जमशेदपुर, झारखंड: बिष्टुपुर थाना क्षेत्र में कुछ समय पहले हुए सनसनीखेज हिमांशु सिंह हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में जमशेदपुर पुलिस को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। यह मामला, जिसने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया था, अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) ने इस जघन्य अपराध में शामिल डीडी बार के मैनेजर विजय महानंद सहित तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक विधि-विरुद्ध बालक को भी निरुद्ध किया गया है। इन नई गिरफ्तारियों के साथ ही, इस संवेदनशील मामले में अब तक कुल नौ आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया जा चुका है, जो न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
हिमांशु सिंह हत्याकांड: कैसे सुलझी कड़ी, मुख्य आरोपियों का कनेक्शन
मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित एसआईटी लगातार जांच में जुटी थी। एसएसपी डॉ. एहतेशाम वकारिब ने हाल ही में आयोजित एक प्रेसवार्ता में इस सफलता का विस्तृत ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में बिरसानगर निवासी एवं डीडी बार के मैनेजर विजय महानंद (42 वर्ष), धतकीडीह निवासी लखिन्द्र लोहार (20 वर्ष) और गम्हरिया थाना क्षेत्र के धतकीडीह निवासी जगदीश मंडल उर्फ रोहन उर्फ मुर्गा (24 वर्ष) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, इस खौफनाक वारदात में शामिल एक नाबालिग को भी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए निरुद्ध किया गया है। पुलिस की यह कार्रवाई दर्शाती है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और अपराध कितना भी गहरा क्यों न हो, अपराधी बच नहीं सकते।
अपराधियों के छिपने में मदद और हथियारों की बरामदगी
पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी जगदीश मंडल ने घटना के बाद मुख्य हमलावरों को फरार होने में, उन्हें सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराने में और हत्या में इस्तेमाल किए गए घातक हथियारों को छिपाने में अहम भूमिका निभाई थी। उसकी गिरफ्तारी से इस साजिश की कई परतें खुल गई हैं। वहीं, विजय महानंद, जो डीडी बार का मैनेजर था, उसकी भूमिका की भी गहन जांच के बाद पुष्टि हुई, जिसके बाद उसे बिरसानगर स्थित उसके घर से गिरफ्तार कर लिया गया। यह दर्शाता है कि घटना में न केवल सीधे हमलावर, बल्कि उन्हें मदद पहुंचाने वाले और अपराध में सहयोग करने वाले भी पुलिस की निगाहों से बच नहीं पाए हैं।
एसआईटी की टीम ने गिरफ्तार आरोपी लखिन्द्र लोहार और निरुद्ध किए गए नाबालिग से मिली जानकारी के आधार पर धतकीडीह स्थित एक ठिकाने पर छापेमारी की। इस छापेमारी में पुलिस को कई चौंकाने वाले सबूत मिले। हत्या में इस्तेमाल किए गए कई घातक हथियार बरामद किए गए, जो इस जघन्य अपराध की भयावहता को दर्शाते हैं। बरामद सामान में एक लोहे का चापड़, एक कुल्हाड़ी, एक भुजाली, एक बड़ा लोहे का चाकू, आठ लोहे के पंच, एक स्टील की गुप्ती जैसे हथियार शामिल हैं। इसके अलावा, अपराधियों द्वारा इस्तेमाल की गई हीरो कंपनी की मोटरसाइकिल (जेएच-05ईएच-7980) और पांच मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। पुलिस का दृढ़ता से मानना है कि इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल हिमांशु सिंह पर जानलेवा हमले के लिए किया गया था।
वारदात की रात का पूरा घटनाक्रम
यह दुखद घटना 27 जून 2026 की रात घटी थी, जब डीडी बार के अंदर हिमांशु सिंह और उनके साथी प्रत्युष सिंह का विश्वनाथ लोहरा उर्फ बोदरा और उसके साथियों से विवाद हो गया था। विवाद इतना बढ़ गया कि बार के बाउंसरों को दोनों पक्षों को बाहर निकालना पड़ा। दुर्भाग्यवश, उसी दौरान पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और हिमांशु सिंह व उनके साथी को सुरक्षा के उद्देश्य से पुलिस वाहन में बैठा लिया। लेकिन जो हुआ, उसने सबको चौंका दिया। आरोप है कि हमलावरों ने पुलिस वाहन से ही हिमांशु सिंह और उनके साथी को जबरन उतार लिया और फिर धारदार हथियारों से उन पर बेरहमी से हमला कर दिया। इस हमले में हिमांशु सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई, जिसने जमशेदपुर में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
बिष्टुपुर थाना में इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर एसआईटी लगातार जांच कर रही है। यह हत्याकांड समाज में बढ़ती आपराधिक गतिविधियों और युवाओं के बीच पनपते आक्रोश की एक दुखद बानगी है। पुलिस ने न केवल अपराधियों को पकड़ने में तेजी दिखाई है, बल्कि वारदात में इस्तेमाल किए गए सबूतों को भी प्रभावी ढंग से जुटाया है। यह एक ऐसा मामला है, जहाँ हर किसी की निगाहें न्याय प्रणाली पर टिकी हैं। झारखंड की ताजा आपराधिक खबरें भी अक्सर इस तरह की घटनाओं पर प्रकाश डालती हैं, जो स्थानीय पुलिस के लिए चुनौती पेश करती हैं।
न्याय की उम्मीद और फरार आरोपियों की तलाश
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले की तह तक जाकर हर आरोपी को पकड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। फरार अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और पुलिस पूरी मुस्तैदी के साथ काम कर रही है। हिमांशु सिंह के परिवार को इस घटना से गहरा आघात लगा है, और पुलिस की यह कार्रवाई उनके लिए न्याय की एक उम्मीद बनकर आई है। जमशेदपुर पुलिस का कहना है कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि इस जघन्य हिमांशु सिंह हत्याकांड में शामिल कोई भी दोषी बच न पाए और पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द न्याय मिल सके। यह घटना हमें याद दिलाती है कि समाज में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयासों और कड़ी निगरानी की आवश्यकता है। शहर के लोग पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि ऐसे जघन्य अपराधों पर लगाम लगेगी।
