Tuesday, October 13

रांची में कांग्रेस के प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आईं तो सवाल सिर्फ चुनाव आयोग के विरोध का नहीं, विरोध के तरीके का भी खड़ा हो गया। कहीं प्रशासन के साथ धक्का-मुक्की, कहीं बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश और कहीं उग्र नारेबाजी – आखिर विरोध का यह कैसा तरीका है? झारखंड में कांग्रेस खुद सरकार का हिस्सा है। यानी सड़क पर जिस सरकारी मशीनरी से टकराव हो रहा है, वह उसी सरकार की मशीनरी है जिसमें कांग्रेस सत्ता की साझेदार है।

क्या कांग्रेस चुनाव आयोग का विरोध करते-करते अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रही है? और अगर ऐसा है, तो क्या JMM अपने ही गठबंधन सहयोगी के इस तेवर को बर्दाश्त करेगी?

यूथ कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ता चुनाव आयोग कार्यालय का घेराव करने पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ “ज्ञानेश कुमार हटाओ” और “ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो” जैसे नारे लगाए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मुख्य गेट तक पहुंचने से रोकने के लिए मजबूत बैरिकेडिंग की थी, लेकिन कार्यकर्ता बैरिकेडिंग के आगे बढ़ने और उसे पार करने की कोशिश करते नजर आए।

संवैधानिक आंदोलन : कुमार राजा?

यह तो राज्यव्यापी आंदोलन है। लेकिन मालूम यह होता है कि केंद्र में बैठे आला अधिकारी से प्रेरित होकर झारखंड के युवा मोर्चा खोल बैठे है।

युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कुमार राजा ने प्रेस कांफ्रेंस कर बोला कि – “लोकतंत्र को और संविधान को कमजोर करने का काम किया जा रहा है…” सोचने वाली बात ये है कि जो लोकतंत्र पर सवाल उठा रहे है , वो स्वयं लोकतंत्र के विरोध में जाकर प्रदर्शन कर रहे है। आखिर ये कैसी सरकार है?

उनका कहना है कि जनता अब जागरूक हो गई है लेकिन प्रतीत ये हो रहा है कि झारखंड कि युवा कांग्रेस इतनी जागरूक हो गई है कि उन्हें अब JMM भी नहीं भा रहा। अपने हक़ के लिए प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है लेकिन ये कैसी संवैधानिक अधिकार है जिसमें आंखो में पट्टी बांध कर प्रदर्शन किया जा रहा है।

गुस्सा किस पर? निशाना किसका?

प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे हैं ज्ञानेश कुमार के खिलाफ। लेकिन ज्ञानेश कुमार यहां हैं ही नहीं। जिस व्यक्ति के खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा है, वह झारखंड में मौजूद भी नहीं है, तो फिर प्रशासन के साथ धक्का-मुक्की और बैरिकेडिंग से जोर-आजमाइश किसके खिलाफ है?

कहीं जिला प्रशासन के साथ टकराव, कहीं पुलिस से धक्का-मुक्की और कहीं उग्र प्रदर्शन। आखिर यह विरोध किसका है और गुस्सा किस पर निकाला जा रहा है?

अगर विरोध चुनाव आयोग से है, तो विरोध का निशाना चुनाव आयोग होना चाहिए। लेकिन मौके पर जिस तरह प्रशासन और पुलिस के साथ टकराव की तस्वीर सामने आ रही है, इससे तो यही प्रतीत हो रहा है कि विरोध प्रदर्शन के नाम पर सरकारी व्यवस्था से ही भिड़ने के फिराक से कांग्रेस रोड पर उतरी है।

अपनी ही सरकार से लड़ रही कांग्रेस?

झारखंड में कांग्रेस सत्ता में है। JMM के साथ मिलकर सरकार चला रही है। यानी जिस प्रशासन और सरकारी मशीनरी के सामने कांग्रेस के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं, वह उसी सरकार की मशीनरी है, जिसका कांग्रेस खुद हिस्सा है।

सरकार में शामिल होकर सरकार की ही मशीनरी से भिड़ना, बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश करना और प्रशासन के साथ धक्का-मुक्की तक पहुंच जाना आखिर किस तरह की राजनीति है?

एक तरफ सत्ता में हिस्सेदारी, दूसरी तरफ सड़क पर सत्ता की ही व्यवस्था के खिलाफ आक्रामक तेवर। यह विरोध है या अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा?

सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का जिम्मेदार कौन?

प्रदर्शन के नाम पर सरकारी संपत्ति को भी निशाना बनाया गया। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि सरकारी परिसर की दीवार को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, गेट पर लात मारी जा रही है और झारखंड सरकार की संपत्ति पर कालिख पोती जा रही है।

सरकार के खिलाफ विरोध जताने के लिए सरकार की ही संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का यह कैसा तरीका है? जिस सरकारी संपत्ति को जनता के पैसे से बनाया और संभाला जाता है, उसे नुकसान पहुंचाने का अधिकार आखिर किसने दिया? क्या सरकारी संपत्ति को तोड़ना, गेट पर लात मारना और दीवारों पर कालिख पोतना ही लोकतांत्रिक प्रदर्शन का तरीका रह गया है?

कांग्रेस के तेवर पर JMM की चुप्पी भी सवालों में

एक तरफ सरकार कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने की बात करती है, दूसरी तरफ उसी सरकार में शामिल दल के कार्यकर्ता सड़क पर प्रशासन के साथ धक्का-मुक्की करते नजर आ रहे है।

तो क्या JMM इस पूरे घटनाक्रम को सामान्य विरोध प्रदर्शन मानेगी?

क्या गठबंधन में रहते हुए अपनी ही सरकार की व्यवस्था से भिड़ना स्वीकार्य है? क्या सरकार में शामिल दल अपने ही प्रशासन के खिलाफ इस तरह सड़क पर उतर सकते हैं? और अगर यह सब गलत है तो JMM कब बोलेगी?

फिलहाल सवाल बहुत हैं और तस्वीर सामने है – चुनाव आयोग के खिलाफ नारे, लेकिन टकराव प्रशासन से। निशाना ज्ञानेश कुमार, लेकिन धक्का सरकारी मशीनरी से। सत्ता में कांग्रेस, सरकार JMM की… और सड़क पर लड़ाई भी उसी सरकार की व्यवस्था से।

अब देखना यह है कि JMM इस पूरे प्रदर्शन को सिर्फ कांग्रेस का आंदोलन मानकर चुप रहती है या फिर अपने ही गठबंधन सहयोगी के इस विरोध के तरीके पर कोई रुख सामने रखती है।

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