बोकारो डीसी अजय नाथ झा की पहल
आयुष मंत्रालय की सहमति मिलते के साथ काम होगा शुरु
PPP मोड से बदलेगी सेहत और पर्यटन की तस्वीर
झारखंड की औद्योगिक राजधानी के रूप में अपनी पहचान बना चुका बोकारो अब वैश्विक स्तर पर वेलनेस और प्राकृतिक चिकित्सा का एक बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। CM हेमंत सोरेन के सपने को साकार करने की दिशा में बोकारो डीसी अजय नाथ झा ने इस संबंध में आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करने की पहल शुरु कर दी है। बोकारों में केरल की तर्ज पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के ‘हेल्थ कॉटेज’ का निर्माण कराया जाएगा। इस दूरदर्शी परियोजना का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से देश-विदेश के लोगों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं और मानसिक शांति प्रदान करना है। आयुष मंत्रालय तकी सहमति के साथ ही जिला प्रशासन अपनी तैयारियां शुरु कर देगा। इस संबंध में 2 एकड़ भूमि चिन्हीत करने का कार्य किया जा रहा है और आवश्यक्तानुसार भूमि का क्षेत्रफल और भी बढ़ाया जा सकता है। पीपीपी (Public-Private Partnership) मोड पर संचालित होने वाले इस हेल्थ कॉटेज से न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति आएगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

केरल की तर्ज पर प्रामाणिक आयुर्वेद और पंचकर्म उपचार
दक्षिण भारत का राज्य केरल दुनिया भर में अपनी पारंपरिक आयुर्वेद, पंचकर्म और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों के लिए विख्यात है। बोकारो में बनने वाले इस हेल्थ कॉटेज में केरल के प्रसिद्ध वेलनेस सेंटरों की तर्ज पर ही इलाज और कायाकल्प (Rejuvenation) की सुविधाएं दी जाएंगी। यहाँ अनुभवी आयुर्वेदाचार्यों और पंचकर्म विशेषज्ञों की देखरेख में तनाव प्रबंधन, डिटॉक्सिफिकेशन, जीर्ण रोगों के इलाज और शारीरिक संतुलन के लिए विशेष थेरेपी प्रदान की जाएगी। प्राकृतिक औषधियों, जड़ी-बूटियों और पारंपरिक मालिश तकनीकों के उपयोग से देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और मरीजों को पूर्णतः प्राकृतिक वातावरण में स्वास्थ्य लाभ मिलेगा।

प्रकृति की गोद में आरोग्य: पहाड़ी क्षेत्रों में की जा रही है ज़मीन की तलाश
आयुर्वेदिक उपचार में शांत, स्वच्छ और प्राकृतिक वातावरण का बेहद महत्वपूर्ण स्थान होता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए ज़िला प्रशासन और संबंधित विभाग बोकारो के सुरम्य और शांत पहाड़ी इलाकों में उपयुक्त भूमि की तलाश कर रहे हैं। शहर के शोर-शराबे और प्रदूषण से दूर, हरियाली से घिरे पहाड़ी क्षेत्रों में इन हेल्थ कॉटेज का निर्माण किया जाएगा। पक्षियों की चहचहाहट, शुद्ध हवा और प्राकृतिक छटा के बीच बनने वाले ये कॉटेज मरीजों को न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ करेंगे, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य और आत्मिक शांति के लिए भी एक आदर्श केंद्र साबित होंगे। जानकारों की मानें तो रांची से बोकारो जाने वाले रास्ते पर पेटरवार इलाके के आसपास जमीन की खोज की जा रही है।
आयुष मंत्रालय के समन्वय से PPP मोड पर होगा संचालन
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए केंद्रीय आयुष मंत्रालय के साथ निरंतर समन्वय बनाया जा रहा है। आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों और मानकों के अनुरूप इस परियोजना को पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल पर विकसित और संचालित किया जाएगा। पीपीपी मोड के तहत निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता, आधुनिक प्रबंधन और पूंजी निवेश का लाभ मिलेगा, जबकि सरकारी तंत्र बुनियादी ढांचे और नीतिगत सहयोग की देखरेख करेगा। इस जुगलबंदी से परियोजना का संचालन वैश्विक मानकों के अनुसार पेशेवर तरीके से हो सकेगा।
देश-विदेश के पर्यटकों और मरीजों को मिलेगी अत्याधुनिक सुविधाएं
यह हेल्थ कॉटेज केवल स्थानीय या राज्य स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय मेडिकल टूरिज्म (Medical Tourism) के नक्शे पर स्थापित करने की योजना है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं: कॉटेज में आने वाले देश और दुनिया के मेहमानों के लिए विश्वस्तरीय आवास, सात्विक एवं जैविक (Organic) आहार, ध्यान (Meditation) केंद्र और योग शालाएं बनाई जाएंगी।
स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन और रोजगार को मिलेगा नया आयाम
बोकारो में हेल्थ कॉटेज के निर्माण से केवल स्वास्थ्य सेवाओं का ही विस्तार नहीं होगा, बल्कि इसके दूरगामी आर्थिक प्रभाव भी देखने को मिलेंगे…
मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा: विदेशी पर्यटकों और अप्रवासी भारतीयों (NRIs) को ध्यान में रखते हुए यहाँ बहुभाषी गाइड, कस्टमाइज्ड वेलनेस पैकेज और आसान बुकिंग की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
रोजगार के अवसर: स्थानीय युवाओं के लिए थेरेपिस्ट, योग ट्रेनर, हॉस्पिटैलिटी, सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
पर्यटन का विकास: स्टील सिटी के रूप में जाने जाने वाले बोकारो की छवि अब ‘वेलनेस हब’ के रूप में भी उभरेगी। इससे जिले में आने वाले पर्यटकों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि होगी।
स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा: आयुर्वेद और जड़ी-बूटियों की मांग बढ़ने से स्थानीय स्तर पर औषधीय पौधों की खेती और हस्तशिल्प उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।
स्वास्थ्य और पर्यटन के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर
बोकारो में अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस हेल्थ कॉटेज की स्थापना राज्य के स्वास्थ्य परिदृश्य में एक नए स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत है। उद्योग और प्रकृति के इस अनूठे संगम से बोकारो अब केवल लोहा और इस्पात बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के लोगों का जीवन और सेहत संवारने के लिए भी पहचाना जाएगा। आयुष मंत्रालय के सहयोग और पीपीपी मॉडल की ताकत से यह परियोजना जल्द ही आकार लेगी और झारखंड को वैश्विक मेडिकल टूरिज्म के नक्शे पर एक नई और मजबूत पहचान दिलाएगी।

वर्जन
बोकारो में केरल की तर्ज पर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के हेल्थ कॉटेज का निर्माण किया जाना है. इसके प्रयास शुरु कर दिए गए हैं. इस हेल्थ काटेज में तमाम अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ साथ आयुर्वेद पद्धति से इलाज किया जाएगा. संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाते हुए जिला प्रशासन इसपर तेजी से काम कर रहा है.
अजय नाथ झा
बोकारो डीसी



