झारखंड राज्य की प्रतिष्ठित समाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक संस्था झारखंड राजस्थानी अकादमी को एक नया और ऊर्जावान नेतृत्व मिला है। हाल ही में संपन्न हुए चुनाव में श्री विनय सरावगी को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया है, जिसके साथ ही संस्था ने सत्र 2026-26 के लिए अपनी नई कार्यकारिणी का गठन कर लिया है। यह खबर न केवल अकादमी के सदस्यों के लिए, बल्कि पूरे झारखंड में राजस्थानी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े लोगों के लिए उत्साहवर्धक है।
झारखंड राजस्थानी अकादमी: नए नेतृत्व का चुनाव और भविष्य की दिशा
झारखंड राज्य में सामाजिक और सांस्कृतिक उत्थान के लिए समर्पित झारखंड राजस्थानी अकादमी के पदाधिकारियों का चुनाव सत्र 2026-26 शांतिपूर्ण और सफल ढंग से सम्पन्न हुआ। चुनाव प्रक्रिया की देखरेख चुनाव पदाधिकारी श्री अजय मारू ने की, जिन्होंने निर्वाचित कार्यकारिणी सदस्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अकादमी के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों के लिए योग्य उम्मीदवारों का चयन करना था।
सर्वप्रथम, अध्यक्ष पद के लिए श्री विनय सरावगी का नाम प्रस्तावित किया गया, जिन्हें सभी उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से अपना समर्थन देते हुए निर्वाचित घोषित किया। यह चुनाव प्रक्रिया में उनकी लोकप्रियता और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है। श्री सरावगी का चयन अकादमी के लिए एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है, जिसमें सांस्कृतिक संरक्षण और विस्तार को प्राथमिकता दी जाएगी।
अध्यक्ष पद के चुनाव के बाद, अन्य महत्वपूर्ण पदों के लिए भी सर्वसम्मति से चयन किए गए।
- उपाध्यक्ष पद पर श्री बसंत मित्तल एवं श्री पंकज पोद्दार को जिम्मेदारी सौंपी गई।
- महासचिव के प्रतिष्ठित पद के लिए श्री रविशंकर शर्मा टोली को चुना गया।
- कोषाध्यक्ष का महत्वपूर्ण कार्यभार श्री शिवशंकर साबू को प्रदान किया गया।
- सहसचिव के रूप में श्री मनोज बजाज एवं श्री राकेश जैन रारा को निर्वाचित घोषित किया गया।
यह पूरी टीम मिलकर झारखंड राजस्थानी अकादमी के उद्देश्यों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
अध्यक्ष विनय सरावगी की दूरदर्शी योजनाएं: संस्कृति और पहचान का विस्तार
नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री विनय सरावगी ने पदभार संभालने के बाद अपने उद्गार व्यक्त करते हुए संस्था के मुख्य उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा कि अकादमी का प्रमुख लक्ष्य राजस्थान की समृद्ध भाषा, संस्कृति, साहित्य, संस्कार, पहनावा, मान सम्मान और खान-पान को व्यापक रूप से प्रचारित करना है। झारखंड राजस्थानी अकादमी इस पुनीत कार्य में महती भूमिका दर्ज कराएगी, यह उनका संकल्प है।
श्री सरावगी ने संस्था के विस्तार की भी योजना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि वर्तमान में अकादमी के 100 संस्थापक सदस्य हैं, और जल्द ही राज्य स्तर पर सदस्यों का व्यापक विस्तार किया जाएगा। यह विस्तार न केवल अधिक लोगों को संस्था से जोड़ेगा, बल्कि राजस्थानी संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने में भी मदद करेगा। उनका मानना है कि जितनी अधिक संख्या में लोग इस आंदोलन से जुड़ेंगे, उतनी ही तेजी से संस्कृति का संरक्षण और विकास हो पाएगा। यह सिर्फ सदस्यता बढ़ाने का अभियान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकजुटता का प्रतीक होगा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से रविंद्र भवन के उद्घाटन की अपील
अपने संबोधन के दौरान, श्री विनय सरावगी ने एक महत्वपूर्ण अपील भी की। उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि रविंद्र भवन का जल्द से जल्द उद्घाटन किया जाए। रविंद्र भवन का संचालन झारखंड में सांस्कृतिक गतिविधियों और आयोजनों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। उनका मानना है कि इससे राज्य का चौमुखी विकास होगा, क्योंकि संस्कृति किसी भी समाज की आत्मा होती है और इसका पोषण राज्य की प्रगति के लिए अनिवार्य है।
रविंद्र भवन जैसे सांस्कृतिक केंद्रों का अभाव अक्सर स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक समूहों को अपनी प्रतिभा दिखाने से वंचित करता है। इसके उद्घाटन से न केवल कला और संस्कृति को एक मंच मिलेगा, बल्कि युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने और अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करने का अवसर भी मिलेगा। यह पहल झारखंड को सांस्कृतिक मानचित्र पर और भी अधिक मजबूती से स्थापित करेगी। झारखंड के सांस्कृतिक विकास के लिए सरकारी सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है, और ऐसे में मुख्यमंत्री से यह अपील स्थानीय समुदाय की गहरी आशाओं को दर्शाती है। आप झारखंड सरकार की विभिन्न सांस्कृतिक पहलों के बारे में अधिक जानकारी यहां प्राप्त कर सकते हैं।
सांस्कृतिक सद्भाव और एक नए युग की शुरुआत
झारखंड राजस्थानी अकादमी का यह नया नेतृत्व, विशेषकर श्री विनय सरावगी के रूप में, राजस्थानी समुदाय के लिए एक आशा की किरण है। यह न केवल अपनी जड़ों से जुड़े रहने का अवसर प्रदान करेगा, बल्कि झारखंड की बहुसांस्कृतिक विरासत में भी एक महत्वपूर्ण योगदान देगा। संस्था का उद्देश्य केवल अपनी संस्कृति का प्रचार करना नहीं, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों के बीच सेतु का निर्माण करना भी है।
कार्यक्रम के अंत में, नवनिर्वाचित महासचिव श्री रविशंकर शर्मा ने उपस्थित सभी सदस्यों और अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर कार्यकारिणी सदस्य संदीप मुरारका, अशोक पुरोहित, आशीष मोदी मीनू और दीपक मारू सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। यह उपस्थिति संस्था के प्रति सदस्यों की प्रतिबद्धता और नए नेतृत्व के प्रति उनके समर्थन को दर्शाती है। यह चुनाव सिर्फ पदाधिकारियों का चयन नहीं, बल्कि झारखंड राजस्थानी अकादमी के उज्ज्वल भविष्य की नींव है, जो आने वाले वर्षों में सांस्कृतिक उत्थान और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देगा।
