Tuesday, September 15

गुमला: खेत और पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अब गुमला के किसान मशरूम उत्पादन की तकनीक सीख रहे हैं। खास बात यह है कि इस प्रशिक्षण में आदिम जनजाति कोरवा समुदाय के 60 किसान भी शामिल रहे। उद्यान विकास योजना के तहत जिला उद्यान कार्यालय की ओर से आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण में जिले के अलग-अलग प्रखंडों के कुल 173 किसानों ने मशरूम उत्पादन की बारीकियां सीखीं।

10 से 14 सितंबर तक चले इस प्रशिक्षण का आयोजन जारी प्रखंड के कुदर सकतार, कोमड़ो और चैनपुर के साथ-साथ रायडीह प्रखंड के पीबो और कोबजा में किया गया। कुदर सकतार में 46, कोमड़ो में 26, चैनपुर में 32, पीबो में 40 और कोबजा में 29 किसानों ने प्रशिक्षण लिया।

कुल 173 प्रशिक्षणार्थियों में जारी प्रखंड से आदिम जनजाति यानी कोरवा समुदाय के 60 किसान शामिल हुए, जबकि अनुसूचित जनजाति एवं अन्य वर्गों के 113 प्रशिक्षणार्थियों ने भी प्रशिक्षण में हिस्सा लिया।

सिर्फ जानकारी नहीं, किसानों ने सीखा मशरूम उगाने का तरीका

पांच दिनों के प्रशिक्षण में किसानों को मशरूम के बारे में सैद्धांतिक जानकारी देने के साथ-साथ इसकी प्रायोगिक विधि भी सिखाई गई। प्रशिक्षण के दौरान मशरूम क्या है, इसके अलग-अलग प्रकार, उत्पादन की जरूरत और इससे होने वाले लाभ के बारे में जानकारी दी गई।

इसके अलावा मशरूम उत्पादन की विभिन्न पद्धतियों, उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों, मशरूम की पौष्टिकता और इसके औषधीय गुणों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

प्रशिक्षार्थियों को प्रायोगिक तरीके से मशरूम उत्पादन का सफल प्रयोग भी कराया गया। प्रशिक्षण में समूह चर्चा और प्रस्तुतीकरण के जरिए किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की गई। कार्यक्रम को रोचक बनाने के लिए प्रार्थना, प्रेरणा गीत के साथ मशरूम जनित संगीत और नृत्य का भी आयोजन किया गया।

उत्पादन के साथ बाजार की जानकारी भी

प्रशिक्षण में किसानों को सिर्फ मशरूम उत्पादन तक सीमित जानकारी नहीं दी गई, बल्कि तैयार उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने और उससे जुड़े कारोबार की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

एपीपी एग्रीगेट के निदेशक प्रभाकर कुमार ने मशरूम के बाजारीकरण, मशरूम से बनने वाले उत्पादों के प्रसंस्करण और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी जानकारी किसानों के साथ साझा की।

प्रमाण पत्र के साथ मिला जरूरी सामान

प्रशिक्षण के समापन पर कटिंग में जिला उद्यान पदाधिकारी की ओर से किसानों को प्रमाण पत्र के साथ बैग, स्प्रे और अन्य सामग्री वितरित की गई। वहीं, अन्य प्रशिक्षण केंद्रों पर प्रखंड प्रमुख, प्रधान, मुखिया और वार्ड सदस्यों के माध्यम से किसानों के बीच सामग्री का वितरण कराया गया।

कार्यक्रम में कुदर की मुखिया चाहे मिंज, वार्ड सदस्य हीग्रमुनी देवी, कोबजा की प्रखंड प्रमुख ममता सो रेंग, मुखिया तारामीन सोरेंग, वार्ड सदस्य दुलारी केरकेट्टा, जमगई की वार्ड सदस्य सुक्रान्ती, प्रदान की कृति गुड़िया, नीतिन पाण्डेय, कातिंग के मुखिया मथुरा मिंज समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

प्रशिक्षण को सफल बनाने में डॉ. अनमोल कुमार, पूनम संगा, गजाला परवीन, अनोखा देवी, पिंकी देवी और नवीन कुमार पाण्डेय ने प्रशिक्षक के रूप में योगदान दिया।

मशरूम उत्पादन से जुड़े इस प्रशिक्षण के जरिए किसानों को कम स्तर पर उत्पादन शुरू करने, इसकी तकनीक समझने और तैयार उत्पाद के प्रसंस्करण व बाजार की संभावनाओं से जोड़ने की दिशा में पहल की गई है।

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Sanjana Kumari is a media professional, content writer, and voiceover artist with experience since 2023. She has expertise in digital media, social media, news writing, editing, and content management. Currently, she works as an Input In-Charge at Jharkhand Digital, handling news inputs and digital content. She is proficient in writing and articulating articles and voiceovers in both Hindi and English.

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