खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन की तलाश में जुटी कोडरमा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने विशेष अभियान ‘विश्वास’ के तहत 177 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन मोबाइल की अनुमानित कीमत करीब 53 लाख रुपये बताई गई है। बरामद किए गए फोन उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिए गए।

पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर टेक्निकल सेल की टीम ने की। टीम ने मोबाइल ट्रैकिंग, तकनीकी जांच और उपलब्ध डेटा के विश्लेषण के आधार पर अलग-अलग स्थानों से मोबाइल फोन का पता लगाया।
121 मोबाइल दूसरे राज्यों से हुए थे गुम
पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, बरामद 177 मोबाइल में 121 फोन दूसरे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से गुम या चोरी हुए थे, जबकि 56 मोबाइल कोडरमा जिले से संबंधित थे। इससे पता चलता है कि मोबाइल बरामदगी के लिए पुलिस ने जिले की सीमा से बाहर तक तकनीकी स्तर पर जांच की।
बरामद मोबाइल में सबसे ज्यादा फोन महाराष्ट्र और दिल्ली से संबंधित पाए गए। महाराष्ट्र से 35 और दिल्ली से 31 मोबाइल बरामद हुए। इसके अलावा पश्चिम बंगाल और तेलंगाना से 13-13, कर्नाटक से 8 और केरल से 5 मोबाइल मिले।
कई राज्यों तक पहुंची मोबाइल की जांच
पुलिस के अनुसार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से 3-3, हरियाणा, तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ से 2-2 मोबाइल बरामद किए गए। वहीं राजस्थान, आंध्र प्रदेश, गोवा और दादरा एवं नगर हवेली से भी एक-एक मोबाइल बरामद हुआ।
तकनीकी जांच के जरिए मोबाइल फोन की लोकेशन और इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी जुटाई गई, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें बरामद कर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की।
लंबे समय बाद मोबाइल मिलने से खिले चेहरे
मोबाइल फोन बरामद होने के बाद पुलिस ने उनके वैध मालिकों की पहचान और जरूरी सत्यापन किया। इसके बाद फोन उन्हें सौंप दिए गए। लंबे समय से अपने मोबाइल वापस मिलने की उम्मीद छोड़ चुके लोगों के लिए यह पल खास रहा। मोबाइल वापस मिलने पर लाभुकों ने कोडरमा पुलिस के प्रति आभार जताया।
रांची समेत पूरे झारखंड के लिए अहम पहल
मोबाइल फोन गुम या चोरी होने की घटनाएं सिर्फ कोडरमा तक सीमित नहीं हैं। रांची समेत झारखंड के दूसरे जिलों में भी लोग मोबाइल गुम होने के बाद उसकी बरामदगी के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हैं। ऐसे में कोडरमा पुलिस का तकनीकी जांच और मोबाइल ट्रैकिंग पर आधारित यह अभियान दूसरे जिलों के लिए भी उपयोगी उदाहरण हो सकता है।
‘विश्वास’ अभियान के तहत हुई यह कार्रवाई यह भी दिखाती है कि मोबाइल फोन की शिकायत को केवल सामान्य गुमशुदगी मानकर छोड़ने के बजाय तकनीकी माध्यमों से लगातार ट्रैक किया जाए तो पुराने मामलों में भी बरामदगी संभव है।


