Friday, October 2

रांची पुलिस की तकनीकी विफलता और जांच की धीमी रफ्तार पर उठे सवाल

6 महीने पहले पंडरा ओपी क्षेत्र से चोरी हुई थी बाइक (JH01CZ4733)

ट्रैफिक कैमरों में कैद होने के बावजूद पुलिस की पकड़ से बाहर चोर

राजधानी रांची में स्मार्ट सिटी के हाई-टेक कैमरे, इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) और आधुनिक पुलिसिंग के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलता हुआ एक अजीबोगरीब और गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक पीड़ित की मोटरसाइकिल चोरी हुए महीनों बीत चुके हैं, पुलिस थाने में बकायदा एफआईआर (FIR) दर्ज है, लेकिन पुलिस चोर तक पहुंचने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। हैरत और विडंबना की बात यह है कि चोर आराम से शहर की सड़कों पर चोरी की बाइक दौड़ा रहा है और ट्रैफिक पुलिस का ऑटोमैटिक चालान सिस्टम लगातार असली बाइक मालिक के नाम पर बिना हेलमेट के जुर्माना (ई-चालान) भेज रहा है।
​यह मामला रांची पुलिस के विभिन्न विभागों के बीच आपसी तालमेल (Coordination) की भारी कमी और जांच प्रक्रिया की सुस्त रफ्तार को उजागर करता है।

​क्या है पूरा मामला? बिजली विभाग के कर्मचारी की बाइक हुई थी चोरी
पंडरा थाना में दर्ज आवेदन के अनुसार, पीड़ित बालेश्वर कुमार महतो (पिता- धर्मनाथ महतो, निवासी- ग्राम अनातु, बेतंगी, पोस्ट- चैनगड़ा, थाना- बुड़मू, जिला- रांची) बिजली विभाग में पावर हाउस के तौर पर कार्यरत हैं। ​दिनांक 17 अप्रैल 2026 की सुबह लगभग 01:30 बजे, बालेश्वर अपने एक साथी सरोज के साथ आईटीआई (ITI) पंडरा स्थिति पावर हाउस में शिकायत मिलने पर अपनी मोटरसाइकिल संख्या JH01CZ4733 से गए थे। उन्होंने गाड़ी पावर हाउस के बाहर मेन गेट के पास खड़ी की और अंदर काम करने चले गए। जब वे काम खत्म करके बाहर निकले, तो उनकी बाइक गायब थी। काफी खोजबीन के बाद भी जब गाड़ी का कोई पता नहीं चला, तो उन्होंने तुरंत पंडरा ओपी (Sukhdeonagar/Pandra OP) में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
​पंडरा थाने द्वारा केस संख्या 149/2026 (दिनांक 24/04/2026, धारा 305(a) BNS) दर्ज करते हुए मामले की जांच का जिम्मा एएसआई (ASI) छोटन उरांव को सौंपा गया था।

​पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही, चोर सड़कों पर बेखौफ घूमता रहा
​प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद पीड़ित बालेश्वर कुमार महतो को उम्मीद थी कि पुलिस उनकी मेहनत की कमाई से खरीदी गई बाइक जल्द ढूंढ निकालेगी। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी पंडरा पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई या सफलता हासिल नहीं हुई।
​इसी बीच, जून और अगस्त महीने में पीड़ित के मोबाइल पर एक के बाद एक ई-चालान (e-Challan) के मैसेज आने शुरू हुए, जिसने पुलिस प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दीं।
​चालान विवरण के अनुसार, चोरी की गई बाइक (JH01CZ4733) पर बिना हेलमेट (‘Penalty For Not Wearing Protective Headgear’) गाड़ी चलाने के कारण 1,000-1,000 रुपये के कई चालान कटे:
​पहला चालान (#JH4157169260609164833): दिनांक 09/06/2026 को ₹1,000।
​दूसरा चालान (#JH4157169260804073139): दिनांक 03/08/2026 को ₹1,000।
​तीसरा चालान (#JH4157169260818124895): दिनांक 17/08/2026 को ₹1,000।

​ट्रैफिक पुलिस अधीक्षक से गुहार: “साहब! गाड़ी ट्रैक करें और चोर को पकड़ें”
​जब पुलिस केस दर्ज करने के बावजूद बाइक खोजने में नाकाम रही और पीड़ित के नाम पर लगातार ट्रैफिक जुर्माना बढ़ता गया, तो मजबूर होकर बालेश्वर महतो ने 11 जून 2026 को पुलिस अधीक्षक (यातायात), रांची के समक्ष लिखित आवेदन देकर मदद की गुहार लगाई। अपने आवेदन में उन्होंने स्पष्ट लिखा कि “मेरी गाड़ी चोरी होने के बावजूद गाड़ी का चालान कट रहा है। अतः श्रीमान से नम्र निवेदन है कि मेरी गाड़ी को ट्रैक करके उसे खोजने की कृपा करें।”

​सिस्टम का सबसे बड़ा सच: विभागों के बीच तालमेल का घोर अभाव
​यह मामला रांची पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है:
​सॉफ्टवेयर/डाटाबेस में अपडेट की कमी: जब किसी वाहन की चोरी की प्राथमिकी (FIR) दर्ज होती है, तो वाहन पोर्टल और ट्रैफिक चालान सिस्टम में उस वाहन नंबर को ‘स्टोलन’ (Stolen/Chori) की श्रेणी में तुरंत ब्लैकलिस्ट या फ्लैग किया जाना चाहिए। लेकिन रांची में एफआईआर दर्ज होने के 4 महीने बाद भी वाहन चालान सिस्टम में नॉर्मल एक्टिव दिख रहा है।

​सीसीटीवी कैमरों की मॉनिटरिंग पर सवाल: जब ट्रैफिक विभाग के कैमरे बाइक की तस्वीर खींचकर चालान काट रहे हैं, तो स्मार्ट सिटी के कंट्रोल रूम से संबंधित लोकेशन को तुरंत ट्रैक करके नजदीकी पीसीआर (PCR) या पुलिस गश्ती दल को अलर्ट क्यों नहीं भेजा गया?

​पीड़ित पर दोहरी मार: एक तरफ नागरिक की गाढ़ी कमाई की बाइक चोरी हो गई, वहीं दूसरी तरफ पुलिसिया लापरवाही की वजह से उस पर हजारों रुपये का जुर्माना थोंपा जा रहा है।

​यदि ट्रैफिक कैमरों की मदद से चोरी हुई गाड़ियों के लोकेशन और चालान की समय सीमा को पुलिस अपनी जांच से जोड़ ले, तो बाइक चोर गिरोह का पर्दाफाश करना बेहद आसान हो सकता है। लेकिन देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद रांची पुलिस नींद से जागती है या पीड़ित बालेश्वर महतो इसी तरह थानों और दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर रहेंगे

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