Saturday, October 3

रांची। झारखंड में वन्यजीवों के संरक्षण और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वन्य प्राणी सप्ताह की शुरुआत हो गई है। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से 2 से 7 अक्टूबर तक आयोजित किए जा रहे इस सप्ताह की शुरुआत रांची स्थित वन विभाग के सभागार ‘पलाश’ में हुई। उद्घाटन कार्यक्रम में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने किया। इस दौरान पीसीसीएफ वन्य प्राणी रविरंजन, विशेष सचिव के. जेड. भुटिया, सीसीएफ एस. आर. नटेशा समेत विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे। वन्य प्राणी सप्ताह के दौरान वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण और इंसानों तथा वन्यजीवों के बीच बेहतर तालमेल को लेकर अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

सह-अस्तित्व को बनाया गया मुख्य विषय

इस वर्ष वन्य प्राणी सप्ताह का मुख्य फोकस मानव एवं वन्यजीवों के सह-अस्तित्व पर रखा गया है। झारखंड में जंगल और वन्यजीवों की मौजूदगी के साथ कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्र भी वन क्षेत्रों के आसपास बसे हैं। ऐसे में वन्यजीवों के संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा भी वन विभाग के सामने महत्वपूर्ण चुनौती है।

उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान इसी विषय पर चर्चा हुई। विभाग की ओर से इस बात पर जोर दिया गया कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के साथ ऐसे उपाय भी जरूरी हैं, जिससे जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों और वन्यजीवों के बीच टकराव की स्थिति को कम किया जा सके।

झारखंड में करीब 30 प्रतिशत वन क्षेत्र

मीडिया से बातचीत में प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने कहा कि झारखंड में करीब 30 प्रतिशत वन क्षेत्र मौजूद है। राज्य के लिए यह वन संपदा पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन वन्यजीवों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाए रखना अभी भी एक चुनौती है।

उन्होंने कहा कि वन विभाग लगातार इस दिशा में काम कर रहा है। प्रयास यह है कि ऐसा वातावरण तैयार किया जाए, जहां वन्यजीव अपने प्राकृतिक क्षेत्र में सुरक्षित तरीके से विचरण कर सकें और जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों को भी किसी तरह का खतरा न हो।

उनके अनुसार, वन्यजीव संरक्षण को केवल जंगल और जानवरों तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। इसके साथ मानव सुरक्षा और स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए विभाग की ओर से संरक्षण संबंधी गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा रहा है।

वन्यजीव संरक्षण के साथ लोगों की सुरक्षा भी चुनौती

झारखंड में हाथी समेत कई वन्यजीवों की मौजूदगी के कारण कई बार जंगल से सटे इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति सामने आती है। ऐसे में वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनके विचरण क्षेत्र को सुरक्षित रखने के साथ स्थानीय लोगों को जागरूक करना भी जरूरी माना जा रहा है।

वन्य प्राणी सप्ताह के दौरान लोगों को वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील बनाने और जंगल तथा वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। विभाग की कोशिश है कि संरक्षण के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए।

छह दिनों तक चलेंगे कार्यक्रम

वन्य प्राणी सप्ताह 2 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों, स्थानीय समुदायों और आम लोगों को वन्यजीवों के महत्व की जानकारी देने का प्रयास किया जाएगा।

उद्घाटन कार्यक्रम में विभाग के अधिकारियों ने वन्यजीव संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए लोगों की भागीदारी की जरूरत पर भी जोर दिया। विभाग का फोकस वन्यजीवों को सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में प्रयासों को आगे बढ़ाने पर है।

वन्य प्राणी सप्ताह के जरिए विभाग ने एक बार फिर यह संदेश देने की कोशिश की है कि जंगल और वन्यजीवों का संरक्षण केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि राज्य के पारिस्थितिक संतुलन और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है।

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