Tuesday, October 13

रांची: झारखंड में खेल आयोजनों को लेकर कथित तौर पर ‘ऑफिशियल ठेकेदारी प्रथा’ हावी होने का आरोप लगाया गया है। भाजपा खेल प्रकोष्ठ के पूर्व राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य और 16वीं लोकसभा के सांसद प्रतिनिधि अनिल कुमार ने इस मुद्दे को लेकर चिंता जताते हुए केंद्र और राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।

अनिल कुमार ने कहा कि खेल किसी एक संस्था या संगठन का विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय विषय है। उनके अनुसार राज्य में कई संस्थाएं, स्कूल और कॉलेज अपने स्तर पर खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करते हैं, लेकिन कुछ खेलों में उन्हें कथित तौर पर यह कहा जाता है कि आधिकारिक मैच अधिकारी (Officials) केवल संबंधित खेल संघ से ही लिए जाएं।

उन्होंने आरोप लगाया कि जो संस्थाएं संबंधित खेल संघ से आधिकारिक अधिकारी नहीं लेतीं, उनके आयोजनों में पीछे से बाधा पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। खेल से जुड़े लोगों को ऐसे आयोजनों में सहयोग नहीं करने के लिए कहा जाता है और आयोजन से जुड़ी जानकारी कथित तौर पर कुछ लोगों तक पहुंचाई जाती है।

‘खिलाड़ियों के हित से ज्यादा व्यवस्था पर कब्जे की चिंता’

अनिल कुमार ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कुछ लोग खेल अधिकारियों की उपलब्धता को अपने नियंत्रण में रखने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘ठेकेदार’ शब्द का इस्तेमाल करना उन्हें भी अच्छा नहीं लगता, लेकिन कुछ खेलों में जिस तरह की कार्यप्रणाली सामने आ रही है, उसके कारण इस शब्द का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

उन्होंने सवाल उठाया कि इस तरह की व्यवस्था से राज्य की खेल प्रतिभाओं को कितना लाभ मिल रहा है और उनके विकास के लिए वास्तविक रूप से क्या काम किया जा रहा है। वर्तमान समय में स्कूल, कॉलेज और विभिन्न संस्थानों में डिप्लोमा तथा अन्य खेल योग्यताएं रखने वाले प्रशिक्षक मौजूद हैं। खेल टीम भावना से काम करने वाला क्षेत्र है और संस्थाएं अपने स्तर पर खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करने के लिए खेल संघों से सहयोग मांगती हैं। ऐसे में सहयोग को संस्था की कमजोरी मानना उचित नहीं है।

खेल संघ और संस्थाओं की भूमिका अलग-अलग होनी चाहिए

अनिल कुमार के मुताबिक खेल संघ और किसी स्कूल, कॉलेज या संस्था का अपना-अपना कार्यक्षेत्र है। कोई भी संगठन दूसरे के आयोजन में अनावश्यक बाधा नहीं पहुंचा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति, राष्ट्रीय ओलंपिक समिति, राष्ट्रीय खेल संघ, केंद्र सरकार या राज्य सरकार ने किसी एक संस्था या संघ को यह अधिकार दिया है कि राज्य में होने वाले हर खेल आयोजन के लिए आधिकारिक अधिकारी वही उपलब्ध कराए?

उन्होंने खेल संघों से उनके पिछले कार्यों का विवरण सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई। उन्होंने सवाल किया कि जो संघ हर आयोजन में अधिकारी उपलब्ध कराने का दावा करते हैं, उन्होंने राज्य में खेल विकास, खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के हित में कितने कार्यक्रम किए हैं और कितनी संस्थाओं, स्कूलों तथा कॉलेजों को सहयोग दिया है।

सरकार से खेल संघों के सहयोग की समीक्षा की मांग

अनिल कुमार ने केंद्र और राज्य सरकार से आग्रह किया कि जो खेल संघ देश या राज्य के खेल विकास में अपेक्षित योगदान नहीं कर रहे हैं, उन्हें सरकारी स्तर पर दिए जाने वाले सहयोग की समीक्षा की जाए।

उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों से भी अपील की कि यदि उनका कोई कर्मचारी या अधिकारी अपने संस्थान के हितों की तुलना में किसी खेल संघ की गतिविधियों को अधिक प्राथमिकता देता है और इससे संस्थान को नुकसान हो रहा है, तो प्रबंधन को इस पर नजर रखते हुए उचित कार्रवाई करनी चाहिए।

‘खेलो इंडिया’ की तर्ज पर ऑफिशियल सिस्टम में विकल्प की मांग

अनिल कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार की ‘खेलो इंडिया’ योजना खेलों में मनमानी और भ्रष्टाचार को रोकने, खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।  इसी तरह खेल आयोजनों में मैच ऑफिशियल उपलब्ध कराने की व्यवस्था में भी विकल्प तैयार करने की जरूरत है, ताकि किसी एक संघ पर पूरी तरह निर्भरता न रहे।  इस संबंध में केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष सुझाव दिया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ खेल संघों की कार्यप्रणाली से जुड़े अन्य मुद्दे भी हैं, जिनका प्रभाव देश और राज्य के खेल विकास पर पड़ रहा है। इन विषयों को भी सरकार के सामने रखा जाएगा।

उनके अनुसार उनका उद्देश्य किसी विशेष खेल संघ को निशाना बनाना नहीं, बल्कि खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और खेल प्रतिभाओं के लिए पारदर्शी एवं बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि खेल के क्षेत्र में किसी भी प्रकार का एकाधिकार प्रतिभाओं के विकास में बाधा नहीं बनना चाहिए।

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