ऑनलाइन कारोबारियों को दूसरे राज्यों में GST रजिस्ट्रेशन की सुविधा, स्क्रैप कारोबारियों के लिए नई शर्तें; पोस्ट-सेल डिस्काउंट और टैक्स रिफंड के नियम भी बदलेंगे
रांची/नई दिल्ली: अक्टूबर का महीना खत्म होने के साथ ही 1 नवंबर 2026 से देश में कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू होने जा रहे हैं। इनका असर मोबाइल उपभोक्ताओं, कारोबारियों, ई-कॉमर्स विक्रेताओं, स्क्रैप व्यवसायियों और सरकारी पेंशन पाने वाले लोगों पर पड़ेगा। टेलीकॉम सेक्टर में अब अनजान नंबर से आने वाली कॉल पर कॉल करने वाले का नाम दिखाने की व्यवस्था शुरू होगी। वहीं, जीएसटी के तहत ऑनलाइन कारोबारियों को दूसरे राज्यों में गोदाम के पते पर रजिस्ट्रेशन कराने का विकल्प मिलेगा। सामान की बिक्री के बाद दिए जाने वाले डिस्काउंट और टैक्स रिफंड की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है।

इसके अलावा, स्क्रैप और ई-वेस्ट से जुड़े कुछ कारोबारियों को GST रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य हो सकता है। पेंशनर्स को भी नवंबर में अपना वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र जमा करना होगा। इन बदलावों का असर झारखंड के आम लोगों और कारोबारियों पर भी पड़ेगा।
आइए विस्तार से जानते हैं कि 1 नवंबर से क्या-क्या बदलने जा रहा है।
1. अनजान नंबर से कॉल आने पर स्क्रीन पर दिखेगा कॉलर का नाम
मोबाइल इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए 1 नवंबर से एक बड़ी सुविधा शुरू होने जा रही है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने 13 अक्टूबर 2026 को जारी सर्कुलर के माध्यम से सभी टेलीकॉम कंपनियों को Calling Name Presentation (CNAP) सेवा शुरू करने का निर्देश दिया है।
इस व्यवस्था के तहत जब किसी व्यक्ति के मोबाइल पर अनजान नंबर से कॉल आएगी, तो मोबाइल स्क्रीन पर केवल नंबर नहीं, बल्कि कॉल करने वाले का नाम भी दिखाई देगा। यह नाम कॉल करने वाले व्यक्ति के टेलीकॉम ऑपरेटर के पास दर्ज ग्राहक जानकारी के आधार पर दिखाया जाएगा।
अभी तक अनजान नंबर से कॉल आने पर लोगों को Truecaller जैसे ऐप की मदद लेनी पड़ती थी। लेकिन CNAP सेवा के लिए किसी थर्ड पार्टी ऐप की जरूरत नहीं होगी।
इस व्यवस्था की प्रमुख बातें:
- टेलीकॉम कंपनियों को 1 नवंबर से 4G और उससे ऊपर के नेटवर्क पर CNAP सेवा शुरू करनी होगी।
- यह सुविधा उपभोक्ताओं के लिए डिफॉल्ट रूप से उपलब्ध कराई जाएगी।
- मोबाइल नंबर के साथ टेलीकॉम डेटाबेस में दर्ज नाम दिखाई देगा।
- कारोबारियों को सत्यापन के बाद अपना रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क या व्यापारिक नाम दिखाने का विकल्प मिल सकता है।
- जिन लोगों ने कॉलर आईडी छिपाने (CLIR) की सुविधा ली है, उनका नाम प्रदर्शित नहीं किया जाएगा।
- फिलहाल 2G और 3G नेटवर्क तथा लैंडलाइन पर इसे लागू करने का फैसला अलग से किया जाएगा।
2. ऑनलाइन कारोबारियों को दूसरे राज्यों में GST रजिस्ट्रेशन की नई सुविधा
जीएसटी के नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वाले छोटे कारोबारियों के लिए किया गया है। केंद्रीय जीएसटी (संशोधन) नियम, 2026 के तहत नया नियम 14B जोड़ा गया है, जो 1 नवंबर से लागू होगा।
इसके तहत कोई कारोबारी जिस राज्य में अपना कार्यालय या दुकान नहीं रखता, वहां भी ई-कॉमर्स कंपनी के गोदाम के पते पर GST रजिस्ट्रेशन करा सकेगा।
