Friday, November 6

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में भारत ने एक और कदम आगे बढ़ाया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 3 नवंबर को IndiaAI मिशन के तहत तीन देसी AI मॉडल लॉन्च किए: EKA-1, धीर 2B और धीर 5B।

इनमें सबसे खास बात यह है कि धीर मॉडल सीधे मोबाइल फोन पर, बिना इंटरनेट के चल सकते हैं।

धीर 2B और धीर 5B: जेब में ऑफलाइन AI

धीर मॉडल बेंगलुरु की कंपनी ZenteiQ ने बनाए हैं। ये छोटे और हल्के मॉडल हैं, जिन्हें फोन में एक बार डाउनलोड करने के बाद नेटवर्क के बिना भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। ये अंग्रेजी और 10 भारतीय भाषाओं में काम करते हैं। कंपनी इनके लिए एक मुफ्त एंड्रॉयड और iOS ऐप लाने की तैयारी में है।

डेवलपर्स के लिए मॉडल सरकारी प्लेटफॉर्म AIKosh पर पहले से उपलब्ध हैं, और दिसंबर में शोधकर्ताओं के लिए एक बड़ा मॉडल लाने की योजना है।

इनका इस्तेमाल दस्तावेजों के काम, जानकारी खोजने और कई भाषाओं वाले ऐप्स में हो सकता है। रक्षा, सरकारी कामकाज, उद्योग और शिक्षा इनके मुख्य क्षेत्र बताए गए हैं।

EKA-1: 22 भारतीय भाषाओं वाला बड़ा मॉडल

EKA-1 बेंगलुरु की सॉकेट एआई (Soket AI) ने बनाया है। यह करीब 26 अरब पैरामीटर वाला बड़ा मॉडल है, जिसे करीब 7.5 लाख करोड़ टोकन के डेटा पर प्रशिक्षित किया गया है। यह संविधान की सभी 22 अनुसूचित भाषाओं और अंग्रेजी में काम करता है। गणित, कोडिंग और तर्क वाले कामों के लिए बना यह मॉडल खास तौर पर बैंकिंग-फाइनेंस, साइबर सुरक्षा और रक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए है। इसे इंटरनेट से कटे सुरक्षित सर्वरों पर भी चलाया जा सकता है, ताकि संवेदनशील डेटा बाहर न जाए। कंपनी एक महीने में इसे ओपन सोर्स करने की योजना बना रही है।

क्यों जरूरी हैं देसी AI मॉडल?

अभी दुनिया के ज्यादातर बड़े AI मॉडल विदेशी कंपनियों के हैं। सॉकेट एआई के CEO अभिषेक उप्पल के मुताबिक उनका लक्ष्य खासकर संवेदनशील क्षेत्रों में विदेशी मॉडलों पर निर्भरता कम करना है। MeitY सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि ये मॉडल AI के क्षेत्र में भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता मजबूत कर सकते हैं।
IndiaAI मिशन को केंद्रीय कैबिनेट ने मार्च 2024 में पांच साल के लिए करीब 10,372 करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी थी। इसका मकसद देश में अपनी AI क्षमता, कंप्यूटिंग ढांचा और स्टार्टअप तैयार करना है।

झारखंड के गांवों के लिए क्या मतलब?

झारखंड के कई पहाड़ी और जंगली इलाकों में आज भी मोबाइल नेटवर्क कमजोर है। ऐसे में फोन पर बिना इंटरनेट चलने वाला AI काम का साबित हो सकता है। सेहत कार्यकर्ता, शिक्षक, छात्र और पंचायत कर्मचारी किसी दस्तावेज को समझने, सवालों के जवाब ढूंढने या अनुवाद के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

हालांकि आम लोगों के लिए मुफ्त ऐप अभी आना बाकी है, और धीर किन 10 भाषाओं में काम करेगा, इसकी पूरी सूची अभी सामने आनी है।
आम इस्तेमाल में ध्यान रखें
ऑफलाइन हो या ऑनलाइन, AI के जवाब हमेशा सही हों, यह जरूरी नहीं। सेहत, पैसे या कानून से जुड़े बड़े फैसलों से पहले किसी जानकार से सलाह जरूर लें, और ऐप सिर्फ आधिकारिक स्टोर से ही डाउनलोड करें।

कुल मिलाकर, ये तीन मॉडल इस बात का संकेत हैं कि भारत अब AI का सिर्फ इस्तेमाल करने वाला नहीं, बनाने वाला देश भी बनने की कोशिश में है। असली परीक्षा तब होगी, जब ये आम लोगों के फोन तक पहुंचेंगे।

Share.
Next Story
बदलेगी इटकी रेलवे स्टेशन की सूरत, मॉडल स्टेशन बनाने की तैयारी; यात्रियों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं
Exit mobile version