Tuesday, October 13

रांची: झारखंड में सरकारी नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को लेकर चल रहे विवाद के बीच असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर यानी APP परीक्षा को लेकर भी हाईकोर्ट से अभ्यर्थियों को तत्काल राहत नहीं मिली है। झारखंड हाईकोर्ट ने APP रेगुलर परीक्षा की नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने के सरकारी फैसले पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने मामले में सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC से जवाब मांगा है। यानी यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है और अंतिम फैसला आना बाकी है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर कई प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला लिया है। इसी क्रम में JPSC की Assistant Public Prosecutor यानी APP Regular परीक्षा और APP Backlog परीक्षा की नियुक्ति प्रक्रिया भी प्रभावित हुई।

सरकार के इस फैसले के खिलाफ अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। APP Regular परीक्षा से संबंधित याचिका में नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने के फैसले को चुनौती देते हुए सरकारी आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

पहले इस मामले में जल्द सुनवाई की मांग की गई थी। कोर्ट ने मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। अब हुई सुनवाई में अदालत ने रद्दीकरण पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया है। साथ ही सरकार और JPSC से जवाब मांगा गया है। APP Regular से जुड़ी एक याचिका की अगली सुनवाई 24 सितंबर को निर्धारित की गई है।

APP परीक्षा आखिर है क्या?

APP का पूरा नाम Assistant Public Prosecutor यानी सहायक लोक अभियोजक है।

यह राज्य सरकार की ओर से आपराधिक मामलों में अदालत के सामने पैरवी करने वाला महत्वपूर्ण कानूनी पद है। आसान भाषा में समझें तो APP सरकारी पक्ष का वकील होता है, जो खास तौर पर मजिस्ट्रेट कोर्ट में राज्य की ओर से आपराधिक मामलों की पैरवी करता है।

भारत में वर्तमान आपराधिक प्रक्रिया कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 19 में Assistant Public Prosecutor की व्यवस्था की गई है। इसके तहत राज्य सरकार प्रत्येक जिले में एक या उससे अधिक APP नियुक्त करती है, जो मजिस्ट्रेट की अदालतों में अभियोजन चलाते हैं। यह प्रावधान 1 जुलाई 2024 से लागू है।

झारखंड की अपनी लिटिगेशन पॉलिसी में भी जिला स्तर पर आपराधिक मामलों की पैरवी करने वालों में Public Prosecutor, Additional Public Prosecutor और Assistant Public Prosecutor का उल्लेख किया गया है।

APP का काम क्या होता है?

APP का मुख्य काम राज्य सरकार की ओर से आपराधिक मामलों में अभियोजन पक्ष रखना होता है। यानी पुलिस द्वारा दर्ज किए गए आपराधिक मामलों में जब मामला अदालत तक पहुंचता है, तो APP सरकारी पक्ष की ओर से कोर्ट में अपना पक्ष रखता है।

इसके प्रमुख कामों में शामिल हैं—

  • अदालत में राज्य सरकार की ओर से आपराधिक मामलों की पैरवी करना।
  • अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और दस्तावेजों को अदालत के सामने रखना।
  • गवाहों की जांच और जिरह की प्रक्रिया में सरकारी पक्ष का प्रतिनिधित्व करना।
  • आरोपी के खिलाफ अभियोजन पक्ष का कानूनी पक्ष रखना।
  • जमानत, रिमांड, आरोप तय करने और ट्रायल से जुड़े मामलों में सरकारी पक्ष रखना।
  • आपराधिक मुकदमों में कानून और तथ्यों के आधार पर अदालत की सहायता करना।

झारखंड हाईकोर्ट के पुराने फैसलों में भी APP की भूमिका को ट्रायल कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से मामलों की पैरवी करने से जोड़ा गया है।

JPSC ने कितने पदों के लिए निकाली थी भर्ती?

JPSC ने वर्ष 2025 में Assistant Public Prosecutor (Regular) के लिए विज्ञापन संख्या 06/2025 जारी किया था। JPSC की वेबसाइट पर APP Regular और APP Backlog दोनों भर्तियों के रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।

इस भर्ती को लेकर विभिन्न रिपोर्टों में पदों की संख्या को लेकर अंतर दिखाई देता है। शुरुआती भर्ती रिपोर्टों में 134 नियमित पद बताए गए थे, जबकि कुछ भर्ती पोर्टल/रिपोर्टों में कुल संख्या 160 बताई गई है। इसलिए खबर में 134 Regular पद का आंकड़ा इस्तेमाल करना अधिक सुरक्षित है, क्योंकि आवेदन संबंधी रिपोर्टों में JPSC APP Regular के 134 पद स्पष्ट रूप से दर्ज हैं।