उदाहरण के तौर पर झारखंड का कोई कारोबारी रांची से अपना सामान बेचता है और उसका सामान दूसरे राज्य में स्थित Amazon या Flipkart जैसे ई-कॉमर्स ऑपरेटर के गोदाम में रखा जाता है, तो निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर वह उस गोदाम के पते पर GST रजिस्ट्रेशन करा सकता है।
इस सुविधा के लिए जरूरी शर्तें:
- कारोबारी का किसी एक राज्य में पहले से नियमित GST रजिस्ट्रेशन होना चाहिए।
- दूसरे राज्य में ई-कॉमर्स ऑपरेटर का गोदाम होना चाहिए।
- संबंधित ई-कॉमर्स कंपनी की सहमति जरूरी होगी।
- संबंधित आपूर्ति पर दूसरे पंजीकृत कारोबारियों को होने वाली मासिक आउटपुट टैक्स देनदारी 2.5 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- आवेदन GST REG-01 के माध्यम से करना होगा।
- बायोमेट्रिक आधार सत्यापन और निर्धारित दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
- इस विशेष रजिस्ट्रेशन के तहत बिक्री केवल पात्र ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जा सकेगी।
ई-कॉमर्स कंपनी को गोदाम का पता इस्तेमाल करने की सहमति सात कार्य दिवस के भीतर देनी होगी। सहमति नहीं मिलने पर आवेदन आगे नहीं बढ़ेगा।
3. बिक्री के बाद दिए जाने वाले डिस्काउंट पर GST का नया नियम
1 नवंबर से जीएसटी में पोस्ट-सेल डिस्काउंट यानी सामान या सेवा की बिक्री के बाद दी जाने वाली छूट के नियम भी बदल जाएंगे।
पहले किसी कारोबारी को बिक्री के बाद दिए गए डिस्काउंट का लाभ GST की टैक्सेबल वैल्यू घटाने के लिए लेने हेतु कुछ विशेष शर्तें पूरी करनी पड़ती थीं। इनमें बिक्री से पहले या बिक्री के समय समझौता होना और डिस्काउंट को संबंधित इनवॉइस से जोड़ना शामिल था।
अब इन दोनों शर्तों को हटा दिया गया है।
नए नियम के तहत कारोबारी बिक्री के बाद भी ग्राहक को डिस्काउंट दे सकता है और निर्धारित प्रक्रिया के तहत GST क्रेडिट नोट जारी कर सकता है।
नए नियम में क्या बदलेगा?
- बिक्री से पहले डिस्काउंट का समझौता होना अनिवार्य नहीं रहेगा।
- डिस्काउंट को पहले से किसी खास इनवॉइस से जोड़ने की शर्त हटा दी गई है।
- बिक्री के बाद दिए गए डिस्काउंट के लिए GST क्रेडिट नोट जारी किया जा सकेगा।
- ग्राहक को उस डिस्काउंट से संबंधित इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) वापस करना होगा।
- GST क्रेडिट नोट जारी करने से संबंधित बाकी कानूनी शर्तों का पालन करना होगा।
उदाहरण के तौर पर कोई कंपनी अपने डीलर को सालभर का टारगेट पूरा करने पर अतिरिक्त छूट देती है। पहले इस तरह की छूट को GST में समायोजित करने के लिए पहले से तय समझौते की शर्त महत्वपूर्ण थी। अब निर्धारित प्रक्रिया के तहत बिक्री के बाद भी ऐसी छूट का क्रेडिट नोट जारी किया जा सकेगा।
4. GST रिफंड की प्रक्रिया होगी तेज
जीएसटी के नए संशोधन में टैक्स रिफंड की प्रक्रिया को भी सरल और तेज करने का प्रयास किया गया है। इसका लाभ खासकर उन कारोबारियों को मिल सकता है जिनके इनपुट पर लगने वाला टैक्स आउटपुट पर लगने वाले टैक्स से अधिक होता है। इसे इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर कहा जाता है।
नए नियमों के तहत रिफंड आवेदन की शुरुआती जांच और प्रोविजनल रिफंड की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है।
प्रमुख बदलाव:
- रिफंड आवेदन की जांच और उसकी स्वीकृति की प्रक्रिया में समय सीमा कम की गई है।
- रिफंड आवेदन दाखिल होने के 10 दिनों के भीतर अधिकारी को आवेदन की रसीद या कमियों की सूचना देनी होगी।
