टाइप-2 डायबिटीज के करोड़ों मरीजों के लिए राहत मानी जाने वाली SGLT2 इन्हिबटर दवाओं को लेकर एक नई रिसर्च ने अलार्म बजा दिया है। ब्लड शुगर कंट्रोल करने के साथ-साथ हार्ट और किडनी के मरीजों को भी फायदा पहुंचाने वाली ये दवाएं अब कुछ खास परिस्थितियों में जानलेवा साबित हो सकती हैं। स्वीडन के वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में चेताया है कि इन दवाओं से कुछ मरीजों में डायबिटिक कीटोएसिडोसिस जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है, जिसने डॉक्टरों और मरीजों दोनों के लिए सतर्क रहने की जरूरत को उजागर कर दिया है।
किन मरीजों को ज्यादा खतरा
कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने करीब 2.8 लाख टाइप-2 डायबिटीज मरीजों के हेल्थ रिकॉर्ड का अध्ययन किया। पाया गया कि जिन मरीजों को पहले कभी कीटोएसिडोसिस हुआ हो, जिनका वजन बहुत कम हो, किडनी से जुड़ी दिक्कत हो या पहले लो ब्लड शुगर की समस्या रही हो, उनमें यह जोखिम अधिक देखा गया। संक्रमण को भी इस स्थिति के ट्रिगर होने की सबसे आम वजह बताया गया है।
क्या है कीटोएसिडोसिस
यह स्थिति तब बनती है जब शरीर ग्लूकोज की जगह फैट को ऊर्जा के लिए ज्यादा इस्तेमाल करने लगता है, जिससे खून में कीटोन्स नामक हानिकारक पदार्थ बढ़ने लगते हैं। अत्यधिक प्यास, बार-बार पेशाब, पेट दर्द, उल्टी और धुंधला दिखना इसके प्रमुख लक्षण हैं। द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, कई देशों में 2015 से 2023 के बीच कीटोएसिडोसिस के मामलों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों की सलाह
शोधकर्ताओं का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं कि इन दवाओं का इस्तेमाल बंद कर दिया जाए, बल्कि डॉक्टरों को दवा देने से पहले मरीज की पूरी स्वास्थ्य जांच करनी चाहिए ताकि अधिक जोखिम वाले मरीजों की पहचान समय रहते हो सके और इलाज सुरक्षित तरीके से किया जा सके।
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