बिहार में फर्जी आधार कार्ड और अन्य पहचान दस्तावेज बनाने का बड़ा रैकेट पकड़ा गया है, जिसने पूरे देश में इस मुद्दे को गंभीर बना दिया है। झारखंड के लिए यह खबर इसलिए ज्यादा महत्वपर्ण हो गयी है क्योंकि बिहार के अधिकांश सीमावर्ती इलाकों में इस ऐप के जरिए फर्जी आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेज बनाने का खुलासा हुआ है। इधर, झारखंड में भी लागतार घुसपैठ को लेकर विपक्ष हमलावर बना हुआ है ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या झारखंड में भी इस चाईनीज ऐप के जरिए फर्जी दस्तावेज बनाकर घुसपैठ किए गए हैं। झारखंड में घुसपैठ के मामलों को लेकर सबसे ज्यादा प्रभावित संथाल का साहेबगंज, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ समेत अन्य जिले हैं। बिहार पुलिस जल्द ही इस मामले पर झारखंड पुलिस के साथ सम्पर्क कर बड़ा अभियान चला सकती है । चुनाव आयोग ने महज दो दिनों पहले जमशेदपुर से तीन अफगानी नागरिकों के नामों का खुलासा किया है कि उन्होंने फर्जी तरीके से वोटर लिस्ट में नाम चढ़ाया था। लेकिन, उनके पास वो कौन से दस्तावेज थे जिनका इस्तेमाल कर उन्होंने वोटर लिस्ट मे नाम चढ़वाया इसका खुलासा नहीं किया गया।
क्या है मामला
बिहार पुलिस की साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई ने राज्यभर में फर्जी पहचान पत्र व दस्तावेज बनाए जाने के 815 मामले चिह्नित करते हुए 416 मामलों का सत्यापन कराया है। इसके आधार पर 23 जिलों में 44 मामले दर्ज हुए हैं और 71 अभियुक्तों की गिरफ्तारी हुई है। गृह मंत्रालय को आशंका है कि फर्जी आधार का इस्तेमाल घुसपैठियों को स्थापित कराने के लिए किया जा रहा है। सबसे अधिक मामले सारण, सहरसा, सुपौल, नालंदा, मधुबनी, सीतामढ़ी, गया जी और मुजफ्फरपुर में मिले हैं। जांच में सामने आया कि फर्जी दस्तावेज पीएसप्रिंट.xyz, बाबा आरटीपीएस.xyz और राजमिस्त्री.शॉप जैसी वेबसाइटों से तैयार किए जा रहे थे।
झारखंड में क्या स्थिति है? UIDAI निदेशक ने दी अहम सलाह
बिहार में मामला सामने आने के बाद यह सवाल उठना लाजिमी था कि क्या झारखंड में भी फर्जी आधार से जुड़े मामले हैं। इस सच की पुष्टि के लिए झारखंड डिजिटल की टीम ने UIDAI के निदेशक नीरज कुमार से बातचीत की। निदेशक नीरज कुमार ने बताया कि जिस तरह का मामला बिहार में सामने आया है वह चिंतित करने वाला है। ऐप के जरिए किसी भी राज्य या जिले में बैठकर इस तरह के दस्तावेज बनाए जा सकते हैं लेकिन यह तय है कि सरकार की नई तकनीक के आगे यह खेल ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकेगा। उन्होंने झारखंड के लोगों से अपील की है कि अधिकृत सेंटर पर जाकर ही आधार कार्ड बनवाएं या सत्यापित करवाएं। उन्होंने भुवन पोर्टल पर चेक करने और आधार ऐप डाउनलोड कर बायोमेट्रिक्स लॉक रखने की सलाह दी, जिससे किसी भी तरह के दुरुपयोग से बचा जा सके।
झारखंड में 2000 से अधिक अधिकृत सेंटर सक्रिय
जानकारी के अनुसार, झारखंड में फिलहाल 2000 से अधिक आधार सेंटर संचालित हैं । इनमें UIDAI के अंतर्गत झारखंड सरकार का स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज, महिला एवं बाल विकास, स्कूली शिक्षा और आईटी डिपार्टमेंट रजिस्टर्ड है। इसके अलावा भारत सरकार द्वारा बीएसएनएल, डाक विभाग, केन्द्रीयकृत बैंक और विभिन्न सीएससी जैसे विभागों के अंतर्गत काम कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि राज्य में आधार सत्यापन के लिए पर्याप्त अधिकृत ढांचा मौजूद है, बशर्ते लोग सतर्क रहें और असत्यापित या अनजान वेबसाइटों-दुकानों से दूरी बनाएं।
बिहार की घटना से सीख लेते हुए झारखंड के नागरिकों को भी सलाह दी गई है कि वे अपने आधार, पैन या अन्य दस्तावेजों की प्रतियां किसी अनजान व्यक्ति या अविश्वसनीय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को न दें, और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।
वर्जन
संबंधित गिरोह के नेटवर्क और लिंक का विश्लेषण किया जा रहा है। फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल सिम कार्ड लेने, म्यूल बैंक खाता खोलने और केवाईसी प्रक्रिया के दुरुपयोग की भी आशंका है।
आईजी रंजीत मिश्रा
साइबर क्राइम एंड सिक्युरिटी यूनिट
बिहार पुलिस
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