Wednesday, October 14

रांची: झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहा छात्र आंदोलन सोमवार को एक तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया। जिस प्रदर्शन की शुरुआत छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से की थी, उसी आंदोलन के दौरान अब घायल छात्र, घायल सुरक्षाकर्मी और आंसुओं से भरे चेहरे नजर आ रहे हैं।

विधानसभा घेराव के लिए बड़ी संख्या में छात्र राजधानी पहुंचे। अलग-अलग इलाकों से आए इन युवाओं के हाथों में तख्तियां थीं, आंखों में अपने भविष्य को लेकर उम्मीद थी और आवाज में अपनी मांगों को लेकर दृढ़ता। लेकिन जैसे-जैसे प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर बढ़े, हालात बदलते गए।

पुलिस की ओर से लगाए गए बैरिकेडिंग को छात्रों ने एक के बाद एक पार किया। उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद स्थिति और तनावपूर्ण होती गई। पथराव की घटनाओं में पुलिसकर्मियों के घायल होने की सूचना सामने आई, वहीं कई प्रदर्शनकारी छात्रों के भी घायल होने की जानकारी है। मौके पर दो बच्चों के बेहोश होने की भी सूचना सामने आई।

आंदोलन के बीच आंसुओं का सैलाब

वाटर कैनन की बौछार, धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी के बीच आंदोलन का चेहरा भी बदलता नजर आया। जो युवा कुछ घंटे पहले नारे लगाते हुए अपने अधिकार की मांग कर रहे थे, उनमें से कुछ घायल अवस्था में नजर आए। किसी की आंखों में आंसू थे, तो कोई अपने साथी को संभालता दिखाई दिया।

यह सिर्फ एक प्रदर्शन की तस्वीर नहीं है। इन चेहरों के पीछे नौकरी की तैयारी में लगाए गए वर्षों, परिवारों की उम्मीदों और भविष्य की चिंता की कहानी भी है।

दूसरी ओर, कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संभाल रहे जवान भी इस टकराव की चपेट में आए। घायल सुरक्षाकर्मियों की तस्वीरें भी यह सवाल सामने रखती हैं कि आखिर वह स्थिति क्यों आई, जहां अपनी मांगों के लिए सड़क पर उतरे युवा और उन्हें नियंत्रित करने वाले सुरक्षाकर्मी आमने-सामने खड़े हो गए।

मांगों से शुरू हुआ आंदोलन, टकराव तक पहुंचा

पिछले कई दिनों से छात्र JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों और सरकार के बीच बातचीत के कई दौर भी हुए हैं। इसके बावजूद कुछ मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी और छात्रों ने विधानसभा घेराव का फैसला किया।

सोमवार को राजधानी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। जगह-जगह बैरिकेडिंग, कंटीले तार और वाटर कैनन लगाए गए। लेकिन प्रदर्शनकारी कई बैरिकेडिंग पार करते हुए विधानसभा के करीब पहुंच गए।

अब सबसे जरूरी सवाल केवल यह नहीं है कि कौन पीछे हटेगा, बल्कि यह है कि इस पूरे विवाद का समाधान कैसे निकलेगा।

संवाद ही रास्ता, टकराव नहीं

लोकतंत्र में असहमति की जगह है और युवाओं को अपनी मांग रखने का अधिकार भी है। वहीं कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। लेकिन जब दोनों पक्षों के बीच संवाद की जगह टकराव बढ़ने लगे, तो नुकसान आखिरकार समाज का ही होता है।

आज रांची की सड़कों पर बहते आंसू यही याद दिला रहे हैं कि मुद्दा चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसका समाधान हिंसा या टकराव में नहीं, संवाद और संवेदनशीलता में तलाशना होगा।

JPSC-JSSC का मुद्दा लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा है। इसलिए जरूरी है कि घायल छात्रों और जवानों की स्थिति को देखते हुए सभी पक्ष संयम बरतें और बातचीत के जरिए ऐसा रास्ता निकाला जाए, जिसमें न छात्रों का भविष्य घायल हो और न लोकतंत्र की मर्यादा।

इसे भी पढ़े – विधानसभा मार्च में बवाल: पुलिस पर पथराव, जवान घायल; 2 बच्चे भी बेहोश

Share.
Next Story
JPSC आंदोलन की आंच अन्य जिलों तक पहुंची, बसों की आवाजाही पर पुलिस की नजर
Exit mobile version