टंडवा के लरंगा सामेडीह गांव में रातभर मचा उत्पात, 40 डिसमिल में लगी धान की फसल रौंदी; दहशत में ग्रामीण
चतरा: झारखंड के चतरा जिले में जंगली हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है। टंडवा प्रखंड की राहम पंचायत अंतर्गत लरंगा सामेडीह गांव में बुधवार की रात करीब 15 से 16 हाथियों के झुंड ने जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने गांव में घुसकर चार घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया, वहीं घरों में रखे अनाज को भी नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा खेतों में लगी धान की फसल को रौंदकर बर्बाद कर दिया। इस घटना के बाद से पूरे गांव में दहशत का माहौल है।
रातभर हाथियों के डर से जागते रहे ग्रामीण
ग्रामीणों के अनुसार, बुधवार की रात हाथियों का झुंड गांव के आसपास पहुंच गया। इसके बाद हाथियों ने खेतों में लगी धान की फसल को रौंदना शुरू कर दिया और घरों में रखे अनाज को भी नुकसान पहुंचाया। हाथियों के झुंड में करीब 15 से 16 हाथी शामिल बताए जा रहे हैं। उनकी मौजूदगी से ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। लोगों को रातभर हाथियों के हमले और जान-माल के नुकसान का डर सताता रहा।
राहम निवासी युवा समाजसेवी उपेंद्र पांडेय ने बताया कि हाथियों के उत्पात से करीब 40 डिसमिल जमीन में लगी धान की फसल बर्बाद हो गई है। इसके अलावा लगभग 10 क्विंटल अनाज को नुकसान पहुंचा है और चार घर भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
वन विभाग पर ग्रामीणों ने लगाए लापरवाही के आरोप
उपेंद्र पांडेय ने आरोप लगाया कि हाथियों के गांव में पहुंचने की सूचना वन विभाग के कर्मियों को दी गई थी, लेकिन रात में वनकर्मी ग्रामीणों की मदद के लिए मौके पर नहीं पहुंचे। ऐसे में ग्रामीणों को खुद ही मोर्चा संभालना पड़ा। गांव के लोग रातभर जागकर अपने घरों, खेतों और परिवारों की सुरक्षा करते रहे।
युवा समाजसेवी उपेंद्र पांडेय ने इस घटना की जानकारी वन विभाग के अधिकारियों और स्थानीय थाना को भी दी है। ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप कर हाथियों के झुंड को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर खदेड़ने और प्रभावित परिवारों को सुरक्षा देने की मांग की है।
टंडवा में लंबे समय से बनी हुई है हाथियों की आवाजाही
टंडवा क्षेत्र में मानव और हाथियों के बीच संघर्ष की घटनाएं नई नहीं हैं। जानकारी के अनुसार, टंडवा का वन क्षेत्र करीब 21,349 हेक्टेयर में फैला हुआ है। पिछले डेढ़ दशक से इस इलाके में हाथियों की आवाजाही बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर हर साल कार्तिक से फाल्गुन महीने के बीच हाथियों के झुंड के पहुंचने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
जंगलों में पर्याप्त वनस्पति, पठारी भूभाग और आसपास के खेतों में उपलब्ध फसलें हाथियों को इस क्षेत्र की ओर आकर्षित करती हैं। वहीं, जंगलों के आसपास आबादी बढ़ने और घरों के निर्माण के कारण मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। घरों में रखे अनाज और महुआ की गंध भी हाथियों को गांवों की ओर खींचती है।
वनकर्मी हाथियों को खदेड़ने में जुटे : रेंजर
इस संबंध में वन विभाग के प्रभारी रेंजर राम बाबू ने बताया कि बुधवार की रात ग्रामीणों से हाथियों के झुंड के गांव के आसपास पहुंचने की सूचना मिली थी। झुंड में करीब 15 से 16 हाथी हैं। वन विभाग के कर्मी हाथियों को क्षेत्र की सीमा से बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं।
रेंजर ने यह भी बताया कि हाथियों के उत्पात से धान की फसल, घरों में रखे अनाज और चार मकानों को नुकसान पहुंचने की जानकारी मिली है। फिलहाल ग्रामीण हाथियों की मौजूदगी को लेकर भयभीत हैं और वन विभाग से जल्द राहत एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।
