Tuesday, September 22

राजधानी रांची में करम पर्व की धूम के बीच रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय के अखड़ा में भव्य करम महोत्सव का आयोजन किया गया। इस खास मौके पर कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं और इस पर्व के सांस्कृतिक महत्व पर अपने विचार साझा किए।

करम केवल पर्व नहीं, जीवन-दर्शन का प्रतीक

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि करम पर्व सिर्फ एक धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव भर नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, परंपरा, संस्कृति और सामुदायिक जीवन-दर्शन से जुड़ने का एक अनमोल अवसर है। उनका कहना था कि यह पर्व आदिवासी समाज की गहरी सोच और उसके जीवन जीने के तरीके को समझने का माध्यम बनता है।

आदिवासी समाज का पारंपरिक ज्ञान आज भी प्रासंगिक

कृषि मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आदिवासी समाज का पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन-पद्धति आज के आधुनिक दौर में भी पूरी तरह प्रासंगिक बनी हुई है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आदिवासी समाज को केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थी के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे उसके ज्ञान, अनुभव और जीवन के प्रति दृष्टिकोण के साथ समझने और सम्मान देने की जरूरत है।

भाषा, लोकगीत और अखड़ा संस्कृति के संरक्षण पर जोर

मंत्री ने आदिवासी भाषाओं, लोकगीतों, लोकनृत्यों, पारंपरिक ज्ञान और अखड़ा जैसी सामुदायिक संस्थाओं के संरक्षण को बेहद जरूरी बताया। उनका मानना था कि ये सभी तत्व आदिवासी पहचान की रीढ़ हैं और इनके बिना समाज की सांस्कृतिक जड़ें कमजोर पड़ सकती हैं।

नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ने की प्रेरणा

कार्यक्रम के अंत में मंत्री ने कहा कि करम पर्व नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, भाषा, संस्कृति और सामुदायिक पहचान से जुड़ने की प्रेरणा देता है। उनका मानना था कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत के करीब आती है और उसे संरक्षित रखने के महत्व को समझती है।

इसे भी पढ़े: प्रकृति और परंपरा के रंग में रंगा झारखंड, करम पर्व पर मांदर की थाप और लोकगीतों में डूबे लोग

Share.
Next Story
मांदर की थाप और करम गीतों से गूंजा बोकारो थर्मल, पारंपरिक अंदाज में मनाया गया करम महोत्सव
Exit mobile version