एक 14 साल का नाबालिग देवघर के एक निजी नशा मुक्ति केन्द्र में सिर्फ इसलिए मार डाला गया क्योंकि उसने केन्द्र के संचालक के साथ गाली गलौज कर दी थी। जो बीमार था, जिसे नशे की लत थी, जिसे इलाज के लिए नशा मुक्ति केन्द्र में भरती कराया गया था, इलाज के लिए संचालकों ने मोटी रकम भी वसूली थी आखिर उसे गाली गलौज के लिए मार डालना, उसकी हत्या कर देना कितना बड़ा जघन्य अपराध है इसका फैसला आप खुद करें..पूरे मामले को समझें कि नाबालिगों के लिए सरकारी नशा मुक्ति केन्द्र ने जब अपने दरवाजे बंद कर लिए और उसे निजी नशा मुक्ति केन्द्र में भेज दिया तब उसतके घरवालों पर क्या गुजरी, उस पीड़ा को महसूस कीजिए एक बार।
देवघर में हुई एक जघन्य घटना के बारे में तो आपने सुना ही होगा, जिसमें 14 साल के बच्चे अक्षत केशरी का शव रुद्र फाउंडेशन नशा मुक्ति केंद्र के जमीन पर पड़ा हुआ मिला था। जी हां, वही नशा मुक्ति केंद्र, जहां नशे की लत से बाहर निकलने में लोगों की मदद की जाती है। उन्हें सही राह पर लाने का दावा किया जाता है। ऐसे संस्थान को चलाने के लिए जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की कितनी जरुरत है, यह सिर्फ एक संचालक और वहाँ के कर्मी ही नहीं वहां इलाज करा रहे तमाम बच्चों के परिजनों तक को पता ।
लेकिन सवाल तब खड़ा होता है, जब इसी संस्थान का संचालक खुद मानसिक रूप से पीड़ित होने के आरोपों में घिरा हो। आखिर जो व्यक्ति स्वयं मानसिक परेशानी से जूझ रहा हो, वह दूसरे लोगों को नशे जैसी लत से बाहर निकलने में किस तरह मदद कर पाएगा?
बताते चलें कि आरोपी संचालक अबीरभव मुखर्जी ने पुलिस की पूछताछ में यह बातें बताई थी कि अक्षत काफी ज्यादा गाली-गलौज करता था और इसी वजह से उसके साथ इस कदर मारपीट की गई कि उसने अपना दम तोड़ दिया।
यह एक पहलू है, जो आरोपी ने पुलिस की पूछताछ के दौरान बताया है।
लेकिन अब हम आपको कुछ ऐसा बताने जा रहे हैं, जो शायद आपको यह सोचने पर मजबूर कर देगा कि आखिर अबीरभव मुखर्जी को अपशब्द बर्दाश्त क्यों नहीं हो पाए वह भी ऐसे स्थान पर जहां लोग खुद की गलत आदतों से परेशान होकर अपनी जिंदगी सवारने के लिए आते है।
क्या मानसिक रूप से पीड़ित है संचालक अबीरभव मुख़र्जी ?
हमारे पास उपलब्ध ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग के अनुसार, अबीरभव मुख़र्जी जिनको अपशब्द बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं होती वह अपनी महिला मित्र को इस कदर सम्बोधित कर रहे है कि शायद आप और हम सुन भी ना पाए। इस बातचीत से कथित तौर पर यह सामने आता है कि अबीरभव मुख़र्जी को गाली-गलौज बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होती, क्योंकि वे स्वयं गाली नहीं देते हैं।
मामला सिर्फ इतना ही नहीं है, यदि ऑडियो रिकॉडिंग को साक्ष्य मानकर चले तो इसमें ना सिर्फ अबीरभव मुख़र्जी को अपशब्द बर्दाश्त नहीं है बल्कि उनकी माँ कृष्णा मुख़र्जी को भी इससे एलर्जी है।
आश्चर्य की बात यह है कि जो साक्ष्य झारखण्ड डिजिटल के पास आए है उसमे इस कदर बातचीत कि गई है कि, सवाल उठना लाजमी है – आखिर ऐसी मानसिक स्थिति से जूझ रहे व्यक्ति को नशा मुक्ति केंद्र खोलने और उसका संचालन करने की अनुमति या लाइसेंस कैसे मिली।
लेकिन बात सिर्फ इतनी ही नहीं है। झारखण्ड डिजिटल के पास मौजूदा साक्ष्य के हिसाब से अबीरभव मुखर्जी पर अपनी महिला मित्र को कथित तौर पर ब्लैकमेल करने और पैसों की मांग करने के भी आरोप हैं। बताया जा रहा है कि कुछ निजी तस्वीरें दिखाकर उनसे पैसे वसूले जाते थे। दावा यह भी है कि यह कहानी सिर्फ एक महिला मित्र की नहीं, बल्कि कई महिला मित्रों से जुड़ी हुई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर अबीरभव मुखर्जी पर लगाए जा रहे आरोप और सामने आईं बातें सही हैं, तो ऐसे व्यक्ति को नशा मुक्ति केंद्र खोलने और उसका संचालक बनने की अनुमति या लाइसेंस आखिर कैसे मिला?
इन सवालों के जवाब अब जांच के साथ-साथ संबंधित विभाग और प्रशासन से भी मांगे जाने चाहिए।
इसे भी पढ़े – मक्का गांव की लाइफलाइन सड़क पर पुल निर्माण सवालों के घेरे में, ग्रामीणों ने लगाए अनियमितता के आरोप
