बोकारो: कभी घर में रखी दो सिलाई मशीनों से शुरू हुआ काम आज एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका है, जहां उससे एक परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और पांच अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है। यह कहानी है बोकारो जिले के नावाडीह प्रखंड स्थित सुरही गांव की रहने वाली सलमा प्रवीन की, जिन्होंने अपने हुनर और मेहनत के दम पर छोटे से काम को एक उद्यम में बदल दिया।
23 जुलाई 2022 को शुरू हुआ उनका सिलाई का सफर आज सलमा सिलाई सेंटर के रूप में पहचान बना चुका है। बेरमो-फुसरो से लेकर चास-बोकारो तक उनके यहां तैयार होने वाले महिला परिधानों की मांग है। सलमा की यह पहल दिखाती है कि सीमित संसाधनों से भी आत्मनिर्भरता की राह बनाई जा सकती है।
दो मशीनों से शुरुआत, मेहनत से बढ़ता गया कारोबार
सलमा प्रवीन ने वर्ष 2022 में अपने पति की दो सिलाई मशीनों से काम शुरू किया था। शुरुआत छोटी थी, लेकिन उनके इरादे मजबूत थे। लगातार मेहनत और सिलाई के हुनर के सहारे उन्होंने अपने काम को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया।
आज उनके सिलाई सेंटर में मुख्य रूप से थोक स्तर पर महिलाओं के परिधानों की सिलाई होती है। इस उद्यम का मासिक व्यावसायिक टर्नओवर करीब 70 से 75 हजार रुपये है, जबकि सालाना टर्नओवर लगभग 8 से 10 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
यह बढ़ता कारोबार सलमा के लिए केवल कमाई का जरिया नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने और परिवार को आर्थिक मजबूती देने का माध्यम भी बना है।
अपने साथ पांच महिलाओं को भी दिया रोजगार
सलमा की सफलता की खास बात यह है कि उनके काम से अब पांच अन्य महिला कारीगर भी जुड़ी हुई हैं। उनके सिलाई सेंटर से इन महिलाओं को रोजगार मिला है और स्थानीय स्तर पर आजीविका का एक अवसर तैयार हुआ है।
सलमा ने अपने काम के जरिए यह भी दिखाया है कि स्वरोजगार का फायदा केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। जब कोई छोटा उद्यम आगे बढ़ता है, तो वह अपने साथ दूसरे लोगों के लिए भी काम के रास्ते खोल सकता है।
गांव से कई बाजारों तक बनी पहचान
सलमा सिलाई सेंटर में तैयार होने वाले महिला परिधानों की पहुंच कई बाजारों तक है। बेरमो-फुसरो, ईसरी-डुमरी, गोमो-धनबाद और चास-बोकारो के बाजारों में उन्होंने अपनी पहचान बनाई है।
ग्रामीण क्षेत्र से शुरू हुआ यह काम अब अलग-अलग बाजारों तक पहुंच चुका है। सलमा की यह यात्रा उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो हुनर होने के बावजूद सीमित साधनों के कारण अपना काम शुरू करने से हिचकती हैं।
सखी मंडल से जुड़ाव ने दी नई पहचान
सलमा प्रवीन झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) के तहत चांद आजीविका सखी मंडल से जुड़ी हैं। इसके अलावा वह राम रहीम आजीविका महिला ग्राम संगठन और नावाडीह आजीविका महिला संकुल संगठन से भी संबद्ध हैं।
सखी मंडल से जुड़ाव और स्वरोजगार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ सामाजिक पहचान भी दिलाई है।
सलमा की कहानी, आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद
उनकी यह उपलब्धि ग्रामीण महिलाओं की क्षमता और मेहनत की एक मिसाल है। दो मशीनों से शुरू हुआ काम आज उनके परिवार को आर्थिक सहारा देने के साथ पांच अन्य महिलाओं की आजीविका से भी जुड़ा है।
बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा ने सलमा की सफलता को ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना जिले के विकास की महत्वपूर्ण कड़ी है। सलमा ने सीमित संसाधनों में मेहनत और हुनर से सफलता हासिल कर अन्य महिलाओं को भी रोजगार दिया है। उनकी सफलता सखी मंडल की दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा है।
सलमा का सफर इस बात की याद दिलाता है कि आत्मनिर्भरता की शुरुआत के लिए हमेशा बड़े निवेश की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी दो मशीनें, हुनर पर भरोसा और लगातार मेहनत ही एक ऐसे सफर की नींव बन जाते हैं, जिससे कई घरों में उम्मीद की रोशनी पहुंचती है।
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