रांची। JPSC-JSSC परीक्षा विवाद और आंदोलनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर झारखंड की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री एवं रांची सांसद संजय सेठ ने इस मुद्दे पर प्रेस वार्ता करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राहुल गांधी को सीधी चुनौती दी कि वे रांची आएं और आंदोलन के दौरान घायल हुई छात्राओं से खुद मिलें, ताकि उन्हें जमीनी हकीकत का अंदाजा हो सके।
राहुल गांधी को बताया “सबसे बड़ा अवसरवादी”
संजय सेठ ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश अब उन्हें गंभीरता से नहीं लेता और वे “सबसे बड़े अवसरवादी” नेता हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी-बड़ी बातें करने से पहले राहुल गांधी को झारखंड आकर पीड़ित छात्रों और उनके परिवारों से रूबरू होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने राज्य सरकार को भी घेरते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान छात्रों के साथ मारपीट की गई और सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
दो साल पुरानी चिट्ठी पर उठाए सवाल
केंद्रीय मंत्री ने इस विवाद के बीच JPSC की पूर्व अध्यक्ष नीलिमा केरकेट्टा की कथित दो साल पुरानी चिट्ठी का मुद्दा भी जोरशोर से उठाया। उनका कहना था कि यदि उस समय ही आयोग में गड़बड़ियों को लेकर सरकार को आगाह कर दिया गया था, तो अब तक इस पर पर्दा क्यों डाला गया। उन्होंने सवाल किया कि उस चिट्ठी के आधार पर सरकार ने उस वक्त क्या ठोस कार्रवाई की थी, और अगर शिकायत पहले से मौजूद थी तो हालात यहां तक पहुंचने ही क्यों दिए गए।
महाधिवक्ता की गैरमौजूदगी पर भी घेरा
संजय सेठ ने हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता की अनुपस्थिति पर भी कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि इतने संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई में महाधिवक्ता का कोर्ट में मौजूद न होना गंभीर सवाल खड़े करता है। इसे आधार बनाकर उन्होंने सरकार पर “डबल गेम” खेलने का सीधा आरोप लगाया और मांग की कि सरकार पूरे परीक्षा विवाद पर अपना रुख साफ करे।
बातचीत और निष्पक्ष जांच पर जोर
संजय सेठ ने कहा कि यह मसला लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से पूछा कि आखिर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों पर कार्रवाई की नौबत क्यों आई और घायल छात्राओं के साथ जो हुआ, उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने विवाद के समाधान के लिए बातचीत और निष्पक्ष जांच को ही एकमात्र रास्ता बताया।
हाईकोर्ट द्वारा परीक्षा रद करने के सरकारी फैसले पर रोक लगाए जाने के बाद से भाजपा और सत्तारूढ़ झामुमो के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार तेज होता जा रहा है, और यह मुद्दा अब राज्य की सियासत का केंद्र बिंदु बन चुका है।


