Tuesday, September 15

UPI से भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए केंद्र सरकार ने 14 सितंबर 2026 को नया निर्देश जारी किया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी गजट नोटिफिकेशन के मुताबिक ₹2,000 तक के UPI मर्चेंट पेमेंट पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर ग्राहक अथवा दुकानदार से किसी भी तरह का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं ले सकेंगे। वहीं ₹2,000 तक RuPay डेबिट कार्ड से किए जाने वाले भुगतान पर भी अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) किए जाने वाले UPI ट्रांजेक्शन पर भी शुल्क लागू नहीं होगा।

सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य छोटे कारोबारियों और आम लोगों को कम राशि वाले डिजिटल भुगतान के लिए शुल्क से राहत देना और मुफ्त डिजिटल लेन-देन को कानूनी संरक्षण देना है। हालांकि, ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट पेमेंट पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू किए जाने की संभावना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। MDR की दर और नियम तय करने की जिम्मेदारी NPCI की स्टीयरिंग कमेटी पर होगी। अनुमान के मुताबिक यह दर करीब 0.25 से 0.4 प्रतिशत के बीच हो सकती है।

किन पेमेंट्स पर कितना लगेगा MDR? समझिए पूरा गणित

सरकार के नए फ्रेमवर्क में हर तरह के पेमेंट के लिए अलग-अलग सीमाएं तय की गई हैं, ताकि कारोबार पर अचानक ज्यादा बोझ न पड़े.

सामान्य मर्चेंट पेमेंट: अगर आप किसी बड़े स्टोर या मर्चेंट को 2,000 रुपये से ज्यादा का पेमेंट करते हैं, तो वहां 0.4% MDR लागू होगा.

अधिकतम कैप की सीमा: 75,000 रुपये या उससे अधिक के बड़े ट्रांजैक्शन पर इस चार्ज को अधिकतम 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन पर सीमित (Capped) कर दिया गया है.

जरूरी सेवाओं में फ्लैट चार्ज: रेलवे टिकट बुकिंग, टेलीकॉम बिल, बीमा प्रीमियम, पेट्रोल-डीजल और खेती से जुड़े सामान (Agriculture Inputs) के लिए 2,000 रुपये से ऊपर के पेमेंट पर सिर्फ 5 रुपये का फ्लैट चार्ज लगेगा.

शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड: स्टॉक ब्रोकर्स, सिक्योरिटीज और म्यूचुअल फंड में निवेश से जुड़े यूपीआई पेमेंट पर केवल 0.02% MDR लगेगा, जो अधिकतम 300 रुपये तक ही हो सकता है.

आप पर क्या होगा असर?

आम उपभोक्ताओं के नजरिए से देखें तो यह फैसला पूरी तरह राहत देने वाला है. अगर आप अपने दोस्त, रिश्तेदार या दूध-सब्जी वाले को रोजमर्रा में यूपीआई से पैसे भेजते हैं, तो आपको एक भी पैसा अतिरिक्त नहीं देना होगा.

कोई मंथली कोटा नहीं: आम लोगों के लिए फ्री ट्रांजैक्शन पर कोई महीने की सीमा या वॉल्यूम लिमिट तय नहीं की गई है. आप जितनी बार चाहें, बिना किसी रुकावट पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं.

केवल 4% मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर असर: आंकड़ों के मुताबिक, देश में होने वाले कुल मर्चेंट ट्रांजैक्शन में से लगभग 96% ट्रांजैक्शन 2,000 रुपये से कम के होते हैं. इसका मतलब यह हुआ कि 100 में से सिर्फ 4 बड़े ट्रांजैक्शन ही इस दायरे में आएंगे.

ग्राहकों पर चार्ज डालने की सख्त मनाही: बैंकों को साफ हिदायत दी गई है कि दुकानदार या मर्चेंट इस चार्ज की वसूली ग्राहकों से नहीं कर सकते. अगर कोई दुकानदार यूपीआई से पेमेंट लेने पर एक्स्ट्रा पैसे मांगता है, तो यह नियमों का सीधा उल्लंघन होगा.

छोटे व्यापारियों की सुरक्षा के लिए बना स्पेशल फंड

छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों के हितों का ध्यान रखते हुए नियमों में खास छूट दी गई है. जिन व्यापारियों का यूपीआई क्यूआर कोड (QR Code) के जरिए महीने का कुल कलेक्शन 1 लाख रुपये तक है, उनसे कोई MDR नहीं लिया जाएगा. वे पहले की तरह जीरो चार्ज पर डिजिटल पेमेंट स्वीकार करते रहेंगे.

इसके अलावा, सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है. बड़े ट्रांजैक्शन से जो भी MDR कलेक्ट होगा, उसका 5% हिस्सा एक खास फंड में जमा किया जाएगा. इस फंड का इस्तेमाल छोटे मर्चेंट्स को आधुनिक डिजिटल मशीनें देने, ट्रेनिंग मुहैया कराने और ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क का विस्तार करने के लिए किया जाएगा.

पेमेंट ऐप्स की मनमानी पर लगाम, हिडन चार्ज पर बैन

अक्सर देखा जाता है कि कुछ पेमेंट ऐप्स सुविधा शुल्क या प्लेटफॉर्म फीस के नाम पर अतिरिक्त पैसे काटने लगते हैं. नए दिशानिर्देशों में स्पष्ट कर दिया गया है कि कोई भी यूपीआई ऐप ग्राहकों से कोई प्लेटफॉर्म फीस या छिपा हुआ चार्ज नहीं वसूल सकता.

इससे पहले बैंकों और फिनटेक कंपनियों की यह राय थी कि जीरो एमडीआर की वजह से यूपीआई इन्फ्रास्ट्रक्चर चलाना आर्थिक रूप से कठिन हो रहा है. अब इस संतुलित व्यवस्था से पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को कमाई का एक हिस्सा मिलेगा, जिससे वे अपने सर्वर और सुरक्षा तकनीकों को और बेहतर बना सकेंगे.

कुणाल ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

इस पूरे मामले को लेकर JMM के Central Spokesperson कुणाल सारंगी ने फेसबुक पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि अब ₹2,000 से ज्यादा के UPI भुगतान पर चार्ज लगाने का रास्ता साफ हो गया है। उनके अनुसार पहले किसी भी UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगता था। लेकिन सरकार ने कल रात अधिसूचना जारी कर दी है कि ₹2000 तक UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। ₹2000 से ज़्यादा पेमेंट पर कितना चार्ज लगाना है इसका फ़ैसला National Payment Corporation of India को करना है। यह रेट 0.3 से 0.5% होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसका मतलब हुआ कि ₹5000 का सामान ख़रीदा तो ₹15 से ₹25 दुकानदार चुकाएगा। लेकिन आखिरकार देना तो ग्राहक को ही पड़ेगा। आज भी कई जगह क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने पर अतिरिक्त पैसा मांगा जाता है। अब वैसा ही UPI से भी होगा। दुकानकार अपनी पॉकेट से कहां से देगा? ज़ाहिर है या तो हम कैश देंगे या फिर जो अतिरिक्त पैसा लगेगा वो देना होगा।फिर डिजिटल क्रांति का क्या होगा? कोई नही परसों दिए जरूर जलाईए और जन्मदिन मनाईए क्योकि ….. है तो मुमकिन है।

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