Wednesday, October 14

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. नीलिमा केरकेट्टा की ओर से करीब दो साल पहले राज्य सरकार को भेजे गए एक पत्र को लेकर अब केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री और रांची सांसद संजय सेठ ने सरकार से जवाब मांगा है। सेठ ने कहा कि तत्कालीन अध्यक्ष ने आयोग की कार्यप्रणाली में आ रही कई समस्याओं और नियुक्ति प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया था। ऐसे में सवाल है कि उस पत्र के बाद सरकार की ओर से क्या कदम उठाए गए।

संजय सेठ ने कहा कि तत्कालीन अध्यक्ष का पत्र सामान्य प्रशासनिक पत्र नहीं था, बल्कि इसमें आयोग के कामकाज और राज्य के युवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी सरकार को दी गई थी।

फाइलें लंबे समय तक लंबित रहने का दावा

संजय सेठ के अनुसार, तत्कालीन अध्यक्ष ने पत्र में बताया था कि JPSC के सदस्यों के स्तर पर कई महत्वपूर्ण कार्य लंबे समय तक लंबित रह रहे थे। साक्षात्कार, परीक्षाफल जारी करने और नियुक्तियों के लिए अनुशंसा जैसी प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी की बात भी पत्र में रखी गई थी।

उन्होंने दावा किया कि सदस्यों की ओर से आने वाली आपत्तियों और प्रक्रियागत अड़चनों के कारण फाइलें आगे बढ़ने में समय लग रहा था। सेठ के मुताबिक, तत्कालीन अध्यक्ष ने सरकार को आयोग के भीतर पैदा हो रही इन समस्याओं से अवगत कराया था।

विश्वविद्यालयों की नियुक्तियों से जुड़ी फाइलों का भी जिक्र

संजय सेठ ने कहा कि पत्र में विश्वविद्यालयों से जुड़ी नियुक्तियों की संचिकाओं के लंबे समय तक लंबित रहने का भी उल्लेख था। इनमें कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, वित्त पदाधिकारी और शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित मामले शामिल थे।

उनके मुताबिक, कई फाइलें लंबे समय तक सदस्यों के पास लंबित रहने की बात तत्कालीन अध्यक्ष ने सरकार के सामने रखी थी। उन्होंने कहा कि ऐसी देरी का असर संबंधित संस्थानों के कामकाज पर पड़ने के साथ-साथ नियुक्ति प्रक्रिया पर भी पड़ता है।

विंडिकेशन और स्क्रूटिनी को लेकर भी दिए गए सुझाव

सेठ ने बताया कि तत्कालीन अध्यक्ष ने विंडिकेशन और स्क्रूटिनी की प्रक्रिया में हो रही देरी को भी पत्र में उठाया था। इसे समयबद्ध करने के लिए उन्होंने अधिकतम तीन दिनों के भीतर प्रक्रिया पूरी करने की व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया था।

इसके अलावा, आयोग की वर्ष 2002 की प्रक्रिया नियमावली में आवश्यक संशोधन करने का सुझाव दिए जाने की बात भी सेठ ने कही। उन्होंने बताया कि सदस्यों की आपत्तियों की समीक्षा के लिए अध्यक्ष को आवश्यक अधिकार देने और किसी सदस्य की अनुपस्थिति के कारण आयोग का काम प्रभावित न हो, इसके लिए व्यवस्था बनाने का सुझाव भी पत्र में था।

संयुक्त असैनिक प्रतियोगिता परीक्षा का भी था मुद्दा

संजय सेठ ने कहा कि तत्कालीन अध्यक्ष ने संयुक्त असैनिक प्रतियोगिता परीक्षा को लेकर भी सरकार को स्थिति से अवगत कराया था। इस परीक्षा के माध्यम से राज्य में DSP, वित्त सेवा, वाणिज्य कर सेवा, श्रम सेवा, सहकारिता सेवा और शिक्षा विभाग सहित अलग-अलग सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है।

उनके अनुसार, पत्र में इस बात पर चिंता जताई गई थी कि परीक्षा होने के बाद भी लंबे समय तक परिणाम जारी नहीं हो पाया था। प्रक्रिया में देरी के कारण अभ्यर्थियों को इंतजार करना पड़ रहा था।

सेठ ने कहा कि तत्कालीन अध्यक्ष ने सरकार को यह भी बताया था कि समय पर परिणाम और नियुक्तियां नहीं होने से राज्य के विभागों को जरूरी मानव संसाधन उपलब्ध कराने में दिक्कत होती है। इसका असर सरकारी विकास और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ सकता है। साथ ही प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले हजारों युवाओं का भविष्य भी प्रभावित होता है।

‘दो साल पहले जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?’

संजय सेठ ने राज्य सरकार से सीधा सवाल किया कि जब तत्कालीन JPSC अध्यक्ष ने करीब दो वर्ष पहले ही आयोग की समस्याओं और सुधार के संभावित उपायों की जानकारी दे दी थी, तो अब तक उस पत्र पर क्या कार्रवाई हुई?

उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि पत्र में उठाए गए मुद्दों पर कौन-कौन से निर्णय लिए गए, कितने सुझावों को लागू किया गया और लंबित प्रक्रियाओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए।

उन्होंने यह भी सवाल किया कि यदि पत्र पर कार्रवाई की गई थी तो उसका असर आयोग की कार्यप्रणाली में क्यों दिखाई नहीं दिया और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो इसके पीछे क्या कारण था।

युवाओं और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा बताया मुद्दा

संजय सेठ ने कहा कि JPSC की कार्यप्रणाली का सीधा संबंध राज्य के उन युवाओं से है जो वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। परीक्षा, परिणाम और नियुक्ति में देरी होने से उनकी उम्र, अवसर और भविष्य प्रभावित हो सकता है।

उन्होंने कहा कि मामला केवल एक पुराने पत्र तक सीमित नहीं है। यह JPSC की कार्यप्रणाली, समयबद्ध नियुक्ति और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता से जुड़ा विषय है।

संजय सेठ ने राज्य सरकार से मांग की कि तत्कालीन अध्यक्ष के पत्र पर हुई कार्रवाई की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही JPSC में लंबित प्रक्रियाओं की समीक्षा कर नियुक्ति और परीक्षा से जुड़े काम को समयबद्ध करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

हालांकि, तत्कालीन अध्यक्ष के पत्र पर राज्य सरकार की ओर से उस समय वास्तव में क्या कार्रवाई की गई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही इस संबंध में अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

इसे भी पढ़े – जल और तिरंगे के साथ निकली ‘भोले की दौड़’, बोल बम और भारत माता के जयघोष से गूंजा रांची

Share.
Next Story
NTPC के पदाधिकारियों को ग्रामीणों ने बनाया बंधक
Exit mobile version