बिना कंप्यूटर और कोडिंग की जानकारी के भी समझ सकेंगे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा प्राइवेसी से लेकर डीपफेक की पहचान तक की मिलेगी जानकारी
नई दिल्ली: स्कूली शिक्षा में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने एक अहम पहल की है। परिषद ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग (Computational Thinking) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक शुरुआती मॉड्यूल तैयार किया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को AI की कार्यप्रणाली समझाने के साथ-साथ तकनीक का सुरक्षित, जिम्मेदार और समझदारी से इस्तेमाल करना सिखाना है।
23 अक्टूबर 2026 को सामने आई इस पहल के तहत तैयार मॉड्यूल को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की सोच के अनुरूप विकसित किया गया है। खास बात यह है कि इसे ऐसे विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जिन्हें पहले से AI या कोडिंग की जानकारी नहीं है।
पांच प्रमुख विषयों पर आधारित होगी पढ़ाई
नए मॉड्यूल में AI को केवल तकनीकी विषय के रूप में नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर समझाने पर जोर दिया गया है। इसमें पांच प्रमुख विषय शामिल किए गए हैं:
1. रोजमर्रा की जिंदगी में AI: विद्यार्थी समझेंगे कि मोबाइल के की-बोर्ड पर शब्दों के सुझाव, संगीत की सिफारिश और दूसरी डिजिटल सेवाओं में AI किस तरह काम करता है।
2. मशीनें कैसे सीखती हैं: उदाहरणों और गतिविधियों के जरिए बताया जाएगा कि मशीनें उपलब्ध डेटा से पैटर्न पहचानना और उसके आधार पर परिणाम देना कैसे सीखती हैं।
3. AI से गलतियां क्यों होती हैं: विद्यार्थी जानेंगे कि AI हमेशा सही जवाब नहीं देता। गलत जानकारी, भ्रामक तस्वीरों, डीपफेक और AI से तैयार सामग्री की विश्वसनीयता को परखने के तरीके भी समझाए जाएंगे।
4. डेटा की गोपनीयता और जिम्मेदार इस्तेमाल: इसमें निजी जानकारी की सुरक्षा, डिजिटल सेफ्टी, निष्पक्षता और ऑनलाइन जानकारी साझा करते समय बरती जाने वाली सावधानियों पर ध्यान दिया जाएगा।
5. AI टूल्स का इस्तेमाल: विद्यार्थियों को AI टूल्स से सवाल पूछने, बेहतर निर्देश यानी प्रॉम्प्ट तैयार करने और प्राप्त जवाबों की जांच करने का अभ्यास कराया जाएगा।
रटने के बजाय गतिविधियों से सीखेंगे विद्यार्थी
NCERT ने इस मॉड्यूल में गतिविधि आधारित पढ़ाई को प्राथमिकता दी है। विद्यार्थियों को केवल परिभाषाएं याद कराने के बजाय चर्चा, प्रयोग, व्यावहारिक अभ्यास और स्वयं विचार करने के अवसर दिए जाएंगे।
कंप्यूटेशनल थिंकिंग का अर्थ किसी समस्या को व्यवस्थित तरीके से समझना और उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर समाधान तक पहुंचना है। इसमें तार्किक सोच, पैटर्न पहचानना और समस्या सुलझाने की क्षमता महत्वपूर्ण होती है।
इस पद्धति से विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी समस्या का समाधान खोजने के लिए तकनीक का उपयोग कैसे किया जा सकता है और किन परिस्थितियों में मानवीय सोच जरूरी बनी रहती है।
कंप्यूटर और इंटरनेट के बिना भी हो सकेंगी गतिविधियां
इस मॉड्यूल की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसकी गतिविधियां डिजिटल उपकरणों के साथ-साथ उनके बिना भी कराई जा सकती हैं। जिन स्कूलों में हर विद्यार्थी के लिए कंप्यूटर या पर्याप्त डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहां भी शिक्षक समूह चर्चा, कागज पर अभ्यास और अन्य गतिविधियों के माध्यम से विषय समझा सकेंगे।
इससे ग्रामीण और सीमित संसाधनों वाले स्कूलों के विद्यार्थियों को भी AI की बुनियादी समझ विकसित करने का अवसर मिल सकता है।
डीपफेक और फर्जी जानकारी से बचने की भी मिलेगी सीख
आज सोशल मीडिया पर AI से तैयार तस्वीरें, वीडियो और गलत जानकारियां तेजी से फैल सकती हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को किसी भी जानकारी पर तुरंत विश्वास करने या उसे आगे साझा करने के बजाय उसकी सत्यता जांचने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
मॉड्यूल में डेटा प्राइवेसी और डिजिटल सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को समझाया जाएगा कि पासवर्ड, OTP, पहचान संबंधी दस्तावेज और दूसरी संवेदनशील जानकारियां AI टूल्स पर साझा करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
इस पहल का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को नई तकनीक से परिचित कराना नहीं, बल्कि उन्हें उसके संभावित जोखिमों और सीमाओं के प्रति जागरूक बनाना भी है।
NEP 2020 के अनुरूप तकनीकी शिक्षा पर जोर
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में गणितीय सोच, समस्या समाधान और उभरती तकनीकों की समझ विकसित करने पर जोर दिया गया है। इसी दिशा में स्कूली शिक्षा में कंप्यूटेशनल थिंकिंग और AI को शामिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
शिक्षा मंत्रालय की 5 अगस्त 2026 की जानकारी के अनुसार, NCERT और CBSE ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 3 से 8 तक के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग और AI का पाठ्यक्रम भी शुरू किया है। कक्षा 9 से 12 के लिए AI और उससे जुड़े विषयों का पाठ्यक्रम भी तैयार किया जा चुका है।
विद्यार्थियों को तकनीक का समझदार उपयोगकर्ता बनाना लक्ष्य
NCERT की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब AI का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, संचार और रोजगार सहित कई क्षेत्रों में बढ़ रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए तकनीक का उपयोग करना सीखने के साथ उसकी सीमाओं को समझना भी जरूरी है।
नए मॉड्यूल के माध्यम से विद्यार्थियों में तार्किक सोच, रचनात्मकता, समस्या समाधान और डिजिटल जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। इसका मूल संदेश यही है कि AI सीखने और काम करने में मददगार हो सकता है, लेकिन सही निर्णय लेने, जानकारी की पुष्टि करने और जिम्मेदारी निभाने में मानवीय विवेक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रहेगी।


