Friday, October 2

संथाल परगना प्रवास के दौरान शहीद स्थल पर पहुंचकर प्रतिमाओं पर किया माल्यार्पण, मध्य प्रदेश से आए इन्फ्लुएंसर्स भी रहे मौजूद

साहिबगंज: सेवा संकल्प अभियान और विकसित भारत संकल्प यात्रा के तहत संथाल परगना प्रवास के क्रम में साहिबगंज जिले के भोगनाडीह पहुंचे प्रतिनिधियों ने वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। भोगनाडीह पहुंचने पर सिद्धू-कान्हू, चांद भैरव और फूलो-झानो की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया गया।

कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों ने संथाल हूल के वीर नायकों के संघर्ष और उनके योगदान को याद किया। इस मौके पर मध्य प्रदेश से आए इन्फ्लुएंसर्स भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में शहीद सिद्धू-कान्हू के वंशजों के बारे में जानकारी साझा की गई और उनके ऐतिहासिक योगदान तथा संथाल समाज के संघर्ष से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।

भोगनाडीह में शहीदों को दी श्रद्धांजलि

संथाल परगना के ऐतिहासिक स्थलों में भोगनाडीह का विशेष महत्व माना जाता है। इसी क्रम में सेवा संकल्प अभियान के तहत यहां पहुंचे प्रतिनिधियों ने सबसे पहले वीर शहीदों की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित किए।

सिद्धू-कान्हू और चांद-भैरव को संथाल हूल के प्रमुख नायकों के रूप में याद किया जाता है। वहीं फूलो-झानो ने भी संथाल विद्रोह के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कार्यक्रम में इन सभी वीरों के संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

माल्यार्पण के दौरान उपस्थित लोगों ने वीर शहीदों के प्रति सम्मान व्यक्त किया और उनके संघर्ष से नई पीढ़ी को परिचित कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मध्य प्रदेश से पहुंचे इन्फ्लुएंसर्स भी रहे मौजूद

इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश से आए इन्फ्लुएंसर्स की भी उपस्थिति रही। उन्होंने भोगनाडीह पहुंचकर यहां के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को समझने का प्रयास किया।

कार्यक्रम के दौरान उन्हें संथाल हूल के इतिहास, वीर शहीदों के संघर्ष और भोगनाडीह से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही सिद्धू-कान्हू के वंशजों के बारे में भी जानकारी साझा की गई।

इन्फ्लुएंसर्स के माध्यम से इस ऐतिहासिक स्थल और संथाल समाज के गौरवपूर्ण इतिहास को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने की बात भी सामने आई।

सिद्धू-कान्हू के वंशजों के बारे में दी गई जानकारी

कार्यक्रम के दौरान सिद्धू-कान्हू के वंशजों से जुड़ी जानकारी भी साझा की गई। उपस्थित लोगों को बताया गया कि शहीदों की विरासत को आगे बढ़ाने और उनकी स्मृतियों को जीवंत रखने में उनके वंशजों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

इस दौरान स्थानीय इतिहास और जनजातीय विरासत को संरक्षित रखने की जरूरत पर चर्चा हुई। साथ ही युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन और स्थानीय जननायकों के योगदान से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।

संथाल परगना की संस्कृति और इतिहास को जानने का अवसर

सेवा संकल्प अभियान के तहत संथाल परगना का यह प्रवास क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर भी बना। भोगनाडीह में आयोजित कार्यक्रम के जरिए बाहर से आए लोगों को संथाल हूल और यहां के जननायकों के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी मिली।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों को झारखंड की जनजातीय संस्कृति, इतिहास और स्वतंत्रता संघर्ष से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों को जानने का अवसर मिलता है।

शहीदों की विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश

भोगनाडीह में शहीदों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम में उनके संघर्ष और बलिदान को याद किया गया। आयोजन के माध्यम से वीर शहीदों की स्मृतियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उनके योगदान से लोगों को परिचित कराने का संदेश दिया गया।

संथाल परगना प्रवास के दौरान भोगनाडीह पहुंचकर शहीद सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो को नमन करना क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत के प्रति सम्मान का प्रतीक रहा। मध्य प्रदेश से आए इन्फ्लुएंसर्स की मौजूदगी ने कार्यक्रम को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का एक माध्यम भी उपलब्ध कराया।

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