महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र के पाठ से भक्तिमय हुआ मंदिर परिसर, मां के स्वागत में हुई आतिशबाजी
महालया के पावन अवसर पर धनबाद के हीरापुर स्थित हरि मंदिर, जिसे काली बाड़ी के नाम से भी जाना जाता है, में मां की भव्य पूजा-अर्चना की गई। शनिवार की सुबह चार बजे से ही मंदिर में विशेष पूजा शुरू हो गई। मां के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धालु सुबह से ही मंदिर पहुंचने लगे। महालया के अवसर पर मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का विशेष माहौल देखने को मिला।
महालया के साथ ही देवी पक्ष की शुरुआत और मां दुर्गा के स्वागत का उत्साह भी बढ़ गया है। इसी क्रम में हीरापुर स्थित हरि मंदिर में धार्मिक परंपराओं के अनुसार विशेष पूजा का आयोजन किया गया। मंदिर में महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का पाठ किया गया, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र के पाठ से गूंजा मंदिर परिसर
महालया के अवसर पर हरि मंदिर में सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया। महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र के पाठ ने पूजा के माहौल को और खास बना दिया। मां की आराधना के लिए पहुंचे श्रद्धालु भक्ति भाव में लीन नजर आए। मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ मां के आगमन की खुशियां भी साझा की गईं।
बंगाली समुदाय में महालया का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इस दिन को मां दुर्गा के आगमन के संदेश से जोड़कर देखा जाता है। महालया के साथ ही दुर्गा पूजा को लेकर लोगों का उत्साह बढ़ने लगता है और पूजा पंडालों से लेकर घरों तक तैयारियां तेज हो जाती हैं।
मां के स्वागत में की गई आतिशबाजी
हरि मंदिर में महालया के अवसर पर मां के स्वागत के लिए आतिशबाजी भी की गई। मंदिर के पुजारी भजन दा ने बताया कि महालया पर मां के आगमन की खुशी में मंदिर परिसर में आतिशबाजी की परंपरा निभाई जाती है। यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है और मां के स्वागत के उत्साह को दर्शाता है।
महालया से शुरू होता है देवी पक्ष का उत्साह
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महालया पितृपक्ष की समाप्ति और देवी पक्ष के आरंभ का प्रतीक है। इसके साथ ही शारदीय दुर्गा पूजा की प्रतीक्षा और तैयारियां तेज हो जाती हैं। इस अवसर पर बंगाल सहित झारखंड के कई इलाकों में विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।
दुर्गा पूजा की तैयारियों के दौरान मूर्तिकार मां दुर्गा की प्रतिमा की आंखों को अंतिम रूप देते हैं। इस परंपरा को चक्षुदान कहा जाता है, जो देवी की प्रतिमा को जीवंत स्वरूप प्रदान करने से जुड़ी मानी जाती है।
धनबाद के हीरापुर हरि मंदिर में महालया पर हुई पूजा-अर्चना ने भी दुर्गा पूजा के आगमन का संदेश दिया। सुबह से मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं की आस्था और मां के स्वागत में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। अब श्रद्धालुओं को मां दुर्गा के आगमन और आगामी दुर्गा पूजा उत्सव का इंतजार है।


