पलामू: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की ओर से इसे ‘पटरी पर’ आने की बात कही गई है। एम्बुलेंस सेवा को लेकर भी मरीजों तक 15 मिनट में सुविधा पहुंचाने का दावा किया गया है। लेकिन पलामू के छतरपुर अनुमंडलीय अस्पताल की एक घटना इन दावों के बीच व्यवस्था की जमीनी तस्वीर पर सवाल खड़े कर रही है।
सड़क हादसे में घायल एक नाबालिग को बेहतर इलाज के लिए मेदिनीनगर रेफर किया गया। अस्पताल से बाहर ले जाने के लिए एम्बुलेंस की जरूरत थी, लेकिन समय पर सरकारी वाहन नहीं मिल सका। घायल अस्पताल परिसर में दर्द से तड़पता रहा, जबकि परिजन एम्बुलेंस के लिए प्रयास करते रहे। अंत में उन्हें निजी वाहन की व्यवस्था करनी पड़ी।
एम्बुलेंस व्यवस्था पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों के मुताबिक, छतरपुर अनुमंडलीय अस्पताल में दो से चार एम्बुलेंस होने की बात कही जाती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आपात स्थिति में रेफर किए गए मरीज के लिए समय पर वाहन क्यों उपलब्ध नहीं हो सका।
मामले पर पलामू के सिविल सर्जन अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल की एम्बुलेंस फिलहाल चलने की स्थिति में नहीं हैं।
दावे और जमीनी हकीकत के बीच सवाल
एम्बुलेंस किसी आपात मरीज के लिए सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि समय पर बेहतर इलाज तक पहुंचने का जरिया है। खासकर सड़क दुर्घटना में घायल मरीज को रेफर किए जाने के बाद देरी परेशानी बढ़ा सकती है।
एक तरफ स्वास्थ्य व्यवस्था ‘पटरी पर’ होने की बात कही जा रही है और दूसरी तरफ मरीज एम्बुलेंस के इंतजार में तड़प रहा है। वही झारखण्ड के स्वास्थ्य मंत्री दावा किए जा रहे है कि झारखण्ड की स्वास्थय व्यवस्था पटरी पर है।