- 10 दिनों के भीतर दोनों में से कोई सूचना नहीं मिलने पर आवेदन को स्वतः स्वीकार किए जाने की व्यवस्था होगी।
- जोखिम के आधार पर पात्र आवेदनों में प्रोविजनल रिफंड का आदेश तीन कार्य दिवस के भीतर जारी किया जा सकेगा।
- इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर में रिफंड की गणना के फॉर्मूले में भी बदलाव किया गया है।
इसका मतलब यह नहीं है कि हर कारोबारी को तीन दिन में पूरा रिफंड मिल जाएगा। यह निर्धारित शर्तों और जोखिम मूल्यांकन के आधार पर प्रोविजनल रिफंड की व्यवस्था है।
5. पांच तरह के स्क्रैप कारोबारियों के लिए GST रजिस्ट्रेशन की छूट खत्म
1 नवंबर से स्क्रैप और ई-वेस्ट से जुड़े कारोबारियों के लिए भी एक अहम बदलाव लागू होगा।
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना संख्या 06/2026-Central Tax के अनुसार पांच श्रेणियों के सामान की आपूर्ति करने वाले कारोबारियों को पहले मिलने वाली एक विशेष GST रजिस्ट्रेशन छूट अब उपलब्ध नहीं रहेगी।
इन पांच श्रेणियों में शामिल हैं:
- इस्तेमाल किया हुआ कुकिंग ऑयल।
- प्लास्टिक का कचरा और स्क्रैप।
- पुराने टायरों का स्क्रैप।
- लोहा, तांबा और अन्य निर्धारित धातुओं का स्क्रैप।
- इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक कचरा यानी ई-वेस्ट।
इस बदलाव के बाद इन वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले कारोबारियों को सामान्य परिस्थितियों में लागू टर्नओवर सीमा के आधार पर मिलने वाली उक्त छूट का लाभ नहीं मिलेगा। उन्हें अपने कारोबार के अनुसार GST रजिस्ट्रेशन की जरूरत जांचनी होगी।
6. GST प्रैक्टिशनर्स के रजिस्ट्रेशन में संशोधन की नई व्यवस्था
1 नवंबर से GST प्रैक्टिशनर्स के लिए भी एक नई प्रक्रिया लागू होगी।
नए नियम 83C के तहत GST प्रैक्टिशनर अपने नामांकन के समय दी गई जानकारी में बदलाव करना चाहते हैं, तो इसके लिए GST पोर्टल पर आवेदन कर सकेंगे।
इसके लिए निर्धारित दस्तावेजों के साथ GST REG-14 फॉर्म जमा करना होगा। आवेदन पर इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन कोड के माध्यम से हस्ताक्षर या सत्यापन किया जा सकेगा।
7. सरकारी पेंशनर्स को 1 से 30 नवंबर तक जमा करना होगा जीवन प्रमाण पत्र
नवंबर महीने में सरकारी पेंशन पाने वाले लोगों के लिए भी एक महत्वपूर्ण काम शुरू हो रहा है। 80 वर्ष से कम उम्र के पेंशनर्स 1 नवंबर से अपना वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र यानी Life Certificate जमा कर सकेंगे।
यह प्रमाण पत्र इस बात की पुष्टि करता है कि पेंशन पाने वाला व्यक्ति जीवित है और उसकी पेंशन जारी रखी जा सकती है।
80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पेंशनर्स के लिए यह सुविधा 1 अक्टूबर से ही शुरू हो चुकी है।
जीवन प्रमाण पत्र जमा करने के तरीके:
- बैंक की शाखा में जाकर।
- डिजिटल जीवन प्रमाण यानी Jeevan Pramaan के माध्यम से।
- स्मार्टफोन में फेस ऑथेंटिकेशन की सुविधा से।
- बैंक की डोरस्टेप बैंकिंग सेवा के माध्यम से, जहां उपलब्ध हो।
जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की सामान्य अंतिम तारीख 30 नवंबर है। समय पर प्रमाण पत्र नहीं देने पर पेंशन का भुगतान अस्थायी रूप से रुक सकता है।
8. ऑडिट वाले कारोबारियों के लिए ITR दाखिल करने की तारीख बढ़ी
इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने वालों के लिए भी एक महत्वपूर्ण अपडेट है। CBDT ने आकलन वर्ष 2026-27 के लिए उन निर्धारित करदाताओं की ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी है, जिनके खातों का आयकर कानून के तहत ऑडिट जरूरी है।
ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की निर्धारित तारीख भी 30 सितंबर से बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 की गई थी।
यह राहत सभी करदाताओं के लिए नहीं है। यह केवल अधिसूचना में शामिल ऑडिट वाले निर्धारित वर्गों के लिए है।
9. LPG सिलेंडर की कीमतों पर भी रहेगी नजर
हर महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियां घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। ऐसे में 1 नवंबर को भी नई कीमतों की घोषणा हो सकती है।
हालांकि, 31 अक्टूबर तक नवंबर के लिए कीमतों में बदलाव की कोई पुष्ट आधिकारिक घोषणा उपलब्ध नहीं है। इसलिए सिलेंडर के दाम बढ़ने या घटने का दावा अभी नहीं किया जा सकता।
यदि कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में बदलाव होता है तो इसका असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और छोटे खाद्य कारोबारियों पर पड़ सकता है। घरेलू सिलेंडर की कीमत में बदलाव होने पर आम परिवारों का रसोई बजट प्रभावित होगा।
किन नियमों को 1 नवंबर का नया बदलाव समझना गलत होगा?
कुछ ऐसे नियम भी हैं जिनकी चर्चा नवंबर के नए बदलावों के साथ हो रही है, लेकिन वे 1 नवंबर 2026 से पहली बार लागू नहीं हो रहे हैं।
बैंक में चार नॉमिनी बनाने की सुविधा: बैंक खातों और लॉकर में अधिकतम चार नॉमिनी बनाने का प्रावधान 1 नवंबर 2025 से लागू है। इसे 2026 का नया नियम बताना गलत होगा।
सोने की ज्वेलरी पर HUID: छह अंकों का HUID कोड और अनिवार्य हॉलमार्किंग का नियम पहले से लागू है। झारखंड के रांची, बोकारो, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, गढ़वा, देवघर और रामगढ़ जैसे अधिसूचित जिलों में लागू प्रावधानों के तहत निर्धारित छूटों को छोड़कर बिना HUID वाली ज्वेलरी की बिक्री नहीं की जा सकती। इसे भी 1 नवंबर 2026 का नया नियम नहीं माना जाना चाहिए।
आम लोगों और कारोबारियों के लिए जरूरी बातें
नवंबर से लागू होने वाले बदलावों को देखते हुए मोबाइल उपभोक्ताओं, पेंशनर्स और कारोबारियों को कुछ जरूरी तैयारियां करनी चाहिए।
- मोबाइल उपभोक्ता अनजान कॉल पर दिखने वाले नाम को देखें, लेकिन OTP और बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें।
- ऑनलाइन विक्रेता GST के नए नियम 14B के तहत अपनी पात्रता जांचें।
- थोक व्यापारी और डिस्ट्रीब्यूटर पोस्ट-सेल डिस्काउंट के लिए नए क्रेडिट नोट नियम समझें।
- स्क्रैप और ई-वेस्ट कारोबारी अपने GST रजिस्ट्रेशन की स्थिति जांचें।
- GST रिफंड का दावा करने वाली कंपनियां नए नियमों के अनुसार दस्तावेज तैयार रखें।
- पेंशनर्स 30 नवंबर से पहले अपना जीवन प्रमाण पत्र जमा कर दें।
- ऑडिट वाले पात्र करदाता 21 नवंबर की ITR तारीख का ध्यान रखें।
कुल मिलाकर, 1 नवंबर 2026 से लागू होने वाले बदलावों में सबसे प्रमुख बदलाव टेलीकॉम और GST क्षेत्र में हैं। झारखंड के मोबाइल उपभोक्ताओं को कॉलर का नाम देखने की सुविधा मिलेगी, जबकि ऑनलाइन कारोबारियों, स्क्रैप व्यवसायियों और औद्योगिक इकाइयों को नए टैक्स नियमों के अनुसार अपनी प्रक्रियाएं अपडेट करनी होंगी। वहीं, पेंशनर्स और ऑडिट वाले करदाताओं के लिए नवंबर की निर्धारित तारीखें भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।


