रांची: JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितता की जांच अब उन अभ्यर्थियों तक पहुंच गई है, जिन्होंने परीक्षा में सफलता हासिल की थी। मामले में गिरफ्तार उमाकांत उरांव, मनोज कुमार और रोशन केरकेट्टा को सीआईडी ने पांच दिनों की रिमांड पर लिया है। जांच एजेंसी अब इनसे परीक्षा में कथित सेटिंग और पूरे नेटवर्क से जुड़े सवालों के जवाब तलाश रही है।
सीआईडी के मुताबिक, तीनों पर आरोप है कि उन्होंने अनुचित तरीके से परीक्षा में सफलता हासिल की। जांच में OMR शीट में कथित हेरफेर का मामला भी सामने आया है। इससे पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ और जब्त डिजिटल उपकरणों की जांच के दौरान मिले सुरागों के आधार पर इन तीनों को गिरफ्तार किया गया था।
रिमांड में खुलेगा कथित सिंडिकेट का राज
अब सीआईडी यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी का पूरा नेटवर्क कैसे काम करता था। तीनों से यह जानकारी लेने की कोशिश की जाएगी कि परीक्षा में सफलता दिलाने के लिए किससे संपर्क किया गया, कितने पैसों का लेन-देन हुआ और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल थे।
जांच के दौरान उमाकांत उरांव की भूमिका को लेकर भी सीआईडी कई पहलुओं पर पूछताछ करेगी। जांच एजेंसी के अनुसार, वह खुद अभ्यर्थी होने के साथ कथित तौर पर एजेंट की भूमिका में भी था।
उमाकांत मूल रूप से लोहरदगा के जुरियो क्षेत्र का रहने वाला है और रांची के बरियातू इलाके में रह रहा था। वहीं रोशन केरकेट्टा नगड़ी क्षेत्र का निवासी है और वर्तमान में कोकर में रहता था। मनोज कुमार धुर्वा के सेक्टर-3 स्थित क्वार्टर में रह रहा था।
OMR शीट से भी खुल सकता है फर्जीवाड़े का राज
दूसरी ओर, JPSC संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025 की प्रारंभिक परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों की OMR शीट की जांच भी सीआईडी कर रही है।
परीक्षा में कुल 2,204 अभ्यर्थी सफल हुए थे। सीआईडी ने इन सभी से OMR शीट की कार्बन कॉपी की फोटो या PDF उपलब्ध कराने को कहा था। इनमें से 1,750 अभ्यर्थियों ने अपनी OMR शीट भेज दी, जबकि 454 अभ्यर्थियों ने अब तक शीट उपलब्ध नहीं कराई है।
जांच एजेंसी अब प्राप्त OMR शीट का मिलान और तकनीकी जांच कर रही है। वहीं, जिन अभ्यर्थियों ने OMR शीट नहीं भेजी है, उनकी भूमिका को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
किसने और कैसे कराई सेटिंग? जांच में तलाशे जा रहे जवाब
सीआईडी की जांच का फोकस अब सिर्फ तीन गिरफ्तार अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है। एजेंसी कथित परीक्षा सिंडिकेट के दूसरे सदस्यों, एजेंटों और लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों की पहचान करने में जुटी है।
OMR की जांच और रिमांड पर पूछताछ से यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी कितने स्तर तक फैली थी और इसमें कितने लोग शामिल थे। जांच में जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
इसे भी पढ़े – ‘आधी मांगें मानकर आंदोलन खत्म न समझे सरकार’, JPSC-JSSC पर बाबूलाल का बड़ा बयान
