नई दिल्ली: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को तीन प्रमुख देशों—इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड—की महत्वपूर्ण आधिकारिक यात्रा के लिए नई दिल्ली से प्रस्थान किया। यह पीएम मोदी का तीन देशों का दौरा 6 से 11 जुलाई 2026 तक चलेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य इन महत्वपूर्ण विकास साझेदारों के साथ भारत के आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाना है। इस यात्रा से भारतीय युवाओं के लिए वैश्विक मंच पर प्रगति के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है, जिससे उनका भविष्य उज्ज्वल हो सके।
यात्रा पर निकलने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक विस्तृत लेख साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस उच्च स्तरीय यात्रा का प्राथमिक एजेंडा भारत के ‘कीमती विकास साझेदारों’ के साथ संबंधों को गहरा करना है, ताकि साझा समृद्धि और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। यह दौरा सिर्फ राजनयिक मुलाकातों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने और लोगों से लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है।
इंडोनेशिया में पीएम मोदी का तीन देशों का दौरा: सांस्कृतिक सेतु
अपने दौरे के पहले चरण में प्रधानमंत्री मोदी 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया गणराज्य के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियान्टो के विशेष निमंत्रण पर जकार्ता पहुंचे। यह निमंत्रण दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों का प्रतीक है, खासकर यह देखते हुए कि राष्ट्रपति प्रबोवो 26 जनवरी 2025 को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। पीएम मोदी ने बताया कि वर्ष 2018 में उनके पहले इंडोनेशिया दौरे के दौरान ही दोनों देशों के रिश्ते ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ में बदल गए थे, और यह नया द्विपक्षीय दौरा आपसी सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों को और प्रगाढ़ करेगा। इंडोनेशिया के साथ भारत के सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंध हैं, जो ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के तहत और मजबूत हुए हैं।
इंडोनेशिया में रहते हुए, पीएम मोदी योग्याकार्ता में ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर परिसर का भी दौरा करेंगे। यह मंदिर परिसर हिंदू और बौद्ध धर्म की समृद्ध विरासत का प्रतीक है और यह भारत तथा इंडोनेशिया के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है। इस दौरान वे वहां रह रहे भारतीय प्रवासियों से भी संवाद करेंगे, जो दोनों देशों के बीच एक जीवंत पुल का काम करते हैं। इन संवादों से भारतीय समुदाय में उत्साह का संचार होगा और उन्हें अपनी मातृभूमि से जुड़ाव महसूस करने का मौका मिलेगा। यह मानवीय स्पर्श इस दौरे की एक महत्वपूर्ण विशेषता है, जो इसे केवल कूटनीतिक यात्रा से कहीं अधिक बनाता है।
ऑस्ट्रेलिया में क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापार पर गहन वार्ता
इंडोनेशिया की सफल यात्रा के बाद, प्रधानमंत्री मोदी ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बनीज के निमंत्रण पर मेलबर्न के लिए उड़ान भरेंगे। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारत की नजरें मुख्य रूप से रक्षा, क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, निवेश, शिक्षा और मोबिलिटी के क्षेत्रों पर टिकी होंगी। भारत और ऑस्ट्रेलिया ‘क्वाड’ (QUAD) के सदस्य के रूप में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह यात्रा दोनों देशों के बीच रणनीतिक समन्वय को और बढ़ाएगी।
मेलबर्न में, प्रधानमंत्री भारतीय डायस्पोरा के एक विशाल कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय, दोनों देशों के रिश्तों का एक ‘मजबूत स्तंभ’ हैं, और उनका योगदान सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह कार्यक्रम प्रवासी भारतीयों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने और उनकी उपलब्धियों को मान्यता देने का अवसर होगा। इसके अतिरिक्त, यह यात्रा दोनों देशों को स्पोर्ट्स साइंस, खेल और उभरती हुई अत्याधुनिक तकनीकों (क्रिटिकल टेक्नोलॉजी) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का एक बड़ा मंच प्रदान करेगी। भारतीय विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर भारत की विदेश नीति और ऐसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध है।
न्यूजीलैंड के साथ आर्थिक साझेदारी को नई दिशा
दौरे के अंतिम चरण में, पीएम मोदी न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बुलावे पर ऑकलैंड पहुंचेंगे। मार्च 2025 में न्यूजीलैंड के पीएम के भारत दौरे के बाद से दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में काफी तेजी आई है। इस यात्रा के दौरान, ऑकलैंड में दोनों राजनेताओं के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने और आर्थिक-कमर्शियल रिश्तों को बढ़ाने पर गहन चर्चा होगी। न्यूजीलैंड के साथ कृषि, डेयरी और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं, और इस यात्रा से इन क्षेत्रों में नए रास्ते खुलेंगे।
प्रधानमंत्री ने अंत में रेखांकित किया कि पूर्वी और दक्षिणी हिंद महासागर के इन देशों की यात्रा भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और स्वतंत्र व खुले ‘हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific)’ के विजन को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूती प्रदान करेगी। यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करेगी, बल्कि एक सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण में भारत की प्रतिबद्धता को भी दोहराएगी। यह पहल वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और जिम्मेदारियों को दर्शाती है, जिससे भविष्य में क्षेत्रीय और वैश्विक शांति में भारत का योगदान और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा। यह पीएम मोदी का तीन देशों का दौरा भविष्य के लिए एक मजबूत नींव रख रहा है।


