Thursday, November 5

प्रशिक्षु शिक्षक संसद के प्रधानमंत्री कृष्णानंद ने किया उद्घाटन, ‘ऊंचा-नीचा पहाड़-पर्वत’ लोकगीत की प्रस्तुति ने बांधा समां; शिक्षकों से भावी पीढ़ी तक जनजातीय विरासत पहुंचाने का आह्वान

रांची, 5 नवंबर। जनजातीय गौरव, सांस्कृतिक अस्मिता और परंपराओं के संरक्षण के संदेश के साथ गवर्नमेंट टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज (GTTC), कांके में गुरुवार को जनजातीय गौरव दिवस पखवाड़ा का भव्य शुभारंभ हुआ। सत्र 2026–28 के प्रशिक्षु शिक्षकों की ओर से आयोजित कार्यक्रम में जनजातीय लोकसंस्कृति, परंपरा और ऐतिहासिक योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रशिक्षु शिक्षक संसद के प्रधानमंत्री कृष्णानंद ने किया।

इस अवसर पर प्रशिक्षु शिक्षक संसद के उप प्रधानमंत्री मो. कामरान, कला एवं संस्कृति मंत्री प्रतीक शर्मा और शिक्षा मंत्री शशिकांत कुमार सहित महाविद्यालय के सभी प्रशिक्षु शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन कक्षा मॉनिटर मनन कुमार ने किया, जबकि आगत अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत प्रशिक्षु शिक्षक पंकज साव ने किया।

लोकगीत के जरिए दिखाई जनजातीय संस्कृति की झलक

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण जनजातीय लोकगीत ‘ऊंचा-नीचा पहाड़-पर्वत’ की सामूहिक प्रस्तुति रही। प्रशिक्षु शिक्षक नमन, वीरेंद्र कुल्लू, अभिषेक राजेंद्र एक्का, मो. साजिद अंसारी और समीर विश्वकर्मा ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से जनजातीय जीवन, प्राकृतिक परिवेश और लोकपरंपराओं की सुंदर झलक पेश की। लोकगीत ने सभागार में मौजूद लोगों को जनजातीय संस्कृति से जोड़ दिया।

वहीं, प्रशिक्षु शिक्षक अभिषेक राजेंद्र एक्का ने जनजातीय गौरव दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इससे जुड़ी महान विभूतियों के जीवन और उनके योगदान की जानकारी दी।

जनजातीय विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना शिक्षकों की जिम्मेदारी

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक एवं कला-संस्कृति विभाग के समन्वयक डॉ. ओम प्रकाश ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस महज उत्सव या औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत, सांस्कृतिक अस्मिता, स्वाभिमान, संघर्ष और योगदान को सम्मान देने का अवसर है।

उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा सहित अनेक जनजातीय महानायकों ने जल, जंगल, जमीन, सामाजिक अधिकारों और देश की स्वतंत्रता के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया। उनकी जीवनगाथा साहस, आत्मसम्मान, सामाजिक चेतना और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देती है।

डॉ. ओम प्रकाश ने कहा कि एक शिक्षक के रूप में यह जिम्मेदारी है कि भावी पीढ़ी को जनजातीय समाज की समृद्ध परंपराओं, लोकज्ञान, भाषा, कला, संस्कृति और ऐतिहासिक योगदान से परिचित कराया जाए। शिक्षा के माध्यम से जनजातीय विरासत का संरक्षण और संवर्धन करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने आगे कहा कि जनजातीय गौरव दिवस पखवाड़ा प्रशिक्षु शिक्षकों को भारतीय संस्कृति की विविधता समझने, स्थानीय लोकपरंपराओं से जुड़ने और समावेशी एवं मूल्यपरक शिक्षा की भावना विकसित करने का सार्थक अवसर प्रदान करता है।

कार्यक्रम में प्रशिक्षु शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को खास बना दिया। पखवाड़ा के शुभारंभ के साथ ही जनजातीय संस्कृति, परंपरा और महान विभूतियों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।

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