Thursday, November 5

राजधानी रांची स्थित संत जेवियर्स कॉलेज, रांची में भौतिकी विभाग की ओर से गुरुवार, 5 नवंबर 32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस (NCSC)-2026 के लिए जिला स्तरीय प्रतिभागियों के चयन की प्रक्रिया सफलतापूर्वक आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में रांची के करीब 25 स्कूलों के 150 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने अपने स्कूलों के मार्गदर्शक शिक्षकों के साथ विज्ञान और नवाचार से जुड़े अपने शोध एवं प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए।

‘ स्थिरता के लिए विज्ञान और नवाचार ‘ रहा इस वर्ष का मुख्य विषय

इस वर्ष राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की मुख्य थीम ‘सस्टेनेबिलिटी के लिए विज्ञान और नवाचार’ (Science and Innovation for Sustainability) रखी गई है। इसके तहत विद्यार्थियों ने पांच प्रमुख विषयों पर अपने शोध और विचार प्रस्तुत किए। इनमें कचरा प्रबंधन, ऊर्जा, जल संरक्षण, खाद्य पदार्थ-कृषि एवं स्वास्थ्य तथा स्थिरता के लिए भारतीय ज्ञान प्रणाली का उपयोग शामिल रहा।

यह कार्यक्रम भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद (NCSTC) का प्रमुख कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक सोच, शोध, नवाचार और समस्याओं के समाधान की क्षमता विकसित करना है।

डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने विद्यार्थियों को किया प्रेरित, AI के सीमित उपयोग पर दिया जोर

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री (IAS) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को ऐसे शैक्षणिक और वैज्ञानिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के विचार मौलिक होने चाहिए और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल केवल सहायक माध्यम के रूप में सीमित रहना चाहिए।

उन्होंने जिज्ञासा, रचनात्मकता और समाज पर शोध के सकारात्मक प्रभाव को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही सवाल पूछने की कला पर जोर देते हुए कहा कि कई बड़ी खोजों की शुरुआत सामान्य से दिखने वाले सवालों से होती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के उप-प्राचार्य एवं भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. स्वराट चौधरी ने की। उन्होंने इस वर्ष की थीम और पांचों विषयगत क्षेत्रों की प्रासंगिकता समझाई। उन्होंने विद्यार्थियों को AI से तैयार विचारों के बजाय मौलिक और नवाचारपूर्ण विषयों पर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया। वहीं, कार्यक्रम के मेंटर फादर डॉ. अजय अरुण मिंज एस.जे ने भी विद्यार्थियों को जिज्ञासु बनने की सलाह दी। उन्होंने न्यूटन के उदाहरण के माध्यम से सवाल पूछने और उनके जवाब खोजने के महत्व को समझाया।

विशेषज्ञों ने किया मूल्यांकन, चयनित प्रतिभागियों के नाम राज्य स्तर पर भेजे जाएंगे

विद्यार्थियों के शोध और नवाचार से जुड़े प्रोजेक्ट का मूल्यांकन विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों के पैनल ने किया। मूल्यांकन के बाद चयनित विद्यार्थियों के नाम जिला अकादमिक समन्वयक की ओर से राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भागीदारी के लिए भेजे जाएंगे।

मूल्यांकनकर्ताओं के पैनल में डॉ. एनवीए राव, डॉ. रितेश शुक्ला, डॉ. अनुपमा भार्गव, डॉ. प्रिया श्रीवास्तव, डॉ. रेमन कुमार सिंह, बीआईटी मेसरा के डॉ. किंगशुक बोस, डॉ. श्रेया पांडेय, रांची वीमेंस कॉलेज की डॉ. अमृता कुमारी, योगदा सत्संग के डॉ. संतोष सिंह, डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा, डॉ. शिव शंकर प्रसाद और डॉ. राजीव रंजन श्रीवास्तव शामिल रहे।

कार्यक्रम के अंत में भौतिकी विभाग के जिला अकादमिक समन्वयक डॉ. सुमित कुमार राय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। आयोजन को सफल बनाने में राज्य समन्वयक डॉ. अतेंद्र कुमार, जिला समन्वयक डॉ. रवि कुमार, डॉ. मितेश चक्रवर्ती, डॉ. राजेश कुमार, स्वागता चक्रवर्ती, अरुणाभ मुखर्जी, राहुल सिंह, राकेश प्रसाद, किरीटी महतो, प्रवीण टोप्पो, बिपिन और अब्नेर का योगदान रहा। भौतिकी विभाग के छात्र स्वयंसेवकों ने भी कार्यक्रम के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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