Saturday, November 7

परंपरा, कला और सेवा-भावना का दिखा अनूठा संगम, विद्यार्थियों ने जरूरतमंद बच्चों के साथ बांटी दीपावली की खुशियां; पुस्तकें और शैक्षणिक सामग्री वितरित कर दिया सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश

रांची। सरला बिरला पब्लिक स्कूल, रांची में दीपावली का पर्व इस बार केवल रोशनी और सजावट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यहां संस्कृति, रचनात्मकता, परंपरा और सामाजिक सरोकारों का अनूठा संगम देखने को मिला। विद्यालय में दीपावली के अवसर पर एक सप्ताह तक विभिन्न शैक्षणिक, सांस्कृतिक और मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन किया गया। इसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और अपनी कला एवं प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को भारतीय संस्कृति और पारंपरिक त्योहारों के महत्व से परिचित कराने के साथ उनमें सहयोग, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना था।

रंगोली और पारंपरिक कलाओं में दिखी विद्यार्थियों की प्रतिभा

दीपावली महोत्सव के दौरान विद्यालय में कई रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने पारंपरिक रंगोली के साथ टेक रंगोली बनाकर कला और आधुनिक तकनीक का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया। इसके अलावा टेराकोटा पेंटिंग, पॉट पेंटिंग, लालटेन निर्माण, लिप्पन कला और दीप निर्माण जैसी गतिविधियों में भी बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता दिखाई।

विद्यार्थियों ने रंगों, आकृतियों और सजावटी वस्तुओं के माध्यम से आकर्षक कलाकृतियां तैयार कीं। इन गतिविधियों के जरिए उन्हें भारतीय हस्तशिल्प और पारंपरिक कला विधाओं की जानकारी मिली। साथ ही पर्यावरण के अनुकूल तरीके से त्योहार मनाने के प्रति भी जागरूक किया गया।

पुष्प सज्जा और फायरलेस कुकिंग ने बढ़ाया उत्साह

महोत्सव में पुष्प सज्जा प्रतियोगिता भी आकर्षण का केंद्र रही। विद्यार्थियों ने विभिन्न फूलों और रंगों के संयोजन से सुंदर सजावट तैयार की। उनकी प्रस्तुतियों में रचनात्मकता के साथ प्रकृति के प्रति प्रेम भी नजर आया।

वहीं, फायरलेस कुकिंग गतिविधि में विद्यार्थियों ने बिना आग का इस्तेमाल किए स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किए। इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों को स्वच्छता, पौष्टिक भोजन और सामूहिक रूप से काम करने का महत्व समझाया गया। बच्चों ने मिलकर व्यंजन तैयार किए और इस गतिविधि का आनंद लिया।

नन्हे बच्चों ने दीपक की आकृति बनाकर दिया एकता का संदेश

दीपावली महोत्सव में पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं के नन्हे बच्चों की प्रस्तुति ने विशेष आकर्षण पैदा किया। बच्चों ने आपसी तालमेल और उत्साह के साथ स्वयं को दीपक की आकृति में व्यवस्थित किया। दीपक की यह मनमोहक आकृति आशा, समृद्धि और सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक बनी। इसके माध्यम से बच्चों ने एकता, सहयोग और सामूहिकता का संदेश दिया।

विद्यार्थियों को दीपावली और छठ पर्व के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व से परिचित कराने के लिए विशेष जानकारीपरक वीडियो भी दिखाए गए। इनमें दोनों त्योहारों से जुड़ी परंपराओं, रीति-रिवाजों और पौराणिक कथाओं को रोचक तरीके से समझाया गया।

नृत्य, गीत और नाटक से सजा दीपावली समारोह

विद्यालय परिसर में आयोजित विशेष समारोह में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उत्सव की रौनक बढ़ा दी। विद्यार्थियों ने नृत्य, गीत और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से दीपावली से जुड़ी कथाओं और परंपराओं को मंच पर जीवंत किया।

इन प्रस्तुतियों के जरिए अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का संदेश दिया गया। इसके साथ ही विद्यार्थियों ने विद्यालय के डिस्प्ले बोर्डों को भी दीपावली की थीम पर सजाया। रंग-बिरंगे चित्रों, पारंपरिक प्रतीकों और प्रेरणादायी संदेशों से सजे बोर्ड आकर्षण का केंद्र बने।

जरूरतमंद बच्चों के साथ बांटी त्योहार की खुशियां

दीपावली महोत्सव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू विद्यार्थियों की सामाजिक पहल रही। सरला बिरला पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने राजकीयकृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय, आरा एवं महिलॉंग, रांची के बच्चों के साथ दीपावली की खुशियां साझा कीं। इस दौरान जरूरतमंद विद्यार्थियों को पुस्तकें, कॉपियां, पेंसिल बॉक्स और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई।

इस पहल के माध्यम से बच्चों को यह संदेश दिया गया कि त्योहारों की असली खुशी दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने और जरूरतमंदों की मदद करने में है। विद्यार्थियों को सहानुभूति, उदारता और सामाजिक सहभागिता जैसे मूल्यों को व्यवहार में अपनाने का अवसर मिला।

प्राचार्या ने विद्यार्थियों और शिक्षकों के प्रयासों को सराहा

विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती मनीषा शर्मा ने विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी और आयोजन को सफल बनाने में शिक्षकों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि त्योहार केवल मनोरंजन और उत्सव के अवसर नहीं हैं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और मानवीय संबंधों को मजबूत बनाने का भी माध्यम हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति जागरूकता, संवेदनशीलता और करुणा के साथ त्योहार मनाने के लिए प्रेरित किया। विद्यालय के अनुसार, इस आयोजन के जरिए सांस्कृतिक जागरूकता, रचनात्मकता और मूल्यपरक शिक्षा को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया।

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