Thursday, November 5

3500 से अधिक छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और अतिथियों की मौजूदगी में हुआ भव्य आयोजन; ‘तत्वमसि’, ‘शक्ति’, ‘वीर गाथा’, ‘अखरा’ और ‘कृष्ण की चेतावनी’ जैसी प्रस्तुतियों ने दर्शकों का जीता दिल

रांची। शहर के प्रतिष्ठित डीएवी नंदराज पब्लिक स्कूल, बरियातू में गुरुवार को वार्षिकोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में करीब 1000 बच्चों ने विभिन्न सांस्कृतिक और कलात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर 3500 से अधिक छात्र-छात्राएं, अभिभावक और आमंत्रित अतिथि मौजूद रहे। कार्यक्रम में प्रशासनिक, शैक्षणिक, सामाजिक और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोगों ने शिरकत की। समारोह का मुख्य आकर्षण बच्चों की रंगारंग प्रस्तुतियां रहीं, जिनमें भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा, नारी शक्ति, वीरता और झारखंड की लोक-संस्कृति की झलक देखने को मिली।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके बाद बच्चों ने इंस्ट्रूमेंटल संगीत की प्रस्तुति दी, जिसकी उपस्थित लोगों ने सराहना की। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आईएएस अधिकारी एवं माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजेश प्रसाद उपस्थित रहे। उनके साथ एनसीसी के अधिकारी, डालसा के प्रतिनिधि, झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारी, आर्य ज्ञान प्रचार समिति और आर्यसमाज के पदाधिकारी, शहर के शिक्षाविद, चिकित्सक और अभिभावक शामिल हुए।

‘कृष्ण की चेतावनी’ ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध, गूंजती रही तालियों की आवाज

सांस्कृतिक कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने एक के बाद एक आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। ‘शुभागमन’ से शुरू हुए कार्यक्रम में ‘तत्वमसि’ के माध्यम से पंचतत्व और वैदिक शिक्षा की अवधारणा को नृत्य के जरिए दर्शाया गया। ‘शक्ति’ प्रस्तुति में नारी शक्ति का प्रभावशाली चित्रण किया गया, जबकि ‘वीर गाथा’ के माध्यम से वीरता और साहस का संदेश दिया गया।

इसके अलावा ‘कंथा’, ‘अंधेर नगरी’, ‘मैजिकल सर्कस’ और झारखंड की लोक-संस्कृति पर आधारित ‘अखरा’ जैसी प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम का सबसे प्रभावशाली क्षण तब आया, जब बच्चों ने रामधारी सिंह दिनकर की रचना ‘रश्मिरथी’ पर आधारित ‘कृष्ण की चेतावनी’ का मंचन किया। इस प्रस्तुति ने पूरे सभागार को भाव-विभोर कर दिया और दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से बच्चों का उत्साह बढ़ाया।

मुख्य अतिथि राजेश प्रसाद ने बच्चों की मेहनत और प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में बच्चों के पास आगे बढ़ने के लिए अनेक साधन और अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि उनके समय में इतने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं हुआ करते थे, जबकि आज बच्चे अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

200 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को किया गया सम्मानित

वार्षिकोत्सव के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले करीब 200 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही पूर्व वर्षों में विद्यालय से पढ़ाई पूरी कर चुके कुछ विद्यार्थियों और अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल करने वाले छात्रों को भी सम्मान दिया गया। मानवीय मूल्यों और सकारात्मक पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान देने वाले मीडिया से जुड़े शुभचिंतकों को भी सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर आर्य ज्ञान प्रचार समिति के अध्यक्ष शत्रुघ्न लाल गुप्ता और आर्यसमाज रांची की आजीवन संरक्षिका सुशीला गुप्ता को मुख्य अतिथि ने ‘विशिष्ट आजीवन निःस्वार्थ सेवा सम्मान’ से सम्मानित किया। समारोह में उनकी सामाजिक और परोपकारी सेवाओं को सराहा गया।

पढ़ाई के साथ एआई, हेल्थकेयर और ड्रोन निर्माण पर भी जोर

स्वागत भाषण में विद्यालय के प्राचार्य डॉ. रवि प्रकाश तिवारी ने अतिथियों, अभिभावकों और उपस्थित गणमान्य लोगों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वार्षिकोत्सव बच्चों के परिश्रम और उनकी प्रतिभा का परिणाम है। विद्यालय के विद्यार्थी राष्ट्रीय, राज्य और शहर स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पुरस्कार प्राप्त कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि विद्यालय में पारंपरिक शिक्षा के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), हेल्थकेयर और ड्रोन निर्माण जैसी आधुनिक तकनीकों से जुड़ी शिक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है। विद्यालय के बच्चों ने गीता प्रतियोगिता में भी उपलब्धि हासिल की है, जहां 60 विद्यार्थियों को पुरस्कार मिले। इनोवेशन के क्षेत्र में भी विद्यार्थियों ने दिल्ली में पुरस्कार प्राप्त कर विद्यालय का नाम रोशन किया है।

प्राचार्य ने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को शैक्षणिक रूप से सफल बनाना नहीं, बल्कि उनमें चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्यों का विकास करना भी है। उन्होंने अभिभावकों से विद्यालय के प्रयासों में निरंतर सहयोग बनाए रखने की अपील की।

आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कृति और संस्कारों का संगम

विशिष्ट अतिथि ने विद्यालय में संगीत विभाग, एआई की पढ़ाई और ड्रोन निर्माण जैसी गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने विशाल यज्ञशाला की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि विद्यालय आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी सभ्यता और संस्कृति के प्रति भी गंभीर है। यह विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में सकारात्मक प्रयास है।

कार्यक्रम के अंत में आर्य ज्ञान प्रचार समिति के प्रधान प्रेम प्रकाश आर्य ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य सभ्य और संस्कारवान बच्चों का निर्माण करना है। इसी उद्देश्य से विद्यालय परिसर में विशाल यज्ञशाला और महर्षि दयानंद की प्रतिमा स्थापित की गई है, ताकि बच्चे उनसे प्रेरणा ले सकें। उन्होंने अतिथियों, अधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों और अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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