देश में अंडों की बढ़ती कीमतों का सीधा असर अब आम लोगों की खरीदारी की आदतों पर दिखने लगा है। नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी (NECC) के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक साल में अंडों के दाम करीब 35-40 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं, और आशंका है कि सर्दियों में डिमांड बढ़ने के साथ कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
खरीदारी पर सीधा असर
लोकल सर्कल्स द्वारा किए गए सर्वे के मुताबिक, अंडे खरीदने वाले 48 प्रतिशत परिवारों ने कीमत बढ़ने के बाद अपनी खरीद की मात्रा या आवृत्ति में कमी कर दी है। वहीं 10 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने सस्ते विकल्प तलाशने या अलग स्रोतों से अंडे खरीदना शुरू कर दिया है। हालांकि 37 प्रतिशत लोगों ने बताया कि वे पहले जितनी ही मात्रा में अंडे खरीदना जारी रखे हुए हैं।
सर्वे में शामिल 62 प्रतिशत परिवारों ने बीते छह महीनों में अंडों की कीमत में 10 से 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की बात कही। इनमें से 31 प्रतिशत ने 10-25 प्रतिशत और इतने ही प्रतिशत लोगों ने 25-50 प्रतिशत तक कीमत बढ़ने की जानकारी दी, जबकि 22 प्रतिशत ने 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की बात कही। कुल मिलाकर 84 प्रतिशत लोगों ने किसी न किसी स्तर पर कीमत में इजाफा महसूस किया।
क्यों बढ़ रही हैं अंडों की कीमतें?
विशेषज्ञों के अनुसार पोल्ट्री फीड की बढ़ती लागत इसकी सबसे बड़ी वजह है। अंडा उत्पादन की कुल लागत में फीड का हिस्सा करीब 65-70 प्रतिशत होता है। मक्के की कीमतों में वृद्धि ने भी पोल्ट्री उद्योग पर दबाव बढ़ाया है, क्योंकि एथेनॉल उत्पादन में मक्के के बढ़ते इस्तेमाल से इसकी उपलब्धता प्रभावित हो रही है।
मिलावट को लेकर भी चिंता
कीमतों के साथ-साथ अंडों की गुणवत्ता को लेकर भी उपभोक्ताओं में गहरी चिंता देखी गई। सर्वे में 70 प्रतिशत परिवारों ने मिलावट को लेकर खुद को बेहद चिंतित बताया, जबकि 20 प्रतिशत ने कुछ हद तक चिंता जताई यानी कुल 90 प्रतिशत उपभोक्ता किसी न किसी रूप में चिंतित पाए गए।
गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में एक उपभोक्ता संगठन की लैब जांच में एक ब्रैंडेड अंडे के सैंपल में नाइट्रोफ्यूरान मेटाबोलाइट्स के अंश मिलने की रिपोर्ट सामने आई थी, जिसके बाद FSSAI ने देशभर में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए थे। हालांकि बाद में FSSAI ने स्पष्ट किया कि अंडे सुरक्षित हैं और इन्हें कैंसर से जोड़ने वाले दावे वैज्ञानिक तौर पर सही नहीं हैं।
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