Wednesday, October 14

चाईबासा, झारखंड: महिला कॉलेज चाईबासा के बीएड विभाग की 36 विज्ञान प्रशिक्षुओं ने हाल ही में टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा संचालित टाटा मल्टीस्किल सेंटर का एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक भ्रमण किया। इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को कौशल विकास कार्यक्रमों, तकनीकी प्रशिक्षण प्रक्रियाओं और उद्योग आधारित शिक्षण-अधिगम गतिविधियों की गहन जानकारी प्रदान करना था। यह पहल नई शिक्षा नीति के अनुरूप है, जो छात्रों को किताबी ज्ञान से परे वास्तविक दुनिया के अनुभवों से जोड़ने पर जोर देती है, जिससे वे भविष्य के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।

कौशल विकास: भविष्य के शिक्षकों के लिए एक नया दृष्टिकोण

शैक्षणिक भ्रमण के दौरान, टाटा मल्टीस्किल सेंटर के प्रतिनिधियों, राजीव कुमार और रोशनी कुमारी झा ने एक विस्तृत पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। उन्होंने सेंटर में चलाए जा रहे विभिन्न व्यावसायिक एवं कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षुओं को इलेक्ट्रिशियन, टू-व्हीलर सर्विस तकनीशियन, वेयरहाउस पैकर्स, इंडस्ट्रियल सिलाई मशीन ऑपरेटर और ब्यूटीशियन जैसे महत्वपूर्ण पाठ्यक्रमों से अवगत कराया गया। यह भी बताया गया कि जल्द ही ब्राइडल मेकअप आर्टिस्ट पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण भी शुरू किया जाएगा, जो युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोलेगा। यह दर्शाता है कि कैसे टाटा स्टील फाउंडेशन जैसे संगठन स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

छात्राओं ने सेंटर की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और प्रशिक्षण इकाइयों का भी गहनता से अवलोकन किया। उन्होंने वहां प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं से सीधा संवाद किया, उनकी प्रशिक्षण प्रक्रिया, उपयोग किए जाने वाले उपकरणों, सुरक्षा मानकों और कौशल आधारित रोजगार के अवसरों के बारे में जानकारी प्राप्त की। यह सीधा संवाद छात्राओं के लिए एक प्रेरणादायक अनुभव रहा, जहाँ उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों के व्यक्तिगत अनुभवों को भी साझा किया। इस तरह के प्रत्यक्ष अनुभव छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक दुनिया से जोड़ने में मदद करते हैं, जिससे उनकी समझ और आत्मविश्वास बढ़ता है।

शिक्षा का उद्देश्य: पुस्तकीय ज्ञान से परे

महिला कॉलेज चाईबासा की प्राचार्या डॉ. अंजना खलखो ने इस भ्रमण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन के अनुभवों से जोड़ना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के ज्ञान का विस्तार करते हैं और उन्हें उद्योग, तकनीक तथा कौशल विकास के विभिन्न क्षेत्रों से परिचित कराते हैं। यह कदम विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करता है और उन्हें बदलते वैश्विक परिदृश्य में प्रतिस्पर्धी बनने में सहायता करता है।

डॉ. अर्पित सुमन ने भी इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में कौशल आधारित शिक्षा और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण का महत्व तेजी से बढ़ गया है। उन्होंने उल्लेख किया कि नई शिक्षा नीति भी विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास से जोड़ने पर विशेष जोर देती है। डॉ. सुमन ने कहा कि भावी शिक्षकों के लिए कौशल विकास संस्थानों की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे भविष्य में अपने विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा और विभिन्न करियर विकल्पों के प्रति सही मार्गदर्शन दे सकें। उनका मानना है कि शिक्षकों को स्वयं इन अवसरों से परिचित होना चाहिए ताकि वे एक प्रभावी मार्गदर्शक बन सकें और छात्रों को सही दिशा दिखा सकें।

उन्होंने आगे कहा कि बीएड पाठ्यक्रम में विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों के लिए उद्योगों, प्रयोगशालाओं और औद्योगिक प्रतिष्ठानों का भ्रमण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे प्रशिक्षुओं को अपने सैद्धांतिक ज्ञान को व्यवहारिक परिस्थितियों से जोड़ने का सीधा अवसर मिलता है। ऐसे भ्रमण से अवलोकन, विश्लेषण, समस्या समाधान और नवाचार की क्षमता का विकास होता है, जो उन्हें एक समग्र शिक्षक बनने में मदद करता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो उन्हें सिर्फ पढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि छात्रों को प्रेरित करने और उनके भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए तैयार करती है।

आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम: छात्राओं की प्रतिक्रिया

भ्रमण के दौरान, प्रशिक्षु छात्राओं ने टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा संचालित कौशल विकास कार्यक्रमों की दिल खोलकर सराहना की। छात्राओं ने एक स्वर में कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण केंद्र युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने सेंटर में उपलब्ध आधुनिक संसाधनों, नवीनतम उपकरणों और सुव्यवस्थित प्रशिक्षण व्यवस्था को बेहद उपयोगी बताया। यह देखकर उन्हें भविष्य में ऐसे केंद्रों से जुड़ने की प्रेरणा भी मिली और उन्हें अपने करियर विकल्पों को लेकर नई दिशा मिली।

कार्यक्रम के अंत में, टाटा मल्टीस्किल सेंटर के प्रतिनिधियों ने छात्राओं को कौशल विकास कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा, प्रवेश प्रक्रिया, प्रशिक्षण की अवधि और सबसे महत्वपूर्ण, रोजगार के संभावित अवसरों के बारे में गहन जानकारी प्रदान की। यह जानकारी छात्राओं के भविष्य के करियर पथ के लिए अत्यंत मूल्यवान साबित होगी। इस अवसर पर टाटा फाउंडेशन की काउंसलर अंकी, जानकी रवींद्र, शिव शंकर, देवेंदु और मन्ना भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पहल को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। ऐसे प्रयासों से ही भारत में युवाओं को सही दिशा मिल पाती है। भारत सरकार भी कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के माध्यम से देश भर में कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा दे रही है, जो ऐसे स्थानीय प्रयासों को बल देते हैं और एक कुशल कार्यबल के निर्माण में सहायक होते हैं।

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