रांची। आदिवासी अधिकारों और सरना धर्म से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहने वाली आदिवासी नेत्री निशा भगत की मौत हो गई है। मिली जानकारी के अनुसार, उन्होंने आत्महत्या की है। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। उनका शव पोस्टमार्टम के लिए रिम्स लाया गया है।
बताया जा रहा है कि मौत से पहले निशा भगत लाइव आई थीं और इस दौरान उन्होंने अपना दर्द बयां किया था।
निशा भगत रांची के पिठोरिया थाना क्षेत्र के दाहूटोली गांव की रहने वाली थीं। वह केंद्रीय सरना समिति की उपाध्यक्ष के रूप में भी काम कर चुकी थीं। आदिवासी अस्मिता, सरना धर्म कोड और धर्मांतरण जैसे मुद्दों को लेकर कई आंदोलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही थी।
दिसंबर 2025 में सरना धर्म कोड और डिलिस्टिंग की मांग को लेकर राजभवन के सामने हुए प्रदर्शन में बाल मुंडवाकर विरोध जताने के बाद वह चर्चा में आई थीं। उन्होंने 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में गुमला सीट से झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के टिकट पर चुनाव भी लड़ा था।
फिलहाल घटना के कारणों को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
