Tuesday, October 13

खेलगांव का अल्बर्ट एक्का स्टेडियम और हरिवंश टाना भगत इंडोर स्टेडियम इन दिनों तालियों, जयकारों और खिलाड़ियों के जोश से गूंज रहे हैं। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद्, रांची द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय ‘खेलो झारखंड 2026–27’ के अंतर्गत खो-खो एवं कबड्डी प्रतियोगिता का आगाज़ हो चुका है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अधीन हो रही यह दो दिवसीय प्रतियोगिता 06 एवं 07 अक्टूबर को चलेगी।

राज्य के सभी 24 जिलों से अंडर-17 बालक एवं बालिका वर्ग के कुल 1,152 खिलाड़ी इसमें हिस्सा ले रहे हैं। मैदान पर उतरे इन किशोर खिलाड़ियों में अधिकांश ग्रामीण एवं सुदूर क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों से आए हैं।

मंच से मैदान तक: पांच वर्षों का प्रतिफल

‘खेलो झारखंड’ की निरंतरता का असर अब मैदान पर साफ़ दिखाई देने लगा है। आयोजन के पांचवें वर्ष में कबड्डी और खो-खो के मुकाबलों में खिलाड़ियों की तकनीक, फिटनेस, अनुशासन, रणनीति और खेल भावना किसी प्रोफेशनल खिलाड़ी से कम नहीं दिख रही। रेडिंग की फुर्ती, डिफेंस की सूझबूझ और खो-खो में चेज़िंग की तेज़ी, हर पहलू में तैयारी की झलक मिल रही है।

यह प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि उचित मंच और अवसर मिलने पर ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाएं भी राज्य स्तर पर अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। जिन गांवों और कस्बों में कभी संसाधनों की कमी खेल के सपनों की राह में बाधा मानी जाती थी, वहीं के बच्चे आज खेलगांव के मैदान में अपना दमखम दिखा रहे हैं।

कबड्डी: पहले दिन के प्रथम चरण के नतीजे

बालक वर्ग: चतरा, पलामू, गिरिडीह, साहिबगंज, हजारीबाग, सरायकेला-खरसावां, पाकुड़, गुमला, देवघर, बोकारो एवं गढ़वा की टीमें विजेता रहीं।

बालिका वर्ग: साहिबगंज, हजारीबाग, रांची, धनबाद, रामगढ़, गोड्डा, देवघर, पाकुड़, दुमका, गढ़वा, बोकारो एवं सिमडेगा ने जीत दर्ज की।

खो-खो: प्रथम चरण के विजेता

बालक वर्ग: रामगढ़, धनबाद, चतरा, कोडरमा एवं हजारीबाग।

बालिका वर्ग: रामगढ़, जामताड़ा, गुमला, लातेहार एवं गढ़वा।

आगे की राह

समाचार लिखे जाने तक कबड्डी का प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबला जारी था। प्रतियोगिता के दूसरे दिन, यानी 07 अक्टूबर को आगे के चरणों के मैच खेले जाएंगे, जिनमें राज्य भर की निगाहें उन टीमों पर टिकी रहेंगी जो खिताब की दौड़ में आगे बढ़ रही हैं।

खेलगांव में चल रहा यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि झारखंड की उस नई खेल संस्कृति का संकेत है, जिसमें सरकारी स्कूलों की प्रतिभाएं अपने हुनर के बल पर राज्य के खेल मानचित्र पर अपनी जगह बना रही हैं।

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