क्या गरीब की जिंदगी की कोई कीमत नहीं होती? शायद हां ऐसी ही एक तस्वीर रातू काठीटांड़ से सामने आई जहां एक अज्ञात ट्रक ने स्कूल के सामने एक छात्र रंजीत कुमार गुप्ता को कुचल दिया और मौके पर से फरार हो गया। इस हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। रंजीत अपने भाई-बहनों में सबसे छोटा था। मृतक रंजीत कुमार गुप्ता रातू थाना क्षेत्र के टोंगरी टोला का रहने वाला था। वह सीएनराज हाई स्कूल में पढ़ता था। फ़िलहाल मृतक का दोस्त घायल है और यह घटना सुबह 10 बजे रातू चट्टी में घटी थी।
न कोई डॉक्टर मौजूद था, न कोई नर्स
हादसे के तुरंत बाद परिजन बच्चे को लेकर नजदीकी हर्षित अस्पताल पहुंचे, इस उम्मीद के साथ कि समय पर इलाज मिले। लेकिन जो हुआ वह किसी को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में करीब आधे घंटे तक बच्चा दर्द से तड़पता रहा, मगर न कोई डॉक्टर मौजूद था, न कोई नर्स। कीमती समय यूं ही बर्बाद होता रहा, और जब हालत बिगड़ी तो परिजन बच्चे को रिम्स ले जाने के लिए दौड़े, लेकिन रास्ते में ही मासूम रंजीत ने दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि अगर हर्षित हॉस्पिटल में आने के बाद घायल बच्चे को समय पर एडमिड और फर्स्ट ऐड हो जाता तो आज शायद उसकी जान बच सकती थी।
लोगों का क्या है कहना ?
इस घटना ने हर्षित अस्पताल की इलाज व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। लोगों का कहना है कि आखिर एक निजी अस्पताल में इमरजेंसी के वक्त डॉक्टर और नर्स की गैरमौजूदगी कैसे संभव है? क्या एक गरीब ठेला चालक के बेटे की जिंदगी की कोई कीमत नहीं थी? घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है और गुस्साए लोगों ने सड़क पर उतरकर चक्का जाम भी किया, जिससे इलाके में यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई थी। लोगों ने प्रशासन से मांग की कि हादसे के जिम्मेदार ट्रक चालक की जल्द गिरफ्तारी हो, साथ ही हर्षित अस्पताल के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाए। प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित कर चुकी है और हर्षित अस्पताल को दोषी ठहराया है। बता दे रंजीत के पिता धनंजय प्रसाद गुप्ता ठेला चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बेटे की मौत के बाद परिवार सदमे में है।
