रांची। स्कूलों में आपदा से निपटने की तैयारी, समय रहते चेतावनी, आपातकालीन निकासी, CPR/BLS प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल को लेकर झारखंड की सोशल एक्टिविस्ट ज्योति शर्मा की मांग पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने जवाब दिया है। NDMA ने उनकी ओर से भेजे गए सुझावों को नोट करते हुए बताया है कि इस मामले को विचार और उचित कार्रवाई के लिए शिक्षा मंत्रालय को भी भेजा गया है।

NDMA की ओर से 25 सितंबर 2026 को जारी पत्र में ज्योति शर्मा के 31 अगस्त 2026 के ईमेल का संदर्भ दिया गया है। इसमें उन्होंने देशभर के स्कूलों के लिए National Minimum Disaster Safety and Emergency Response Framework तैयार करने और लागू करने की मांग उठाई थी।
स्कूलों के लिए राष्ट्रीय न्यूनतम सुरक्षा ढांचे की मांग
ज्योति शर्मा ने अपनी मांग में स्कूलों में आपदा और आपात स्थिति से निपटने के लिए एक समान राष्ट्रीय व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया था। इसमें डिजास्टर प्रिपेयर्डनेस, अर्ली वार्निंग सिस्टम, इमरजेंसी इवैक्यूएशन, CPR/BLS ट्रेनिंग और नियमित मॉक ड्रिल जैसी व्यवस्थाओं को शामिल करने की मांग की गई थी।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी आपदा या मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में स्कूल प्रबंधन, शिक्षक और छात्र शुरुआती स्तर पर सुरक्षित प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार रहें।
NDMA ने कहा- सुझावों को किया गया नोट
NDMA के अंडर सेक्रेटरी एसके शर्मा की ओर से जारी जवाब में कहा गया है कि प्राधिकरण ने ज्योति शर्मा के प्रतिनिधित्व में उठाए गए सुझावों की सराहना की है और इन मुद्दों को दर्ज किया गया है।
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उनका ईमेल शिक्षा मंत्रालय को विचार एवं उचित कार्रवाई के लिए भेजा गया है।
अब शिक्षा मंत्रालय के स्तर पर होगी आगे की कार्रवाई
NDMA के इस जवाब के बाद स्कूलों में आपदा सुरक्षा और इमरजेंसी रिस्पॉन्स को लेकर उठाई गई मांग अब शिक्षा मंत्रालय के संज्ञान में भी पहुंच गई है। हालांकि, NDMA के पत्र में किसी नई राष्ट्रीय नीति, नियम या समयसीमा की घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल प्राधिकरण ने सुझावों को संबंधित मंत्रालय तक पहुंचाने की जानकारी दी है।
ज्योति शर्मा की मांग में खास तौर पर स्कूलों में आपदा के समय सुरक्षित निकासी, शुरुआती चिकित्सा सहायता और आपातकालीन प्रतिक्रिया की ट्रेनिंग को संस्थागत रूप देने पर जोर दिया गया है। अब इस प्रस्ताव पर शिक्षा मंत्रालय की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, यह आगे देखने वाली बात होगी।
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