रांची: जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित छात्रों के धरना स्थल पर देर रात प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल की मौजूदगी से हलचल तेज हो गई। जानकारी के अनुसार, रात करीब 12:30 से 1 बजे के बीच प्रशासन की टीम धरना स्थल पर पहुंची। इस दौरान पुलिस की ओर से छात्रों को सुरक्षा का भरोसा दिए जाने की बात सामने आई, वहीं दूसरी ओर धरना स्थल खाली करने को लेकर दबाव बनाए जाने का भी दावा किया गया।
बताया जा रहा है कि देर रात स्टेडियम परिसर में लगी कई लाइटें भी बंद कर दी गई थीं। इस घटनाक्रम के बाद धरना स्थल पर मौजूद छात्रों और उनके समर्थकों के बीच प्रशासन की कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई।
हालांकि, प्रशासन की ओर से इस मामले में अलग तस्वीर पेश की गई है। रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री के बयान के मुताबिक, प्रशासन की ओर से पुलिस बल की तैनाती मुख्य रूप से निगरानी और छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की गई थी। उन्होंने कहा कि यदि धरना स्थल पर मौजूद बच्चों को किसी भी तरह की सहायता की आवश्यकता हो तो वे बेझिझक जिला प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं।
वहीं, रांची सिटी एसपी की ओर से प्रशासन के खिलाफ भ्रामक तथ्य फैलाए जाने की बात कही गई है। पुलिस का कहना है कि टीम किसी को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से धरना स्थल पर नहीं पहुंची थी। मौके पर एसडीएम, डीसी, एडीओ, एसएसपी और एसपी स्तर के अधिकारियों की मौजूदगी की भी जानकारी सामने आई है।
सूचना मिलते ही धरना स्थल पहुंचे भाजपा कार्यकर्ता
इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा पहलू राजनीतिक भी रहा। भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि जैसे ही उन्हें देर रात प्रशासन के धरना स्थल पर पहुंचने की सूचना मिली, वे तत्काल जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंच गए। भाजपा कार्यकर्ताओं के अनुसार, उनके और अन्य लोगों के मौके पर पहुंचने के बाद माहौल पर नजर रखी गई और प्रशासन की टीम को अंततः बिना धरना स्थल खाली कराए वापस लौटना पड़ा।
पूरे घटनाक्रम को लेकर छात्रों के धरना स्थल पर देर रात तक गहमागहमी बनी रही। एक ओर जहां प्रशासन सुरक्षा और निगरानी की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर धरना स्थल खाली कराने के दबाव के आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे में प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के दावों के बीच इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ गई है।
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