देश में नशे के खिलाफ जंग अब नया मोड़ लेने जा रही है। अब तक की कार्रवाई ज्यादातर छोटे तस्करों की गिरफ्तारी और नशीले पदार्थों की बरामदगी तक सीमित रही है, लेकिन नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने अब पूरे ड्रग नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की तैयारी कर ली है। ब्यूरो के “Vision Documents on Narcotic Control 2026-29” में अगले तीन वर्षों के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है, जिसका सीधा असर झारखंड में भी देखने को मिलेगा, जहां अफीम की अवैध खेती और नशीले पदार्थों की तस्करी लंबे समय से एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई है।
NCB के रडार पर 100 कार्टेल
इस रोडमैप के तहत 2026 से 2029 के बीच देशभर में 100 प्रमुख ड्रग कार्टेल चिन्हित कर उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का लक्ष्य रखा गया है। दिसंबर 2027 तक कार्टेल की खुफिया जानकारी जुटाकर डोजियर तैयार किया जाएगा, जिसके बाद उनके आर्थिक और आपराधिक नेटवर्क की जांच होगी। चिन्हित कार्टेल को खत्म करने के लिए दिसंबर 2029 तक की समयसीमा रखी गई है, जबकि राज्य-जिला स्तर पर कार्रवाई मजबूत करने का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक है।
डार्कनेट-क्रिप्टो पर विशेष सेल, आर्थिक ढांचे पर चोट
तस्करी में डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए दिसंबर 2026 तक डार्कनेट, क्रिप्टोकरेंसी और सोशल मीडिया से जुड़े मामलों के लिए विशेष सेल बनाई जाएगी। इसके साथ ही 100 चिन्हित कार्टेल मामलों में दिसंबर 2027 तक वित्तीय जांच शुरू करने और सभी कॉमर्शियल क्वांटिटी NDPS मामलों में इसे अनिवार्य बनाने पर जोर है। NCB ने दिसंबर 2026 तक 1000 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित संपत्ति कुर्क करने का लक्ष्य भी तय किया है।
ANTF होगा मजबूत..1000 अपराधियों पर शिकंजा
मार्च 2027 तक 1000 आदतन अपराधियों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही मॉडल एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) को मजबूत किया जाएगा झारखंड में यह गठित हो चुका है। नियमित जिला-राज्य स्तरीय NCORD बैठकों, रियल टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग और NIDAN-MANAS जैसे पोर्टल के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर दिया जाएगा।
झारखंड के लिए क्यों अहम है यह रोडमैप
झारखंड लंबे समय से अफीम की अवैध खेती को लेकर एजेंसियों के हाईअलर्ट पर रहा है। राज्य में अफीम, गांजा और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी के साथ खपत का नेटवर्क भी चिंता का विषय है। NCB की नई रणनीति के तहत अब सिर्फ खेती करने वालों या छोटे तस्करों तक सीमित न रहकर पूरे सप्लाई नेटवर्क और उसके पीछे के आर्थिक तंत्र की पड़ताल आसान होगी।
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