसी से जुड़े लोगों तथा स्थानीय कमेटियों के जरिए कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों और डिलीवरी ऑर्डर धारकों से लेवी की वसूली की जाती थी। जांच में प्रति मीट्रिक टन 254 रुपये की वसूली के आरोप का भी उल्लेख अदालत के पुराने रिकॉर्ड में मिलता है।
हथियारों की बरामदगी भी बनी थी जांच का अहम आधार
मामले की शुरुआती जांच के दौरान एनआईए की कार्रवाई में भारी मात्रा में नकदी के साथ हथियार भी बरामद किए गए थे। 9 जुलाई 2018 को दर्ज मामले की जांच के क्रम में टीपीसी कमांडर कमलेश गंझू से जुड़े ठिकाने पर छापेमारी की गई थी। यहां से करीब 36 लाख रुपये नकद, 9 एमएम की पिस्टल, एके-47 राइफल समेत कई हथियार बरामद किए जाने की बात सामने आई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, हथियारों का इस्तेमाल दहशत कायम करने और कोल परियोजनाओं तथा अन्य विकास कार्यों से जुड़े ठेकेदारों से लेवी/रंगदारी वसूलने में किया जाता था।
अजीत ठाकुर पर क्या था आरोप?
अजीत कुमार ठाकुर उस अवधि में CCL के मगध-आम्रपाली क्षेत्र में जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। NIA की जांच में उनके खिलाफ आरोप लगाया गया था कि कोयला परियोजना से जुड़े विवादों को सुलझाने के क्रम में उनका संपर्क टीपीसी से जुड़े लोगों से हुआ और कथित तौर पर लेवी वसूली की व्यवस्था से उनका संबंध बना।
झारखंड हाईकोर्ट में 2021 में हुई सुनवाई के दौरान रिकॉर्ड में NIA की ओर से यह आरोप दर्ज था कि कोयला परियोजना को संचालित करने के लिए स्थानीय लोगों और टीपीसी से जुड़े लोगों के साथ बैठकें हुई थीं और कथित तौर पर एक व्यवस्था के तहत प्रति मीट्रिक टन राशि वसूलने की बात सामने आई थी।
हालांकि, आज के फैसले में स्पेशल NIA कोर्ट ने अजीत कुमार ठाकुर को बरी कर दिया है। यानी ट्रायल के अंतिम निष्कर्ष में उनके खिलाफ अभियोजन पक्ष के आरोप दोषसिद्धि तक नहीं पहुंच सके।
2018 में NIA ने शुरू की थी जांच
NIA के रिकॉर्ड से जुड़े पुराने न्यायिक दस्तावेजों के मुताबिक, मामला 2018 में NIA के पास पहुंचा। जांच के दौरान टीपीसी से जुड़े आरोपियों के खिलाफ UAPA सहित IPC और Arms Act की विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की गई थी।
मामले की जांच के दौरान टीपीसी नेटवर्क और कोयला परियोजनाओं से कथित लेवी वसूली को लेकर कई आरोप सामने आए। NIA का आरोप था कि रंगदारी के जरिए जुटाई गई रकम का इस्तेमाल उग्रवादी गतिविधियों को आर्थिक मदद देने में किया जाता था।
हाईकोर्ट में भी पहुंचा था अजीत ठाकुर का मामला
अजीत कुमार ठाकुर ने इस मामले में पहले झारखंड हाईकोर्ट का भी रुख किया था। नवंबर 2021 में हाईकोर्ट की डबल बेंच ने उनकी डिस्चार्ज याचिका से जुड़ी अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद जुलाई 2022 में हाईकोर्ट ने उनके जमानत संबंधी एक अपील को स्वीकार करते हुए जमानत देने का आदेश दिया था। अदालत ने उस समय स्पष्ट किया था कि जमानत के स्तर पर की गई टिप्पणियों को ट्रायल के दौरान अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
अब फैसले का सबसे बड़ा संदेश क्या?
इस मामले में बुधवार का फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक ही मामले में अभियोजन के आरोपों का परिणाम सभी आरोपियों के लिए एक जैसा नहीं रहा। CCL के तत्कालीन GM अजीत कुमार ठाकुर को अदालत ने बरी कर दिया, जबकि टीपीसी से जुड़े भिखन गंझू समेत अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया गया।
अब इस मामले में अगली अहम सुनवाई 18 अगस्त, 2026 को होगी, जिसमें दोषी ठहराए गए आरोपियों की सजा के बिंदु पर अदालत में बहस होगी। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि दोषी करार दिए गए आरोपियों को किस अवधि की सजा सुनाई जाए।
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