प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बुधवार को नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद 2 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘नो यूपीआई डे’ का आह्वान वापस ले लिया है। बैठक में व्यापारियों ने 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत शुल्क को लेकर अपनी चिंताएं सरकार के सामने रखीं।
प्रवीण खंडेलवाल ने किया प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व
बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से आए करीब 20 व्यापार प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चांदनी चौक के सांसद और कैट (सीएआईटी) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने किया। इसमें ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन और ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन सहित कई संगठन थे।
व्यापारियों की आशंका
व्यापारियों ने कहा कि प्रस्तावित शुल्क से छोटे और मध्यम कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है और डिजिटल भुगतान अपनाने की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। उन्होंने सरकार से शुल्क को लेकर स्पष्टता मांगी और आग्रह किया कि फैसले पर अमल से पहले उनकी चिंताओं को ध्यान में रखा जाए। इससे पहले ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स फेडरेशन और ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन ने 2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ मनाने की घोषणा की थी।
“सकारात्मक संवाद” का दावा
बैठक के बाद खंडेलवाल ने कहा कि सरकार के साथ सकारात्मक और रचनात्मक संवाद हुआ। वित्त मंत्री ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि उन पर ध्यानपूर्वक विचार होगा। उन्होंने बताया कि अब 2 अक्टूबर को कोई ‘नो यूपीआई डे’ नहीं मनाया जाएगा।
आगे सहयोग की बात
खंडेलवाल के मुताबिक व्यापारिक संगठन सरकार से संवाद जारी रखेंगे और डिजिटल भुगतान प्रणाली को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने में सहयोग करेंगे। साइबर खतरों और डिजिटल सुरक्षा के मुद्दों पर भी चर्चा होगी। साथ ही संगठन अपने-अपने राज्यों में जागरूकता बढ़ाने का काम करेंगे।
शुल्क पर चिंता बरकरार
विरोध वापस लेने के बावजूद व्यापारिक संगठनों ने साफ किया कि वे प्रस्तावित शुल्क को लेकर अपनी चिंता बनाए हुए हैं। 2,000 रुपये से अधिक के पात्र मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क का प्रस्ताव 15 अक्टूबर से प्रभावी होना है। संगठनों को उम्मीद है कि उससे पहले उनकी चिंताओं का समाधान निकलेगा।
एनपीसीआई की सफाई
इसी महीने एनपीसीआई ने उन खबरों का खंडन किया था, जिनमें कहा गया था कि यूपीआई एमडीआर पर जीएसटी लगने से छोटे व्यापारियों पर बोझ बढ़ेगा। एनपीसीआई के अनुसार एमडीआर केवल 2,000 रुपये से अधिक के पी2एम लेनदेन पर लागू होगा, जबकि 2,000 रुपये तक के लेनदेन पर यह शून्य रहेगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ऐसे लेनदेन यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 96 प्रतिशत से अधिक हैं।
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