दक्षिण कोरिया के बाजार ने निचले स्तर से करीब 57% की वापसी की, जापान और अमेरिकी टेक शेयरों में भी सुधार; ब्राजील में चुनावी नतीजों के बाद एक दिन में 13.88% गिरा शेयर बाजार
नई दिल्ली। दुनिया के प्रमुख शेयर बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव के बीच कई बड़े सूचकांक अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं। दक्षिण कोरिया, चीन, जापान, हांगकांग और अमेरिका के बाजारों में बड़ी गिरावट के बाद रिकवरी देखने को मिली है, लेकिन सभी बाजारों की वापसी एक जैसी नहीं रही। दक्षिण कोरिया का KOSPI निचले स्तर से उबरने में सबसे आगे रहा, जबकि भारत के Sensex और Nifty की रिकवरी अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई दी। वहीं, ब्राजील में राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के दोबारा चुने जाने के बाद शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। <Cite refs={[“turn250742search2″,”turn250742search0”]}/>
KOSPI में 59% की गिरावट, फिर जोरदार वापसी
दिए गए आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण कोरिया का KOSPI इस तुलना में सबसे ज्यादा गिरावट वाले सूचकांकों में शीर्ष पर है। इसका रिकॉर्ड उच्च स्तर 9,385.59 अंक और 52 सप्ताह का निचला स्तर 3,833.35 अंक रहा। इस तरह रिकॉर्ड स्तर से निचले स्तर तक इसमें 59.16% की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि, 28 अक्टूबर को KOSPI में जोरदार तेजी आई और यह 6.63% उछलकर 6,012.44 अंक पर बंद हुआ। इस स्तर पर सूचकांक अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर से करीब 57% ऊपर आ चुका था। इसके बावजूद यह रिकॉर्ड उच्च स्तर से लगभग 36% नीचे था। यानी बड़ी रिकवरी के बाद भी बाजार अपने पुराने शिखर तक नहीं पहुंच पाया। <Cite refs={[“turn250742search2″,”turn250742search5”]}/>
चीन और जापान में भी उतार-चढ़ाव
चीन के Shanghai Composite का ऐतिहासिक उच्च स्तर 6,124.04 अंक और हालिया 52 सप्ताह का निचला स्तर 3,574.27 अंक रहा। इन दोनों स्तरों के बीच गिरावट 41.64% बैठती है। हालांकि, ऐतिहासिक शिखर और 52 सप्ताह के निचले स्तर की तुलना को केवल वर्ष 2026 में आई गिरावट नहीं माना जाना चाहिए।
जापान के Nikkei 225 में रिकॉर्ड स्तर 72,831.73 से निचले स्तर 48,235.30 तक 33.77% की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद सूचकांक करीब 63,954 अंक तक लौटा, जो निचले स्तर से लगभग 33% की रिकवरी है।
हांगकांग का Hang Seng अपने रिकॉर्ड स्तर से निचले स्तर तक 32.75% गिरा। अमेरिकी Nasdaq Composite में यह गिरावट 25.37% रही, जबकि निचले स्तर से इसकी वापसी करीब 28% बताई गई है। S&P 500, Dow Jones और यूरोप के DAX तथा फ्रांस के CAC 40 में भी रिकॉर्ड स्तर और निचले स्तर के बीच उल्लेखनीय अंतर दिखाई दिया।
Sensex-Nifty की वापसी क्यों कमजोर?
भारतीय शेयर बाजार की तस्वीर दूसरे प्रमुख बाजारों से अलग रही। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, Sensex का रिकॉर्ड स्तर 86,159.02 अंक और 52 सप्ताह का निचला स्तर 71,292.88 अंक रहा। इस आधार पर शिखर से निचले स्तर तक गिरावट 17.25% रही। वहीं, Nifty 50 का रिकॉर्ड स्तर 26,373.20 अंक और निचला स्तर 22,179.90 अंक रहा, यानी गिरावट 15.90% थी।
मौजूदा स्तरों पर Sensex करीब 73,280 और Nifty 22,770 अंक के आसपास रहे। इस तरह दोनों सूचकांक अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर से लगभग 3% ही ऊपर थे। महंगे कच्चे तेल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को भारतीय बाजार की धारणा पर दबाव डालने वाले कारकों के रूप में देखा जा रहा है।
ब्राजील में एक दिन में 13.88% टूटा बाजार
वैश्विक बाजारों के उतार-चढ़ाव के बीच ब्राजील में 26 अक्टूबर को चुनावी नतीजों के बाद भारी बिकवाली हुई। राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के दोबारा चुने जाने के बाद प्रमुख सूचकांक Ibovespa 13.88% गिरकर 176,608.23 अंक पर बंद हुआ। यह मार्च 2020 के बाद इसकी सबसे बड़ी दैनिक गिरावट बताई गई। कारोबार के दौरान सूचकांक 17% से अधिक टूट गया, जिसके बाद एक्सचेंज को अस्थायी रूप से कारोबार रोकना पड़ा। <Cite refs={[“turn250742search0″,”turn250742search4”]}/>
चुनाव से पहले बाजार के कुछ निवेशक विपक्षी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो की जीत और संभावित राजकोषीय सुधारों की उम्मीद कर रहे थे। नतीजे आने के बाद सरकारी खर्च, सार्वजनिक कर्ज और भविष्य की आर्थिक नीतियों को लेकर अनिश्चितता बढ़ी। इसी दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ब्राजील की मुद्रा रियल में भी 8.21% की तेजी के साथ डॉलर की कीमत बढ़ी। <Cite refs={[“turn250742search0″,”turn250742search6”]}/>
क्या संकेत दे रहे हैं बाजार के आंकड़े?
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बाजारों में बड़ी गिरावट के बाद आई रिकवरी हर देश में अलग-अलग रही है। KOSPI और Nikkei ने निचले स्तर से उल्लेखनीय वापसी की, जबकि भारतीय सूचकांकों की रिकवरी सीमित रही। हालांकि, किसी सूचकांक का निचले स्तर से ऊपर आना अपने आप में आगे तेजी की गारंटी नहीं है। निवेशकों के लिए वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, कंपनियों के नतीजों, ब्याज दरों और विदेशी निवेश के रुझान पर नजर रखना महत्वपूर्ण बना हुआ है।
