Wednesday, October 14

रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस  ने पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक योगेंद्र साव को अनुशासनहीनता के आरोप में तीन साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ उनकी बयानबाजी और पार्टी के निर्देशों की अवहेलना को कार्रवाई की वजह बताया गया है। हालांकि, इस फैसले के साथ ही सवाल उठने लगे हैं कि कांग्रेस का यह अनुशासनात्मक कदम कितने समय तक प्रभावी रहेगा और क्या पहले की तरह भविष्य में भी निष्कासन वापस लिया जाएगा ?

पहले भी हुए थे निष्कासित…

कांग्रेस की अनुशासन समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, योगेंद्र साव को इससे पहले 20 मार्च 2026 को अनुशासनहीनता के कारण पार्टी से निष्कासित किया गया था। बाद में उन्होंने पार्टी अनुशासन का पालन करने का आश्वासन दिया और अपने व्यवहार पर खेद जताया। इसके बाद 25 जून 2026 को उन्हें दोबारा पार्टी में बहाल कर दिया गया।

लेकिन बहाली के कुछ समय बाद फिर से बयानबाजी और पार्टी के निर्देशों की अवहेलना का मामला सामने आया। अनुशासन समिति ने इसे गंभीर मानते हुए दोबारा कार्रवाई की सिफारिश की, जिसके बाद उन्हें तीन साल के लिए निष्कासित कर दिया गया।

मुख्यमंत्री पर टिप्पणी बनी कार्रवाई की वजह

योगेंद्र साव ने हाल के दिनों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधते हुए उन्हें “विश्व का सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री” कहा था। कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा राज्य की गठबंधन सरकार में साथ हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी ने पार्टी के सामने असहज स्थिति पैदा कर दी।

कांग्रेस के लिए एक ओर गठबंधन की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर अपने नेताओं के बयानों और पार्टी अनुशासन पर नियंत्रण रखने की चुनौती भी है। योगेंद्र साव पर हुई कार्रवाई को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

निष्कासन की सजा कितनी प्रभावी होगी?

झारखंड कांग्रेस में नेताओं के निष्कासन और बाद में उनकी वापसी के उदाहरणों को लेकर पहले भी चर्चा होती रही है। ऐसे में योगेंद्र साव के मामले में तीन साल के निष्कासन का फैसला एक सवाल छोड़ रहा है कि क्या पार्टी इस अवधि तक अपने फैसले पर कायम रहेगी या भविष्य में परिस्थितियों के अनुसार उनकी वापसी का रास्ता भी खुल जाएगा ?

अनुशासन पर सख्ती की परीक्षा

योगेंद्र साव के मामले में कांग्रेस की कार्रवाई केवल एक नेता के निष्कासन तक सीमित नहीं है। यह पार्टी के भीतर अनुशासन लागू करने और गठबंधन के प्रति जिम्मेदारी निभाने की नीति की भी परीक्षा है। अब यह देखना होगा कि पार्टी अपने फैसले पर कितनी दृढ़ रहती है और योगेंद्र साव इस कार्रवाई के बाद अपनी राजनीतिक रणनीति क्या तय करते हैं।

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