रांची, 24 अक्टूबर। ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की शैक्षणिक स्थिति और सीखने के स्तर को समझने के उद्देश्य से रांची जिले के 30 गांवों में आयोजित एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (ASER) सर्वेक्षण में राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, कांके के प्रशिक्षु शिक्षकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 6 अक्टूबर से 12 अक्टूबर 2026 तक चले इस सर्वेक्षण में भाग लेने वाले प्रशिक्षु शिक्षकों को शनिवार को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। महाविद्यालय परिसर में आयोजित समारोह में प्रशिक्षुओं के प्रयासों की सराहना की गई और इसे शिक्षक प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण व्यावहारिक हिस्सा बताया गया।
महाविद्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, सर्वेक्षण में सक्रिय सहभागिता के लिए 69 प्रशिक्षु शिक्षकों को प्रमाण पत्र दिए गए। इस दौरान असर झारखंड के रिसर्च मैनेजर संतोष कुमार मौजूद रहे। महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. रमण कुमार झा ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए। सर्वेक्षण का संचालन महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक और सर्वेक्षण संयोजक प्रो. भागीरथ आर्य के नेतृत्व में किया गया।
30 गांवों में बच्चों की शिक्षा का किया आकलन
असर सर्वेक्षण का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूली शिक्षा की वास्तविक स्थिति को समझना और बच्चों के सीखने के स्तर से संबंधित जानकारी जुटाना है। रांची जिले के 30 गांवों में किए गए इस सर्वेक्षण के दौरान प्रशिक्षु शिक्षकों को ग्रामीण परिवेश में जाकर समुदाय के साथ काम करने और शिक्षा से जुड़ी जमीनी परिस्थितियों को समझने का अवसर मिला।
इस तरह की गतिविधियों से प्रशिक्षु शिक्षक केवल पाठ्यक्रम और कक्षा तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उन्हें यह जानने का भी मौका मिलता है कि बच्चों की शिक्षा को प्रभावित करने वाली चुनौतियां क्या हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक परिस्थितियों को समझना और बच्चों की सीखने की क्षमता का आकलन करना भावी शिक्षकों के लिए उपयोगी अनुभव माना जाता है।
व्यावहारिक अनुभव से बेहतर शिक्षक बनेंगे प्रशिक्षु
प्रमाण पत्र वितरण समारोह में महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. रमण कुमार झा ने प्रशिक्षु शिक्षकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सर्वेक्षण प्रशिक्षुओं को विद्यालयी शिक्षा की जमीनी हकीकत समझने, बच्चों के सीखने के स्तर का आकलन करने और ग्रामीण परिवेश में मौजूद शैक्षणिक चुनौतियों को पहचानने का व्यावहारिक अवसर देते हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण के दौरान इस तरह की गतिविधियां प्रशिक्षुओं को अधिक संवेदनशील, दक्ष और जिम्मेदार शिक्षक बनने में सहायता करती हैं। भावी शिक्षकों के लिए जरूरी है कि वे सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक परिस्थितियों को भी समझें, ताकि भविष्य में विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुरूप शिक्षण कार्य कर सकें।
हर साल सर्वेक्षण में भाग लेते हैं प्रशिक्षु शिक्षक
सर्वेक्षण के संयोजक प्रो. भागीरथ आर्य ने बताया कि राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, कांके के प्रशिक्षु शिक्षक प्रत्येक वर्ष आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद असर सर्वेक्षण में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। इस प्रक्रिया से उन्हें समुदाय के बीच कार्य करने, बच्चों की शैक्षिक उपलब्धियों को समझने और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए जरूरी अनुभव हासिल होता है।
उन्होंने सर्वेक्षण को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी प्रशिक्षुओं की सराहना की। उनके अनुसार, क्षेत्रीय सर्वेक्षण प्रशिक्षुओं को शिक्षा से जुड़े मुद्दों को करीब से देखने और व्यावहारिक परिस्थितियों के आधार पर अपनी समझ विकसित करने का अवसर प्रदान करता है।
महाविद्यालय के शिक्षकों और प्रशिक्षुओं का रहा योगदान
कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक डॉ. चंद्र माधव सिंह, डॉ. जाकिर हुसैन, पंकज कुमार मेहता, धनंजय तिवारी और डॉ. ओम प्रकाश उपस्थित रहे।
सर्वेक्षण को सफल बनाने में सत्र 2026-28 के छात्र संसद के प्रधानमंत्री एवं प्रशिक्षु शिक्षक कृष्ण आनंद, उपप्रधानमंत्री मो. कामरान सहित निलेश तिवारी, अभिषेक राजेंद्र एक्का, नमन वीरेंद्र कुल्लू, मनन कुमार, उत्कर्ष भारद्वाज, प्रतीक शर्मा, नितिन, अमन पीटर लकड़ा, पंकज कुमार साव, सचिन कुमार, समीर इग्नसिस लकड़ा, सुबोध असुर, आशीष लकड़ा, उदय सिंह, शुभम माहुली, प्रशांत, समीर विश्वकर्मा, रणजीत कुमार, अभिजीत कुमार, रोहित कुमार, देवेंद्र दास, अनिकेत कुमार सिंह, अमित रंजन, गौरव राज, प्रद्युम्न प्रमाणिक, मो. एनामुल हक, आर्यन और राजकुमार समेत अन्य प्रशिक्षुओं का योगदान रहा।
महाविद्यालय का यह आयोजन भावी शिक्षकों को सैद्धांतिक शिक्षा के साथ क्षेत्रीय सर्वेक्षण और व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे प्रशिक्षुओं में समाज और शिक्षा के प्रति जागरूकता विकसित करने के साथ ग्रामीण शिक्षा की चुनौतियों को समझने की क्षमता भी मजबूत होती है।
