Wednesday, October 14

रामगढ़: रांची-रामगढ़ मार्ग की चट्टूपालू घाटी से गुजरना वाहन चालकों के लिए सिर्फ एक सामान्य सफर नहीं है। लंबी ढलान और भारी वाहनों की आवाजाही वाले इस मार्ग पर छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे की वजह बन सकती है। ऐसे में सवाल अब सिर्फ दुर्घटनाओं का नहीं, बल्कि हादसे से पहले सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है, इसका है।

घाटी में भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारी के अनुसार, कुछ ट्रक और हाइवा चालक ढलान पर वाहन को बंद कर या न्यूट्रल में डालकर नीचे उतारने की कोशिश करते हैं। ऐसी स्थिति में वाहन पर नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल हो सकता है और दूसरे वाहन भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

रात में बढ़ जाता है जोखिम

चिंता सिर्फ तेज रफ्तार या वाहन नियंत्रण तक सीमित नहीं है। रात के समय भारी वाहन चालकों के शराब के नशे में वाहन चलाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। अगर तेज रफ्तार, ढलान और नशे में ड्राइविंग एक साथ हों, तो खतरा और बढ़ जाता है।

चट्टूपालू घाटी जैसे संवेदनशील मार्ग पर इसका असर सिर्फ भारी वाहन चालक तक सीमित नहीं रहता। सड़क पर चल रहे छोटे वाहन, बाइक सवार और राहगीर भी इसकी जद में आ सकते हैं।

जांच और निगरानी पर सवाल

ऐसे हालात में नियमित जांच और निगरानी की जरूरत सबसे ज्यादा है। भारी वाहनों की जांच, चालकों की ब्रेथ एनालाइजर से जांच, गति नियंत्रण और यातायात नियमों के पालन की निगरानी जैसे कदम हादसों की आशंका को कम कर सकते हैं।

इसके साथ ही वाहन चालकों को ढलान पर सुरक्षित तरीके से वाहन चलाने को लेकर लगातार जागरूक करना भी जरूरी है। नियम सिर्फ कागज पर हों और सड़क पर उनका पालन न हो, तो संवेदनशील मार्ग पर खतरा बना ही रहेगा।

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