Tuesday, October 13
रांची। रांची रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर रखी कुछ बांस की टोकरियां पहली नजर में बिल्कुल सामान्य दिखाई दे रही थीं। लेकिन नियमित जांच के दौरान आरपीएफ को इन टोकरियों पर संदेह हुआ। तलाशी लेने पर इनके अंदर से दो रेड सैंड बोआ यानी दोमुंहे सांप और तीन चश्माधारी नाग बरामद हुए। मामले में आरपीएफ ने दो लोगों को हिरासत में लिया है।
आरपीएफ के अनुसार, दोनों की पहचान आनंद नाथ और अर्जू के रूप में हुई है। शुरुआती पूछताछ में सामने आया कि दोनों कथित तौर पर सांपों को जंगल से पकड़कर ले जा रहे थे। आरोप है कि सांपों का सार्वजनिक प्रदर्शन कर लोगों से पैसे कमाने की योजना थी। सामान्य सामान की तरह दिखाने के लिए पांचों सांपों को बांस की टोकरियों में छिपाकर रखा गया था।

ऑपरेशन WILEP के तहत कार्रवाई

आरपीएफ रांची पोस्ट की टीम ने वन्यजीवों की तस्करी और उनके अवैध शोषण के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन WILEP (Wildlife Protection) के तहत कार्रवाई की। तलाशी के दौरान सांपों की बरामदगी के बाद दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।

तीन नागों के दांत टूटे मिले, विष निकालने की आशंका

बरामद तीन चश्माधारी नागों में से कुछ के दांत टूटे हुए पाए गए। इससे सांपों के विष के कथित अवैध दोहन की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि, विष निकालने के उद्देश्य से दांत तोड़े गए थे या नहीं, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
वन्यजीवों को पकड़कर उनका प्रदर्शन करना या उनसे किसी तरह आर्थिक लाभ कमाना उनके प्राकृतिक जीवन के लिए गंभीर खतरा है। दांत तोड़े जाने की पुष्टि होने पर मामला और गंभीर हो सकता है।

क्यों खास है रेड सैंड बोआ?

रेड सैंड बोआ को आम भाषा में दोमुंहा सांप भी कहा जाता है। इसके शरीर का पिछला हिस्सा गोल और मोटा होता है, जिसकी वजह से यह देखने में दो सिर वाला प्रतीत होता है। हालांकि, वास्तव में इसका एक ही सिर और मुंह होता है।
यह सांप विषहीन होता है और आमतौर पर रेतीली या ढीली मिट्टी वाले इलाकों में पाया जाता है। इसके बारे में कई तरह की अंधविश्वासी धारणाएं भी प्रचलित हैं। इन्हीं अफवाहों का फायदा उठाकर वन्यजीव तस्कर इसके कथित औषधीय या अन्य उपयोग की झूठी कहानियां फैलाते हैं और ऊंची कीमत पर इसका अवैध कारोबार करने की कोशिश करते हैं।

चश्माधारी नाग जहरीला सांप

वहीं बरामद तीनों चश्माधारी नाग विषैले सांप हैं। इनके फन के पीछे चश्मे जैसी आकृति बनी होती है, जिसके कारण इन्हें चश्माधारी नाग कहा जाता है। इनके विष के प्रभाव से गंभीर स्थिति में मांसपेशियों में कमजोरी और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। हालांकि समय पर चिकित्सा सहायता और उचित एंटीवेनम मिलने पर उपचार संभव है।

वन विभाग को सौंपे गए सांप

आरपीएफ ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों व्यक्तियों, बरामद पांचों सांपों और संबंधित दस्तावेजों को आगे की कार्रवाई के लिए वन परिक्षेत्र पदाधिकारी, टिम्बर डिपो रेंज, रांची को सौंप दिया है। अब मामले में वन विभाग की ओर से आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आरपीएफ टीम की रही अहम भूमिका

पूरी कार्रवाई में आरपीएफ रांची पोस्ट के निरीक्षक शिशुपाल कुमार, उपनिरीक्षक कमल दास, सहायक उपनिरीक्षक शक्ति सिंह तथा बल सदस्य सुचंद अहीर और आरएल मुंडा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
रांची स्टेशन पर हुई यह कार्रवाई दिखाती है कि वन्यजीवों की तस्करी के लिए किस तरह सामान्य दिखने वाले सामान का इस्तेमाल किया जा सकता है। बांस की साधारण टोकरियों में छिपे पांच सांपों की बरामदगी ने वन्यजीवों के अवैध पकड़ने, प्रदर्शन और संभावित विष दोहन से जुड़े गंभीर पहलुओं को सामने ला दिया है।
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