Friday, November 6

रांची। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में शामिल अभ्यर्थियों ने परीक्षा से जुड़ी विसंगतियों के आधार पर 20 से 25 फीसदी तक ग्रेस मार्क्स देने की मांग उठाई है। शुक्रवार को ऑल स्टेट बीएड-डीएलएड स्टूडेंट्स एसोसिएशन, झारखंड के अध्यक्ष काजल मंडल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर परीक्षा के दौरान हुई परेशानियों और अभ्यर्थियों की स्थिति पर अपनी बात रखी। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री सचिवालय सहित संबंधित विभागों और अधिकारियों को ज्ञापन देकर इस मामले में राहत देने की अपील की है।

काजल मंडल ने कहा कि झारखंड में वर्ष 2016 के बाद सीधे 2026 में JTET आयोजित हुई है। दस साल के लंबे अंतराल के कारण कई अभ्यर्थियों के लिए यह परीक्षा बेहद अहम थी। इस दौरान बड़ी संख्या में बीएड और डीएलएड उत्तीर्ण अभ्यर्थी पात्रता परीक्षा में शामिल होने के अवसर से वंचित रहे। वर्ष 2023 में सहायक आचार्य के 26,001 पदों पर हुई नियुक्ति प्रक्रिया में भी JTET आयोजित नहीं होने के कारण कई अभ्यर्थियों को मौका नहीं मिल सका। लंबे इंतजार के बीच कई अभ्यर्थियों की उम्र भी बढ़ गई, जिससे मौजूदा परीक्षा उनके लिए अंतिम अवसर जैसी थी।

प्रश्नों की त्रुटि और ओएमआर में क्रमांक की गड़बड़ी का आरोप

एसोसिएशन ने परीक्षा की तैयारी और संचालन से जुड़ी कई समस्याएं उठाई हैं। काजल मंडल के अनुसार, परीक्षा से पहले आधिकारिक मॉडल प्रश्नपत्र जारी नहीं किए गए थे। इससे अभ्यर्थियों को प्रश्नों के पैटर्न का स्पष्ट अंदाजा नहीं मिल पाया। वहीं, अलग-अलग विषयों के कुछ प्रश्नों में त्रुटियों की शिकायत भी सामने आई।

इसके अलावा प्रश्नपत्र के कुछ सेट में प्रश्नों के क्रमांक में गड़बड़ी होने से ओएमआर शीट भरने के दौरान अभ्यर्थियों को परेशानी हुई। एसोसिएशन का कहना है कि समय सीमित होने के कारण कई अभ्यर्थियों से उत्तर भरने में गलतियां हुईं। ऐसे में परीक्षा की इन विसंगतियों को ध्यान में रखकर अभ्यर्थियों को अतिरिक्त अंकों का लाभ दिया जाना चाहिए।

महिला अभ्यर्थियों और पारा शिक्षकों की परेशानी का भी जिक्र

काजल मंडल ने कहा कि दूसरे राज्यों में शिक्षक पात्रता परीक्षाओं के दौरान ग्रेस मार्क्स दिए जाने के उदाहरण मौजूद हैं। झारखंड में भी परीक्षा की परिस्थितियों और अभ्यर्थियों की समस्याओं को देखते हुए ऐसा निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने महिला अभ्यर्थियों और पारा शिक्षकों की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि पारिवारिक जिम्मेदारियों और अन्य सरकारी कार्यों में व्यस्तता के कारण कई अभ्यर्थियों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया।

एसोसिएशन की मांग है कि सरकार परीक्षा से जुड़ी सभी शिकायतों और परिस्थितियों की समीक्षा करे और अभ्यर्थियों को 20 से 25 फीसदी तक ग्रेस मार्क्स देने पर विचार करे। संगठन का कहना है कि इससे कुछ अंकों से पीछे रह गए अभ्यर्थियों को भी शिक्षक नियुक्ति की प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिल सकता है।

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