विज्ञापन के अनुसार आवेदन प्रक्रिया 2025 में शुरू हुई थी और उम्मीदवारों के लिए कानून में स्नातक यानी LLB जैसी योग्यता निर्धारित थी।

APP Backlog परीक्षा भी विवाद में

सिर्फ Regular APP ही नहीं, बल्कि APP Backlog परीक्षा, विज्ञापन संख्या 05/2025, की नियुक्ति प्रक्रिया भी सरकारी फैसले से प्रभावित हुई है।

JPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर APP Backlog और APP Regular दोनों भर्ती प्रक्रियाओं के अलग-अलग विज्ञापन उपलब्ध हैं।

APP Regular से जुड़े मामले में अभ्यर्थियों की ओर से अदालत से सरकारी आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने फिलहाल अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है।

पहले कुछ परीक्षाओं पर हाईकोर्ट लगा चुका है रोक

APP मामले की तस्वीर को समझने के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि इसी भर्ती विवाद में हाईकोर्ट ने कुछ दूसरी परीक्षाओं/नियुक्तियों को लेकर सरकार के फैसले पर अंतरिम राहत दी है।

20 अगस्त को हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा और उनसे हुई नियुक्तियों को रद्द करने के सरकारी फैसले पर रोक लगाई थी। अदालत ने प्रथम दृष्टया कहा था कि नियमित नियुक्ति को बिना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए समाप्त नहीं किया जा सकता।

इसके बाद CGL और CDPO जैसी नियुक्तियों से जुड़े मामलों में भी अदालत का हस्तक्षेप सामने आया।

लेकिन APP मामले में अभी वही राहत नहीं मिली है। इसलिए APP अभ्यर्थियों के लिए फिलहाल स्थिति सरकार के रद्दीकरण आदेश के पक्ष में बनी हुई है, जब तक अदालत आगे कोई अलग अंतरिम या अंतिम आदेश नहीं देती।

सरकार ने क्यों रद्द कीं इतनी परीक्षाएं?

झारखंड में पिछले कुछ समय से JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों के बीच लगातार विरोध और अनियमितताओं के आरोप उठते रहे हैं।

राज्य सरकार ने भर्ती व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों को लेकर कई परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं की समीक्षा/जांच का फैसला लिया। इसी व्यापक कार्रवाई के तहत कई परीक्षाओं को रद्द करने, कुछ की प्रक्रिया रोकने और कुछ को जांच के दायरे में रखने की बात सामने आई।

इसी फैसले की जद में APP और अन्य महत्वपूर्ण कानूनी भर्ती परीक्षाएं भी आईं।

अब APP अभ्यर्थियों के सामने क्या स्थिति है?

फिलहाल स्थिति को तीन बिंदुओं में समझा जा सकता है—

पहला: राज्य सरकार के आदेश से APP नियुक्ति प्रक्रिया रद्द/प्रभावित है।

दूसरा: अभ्यर्थियों ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

तीसरा: हाईकोर्ट ने अभी रद्दीकरण आदेश पर रोक लगाने से इनकार किया है, लेकिन मामले की सुनवाई जारी रहेगी और सरकार/JPSC को अपना पक्ष रखना होगा। APP Regular से जुड़ी याचिका की अगली सुनवाई 24 सितंबर को निर्धारित है।

इसका मतलब यह है कि APP परीक्षा का विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। हाईकोर्ट का मौजूदा आदेश अंतिम फैसला नहीं है। आगे की सुनवाई में अदालत सरकार के फैसले की वैधता और अभ्यर्थियों की दलीलों पर विस्तार से विचार कर सकती है।

क्यों अहम है यह फैसला?

APP परीक्षा का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सिर्फ एक भर्ती परीक्षा का विवाद नहीं है। इसका सीधा असर उन कानून स्नातकों और अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है जिन्होंने सरकारी अभियोजन सेवा में नियुक्ति के लिए आवेदन किया था।

एक तरफ सरकार भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच को जरूरी बता रही है, तो दूसरी तरफ अभ्यर्थियों का सवाल है कि यदि पूरी परीक्षा या नियुक्ति प्रक्रिया में सभी उम्मीदवारों को दोषी नहीं माना जा सकता, तो बिना व्यक्तिगत स्तर पर सुनवाई के पूरी प्रक्रिया को रद्द करना कितना उचित है।

अब इस पूरे विवाद में हाईकोर्ट की आगे की सुनवाई बेहद अहम होगी।

फिलहाल APP अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने रद्दीकरण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है और सरकार/JPSC से जवाब मांगा है। अंतिम तस्वीर आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही साफ होगी।

Share.
Next Story
E10 पेट्रोल फिर से पंपों पर? जानें सरकार का नया प्लान
Exit mobile version