पलामू, गढ़वा और लातेहार में मुठभेड़ में मारे गए, पकड़े गए या सरेंडर कर चुके नक्सलियों के नाम पुलिस की फरारी सूची में अब भी दर्ज हैं। पुलिस के वरीय अधिकारियों की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। विभिन्न मुकदमों में ऐसे नक्सलियों को फरार दिखाया गया है, साथ ही कई ऐसे अपराधियों के नाम भी फरारी सूची में शामिल हैं जो वास्तव में जेल के अंदर बंद हैं। पलामू रेंज के डीआईजी किशोर कौशल ने बरवाडीह थाना के निरीक्षण के दौरान इस गड़बड़ी को पकड़ा, जिसके बाद तीनों जिलों में फरारी सूची की समीक्षा शुरू की गई है।
सभी थाना प्रभारियों के कार्यों की होगी समीक्षा
पलामू, गढ़वा और लातेहार में तैनात सभी थाना प्रभारियों के कार्यकाल की अब समीक्षा होगी। इसमें देखा जाएगा कि उनके कार्यकाल में कितने फरार नक्सली और अपराधी पकड़े गए, कितने मारे गए या सरेंडर किए और फरारी सूची में क्या अपडेट किया गया। डीआईजी किशोर कौशल ने बताया कि तीनों जिलों के एसपी को निर्देश दिए गए हैं और लापरवाही बरतने वाले थाना प्रभारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वर्षों पुराने फरार मामलों में सर्च अभियान
8-10 साल पुराने मुकदमों में फरार आरोपियों के खिलाफ बड़ा सर्च अभियान शुरू करने का निर्देश दिया गया है। पुलिस उन लोगों की भी तलाश करेगी जो घर-बार छोड़कर कहीं और जा बसे हैं।
घटती गई इनामी नक्सलियों की संख्या
पलामू रेंज में 2015-16 तक 53 से अधिक इनामी नक्सली कमांडर थे, जो 2019 तक घटकर 18 रह गए और 2026 में सिर्फ सात बचे हैं। 2015 के बाद से इस क्षेत्र में मुठभेड़ों में 31 से अधिक नक्सली मारे जा चुके हैं और बड़ी संख्या में सरेंडर भी हुए हैं।
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